Old Testament
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यूहन्ना 6:1 यूहन्ना 6:2 यूहन्ना 6:3 यूहन्ना 6:4 यूहन्ना 6:5 यूहन्ना 6:6 यूहन्ना 6:7 यूहन्ना 6:8 यूहन्ना 6:9 यूहन्ना 6:10 यूहन्ना 6:11 यूहन्ना 6:12 यूहन्ना 6:13 यूहन्ना 6:14 यूहन्ना 6:15 यूहन्ना 6:16 यूहन्ना 6:17 यूहन्ना 6:18 यूहन्ना 6:19 यूहन्ना 6:20 यूहन्ना 6:21 यूहन्ना 6:22 यूहन्ना 6:23 यूहन्ना 6:24 यूहन्ना 6:25 यूहन्ना 6:26 यूहन्ना 6:27 यूहन्ना 6:28 यूहन्ना 6:29 यूहन्ना 6:30 यूहन्ना 6:31 यूहन्ना 6:32 यूहन्ना 6:33 यूहन्ना 6:34 यूहन्ना 6:35 यूहन्ना 6:36 यूहन्ना 6:37 यूहन्ना 6:38 यूहन्ना 6:39 यूहन्ना 6:40 यूहन्ना 6:41 यूहन्ना 6:42 यूहन्ना 6:43 यूहन्ना 6:44 यूहन्ना 6:45 यूहन्ना 6:46 यूहन्ना 6:47 यूहन्ना 6:48 यूहन्ना 6:49 यूहन्ना 6:50 यूहन्ना 6:51 यूहन्ना 6:52 यूहन्ना 6:53 यूहन्ना 6:54 यूहन्ना 6:55 यूहन्ना 6:56 यूहन्ना 6:57 यूहन्ना 6:58 यूहन्ना 6:59 यूहन्ना 6:60 यूहन्ना 6:61 यूहन्ना 6:62 यूहन्ना 6:63 यूहन्ना 6:64 यूहन्ना 6:65 यूहन्ना 6:66 यूहन्ना 6:67 यूहन्ना 6:68 यूहन्ना 6:69 यूहन्ना 6:70 यूहन्ना 6:71



सूचना-आग्रह: यीशु के आश्चर्य-करमो से भीड़ क्यों बढ़ी
सीधी बात यह है कि यूहन्ना 6:2 में लिखा गया है कि एक बड़ी भीड़ पीछे-पीछे चल दी, क्योंकि जो आश्चर्यकर्म वह बीमारों पर दिखाता था, वे उसे देखते थे। यह कथन बताता है कि यीशु के चमत्कार लोग कैसे आकर्षित करते थे और कैसे इन चमत्कारों के कारण लोग उसके प्रति जिज्ञासा और आस्था दोनों से जुड़ते थे।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह घटना यूहन्ना के gospel के पहले भाग में घटित होती है, जहां यीशु अपना मंत्रालय शुरू कर चुके होते हैं और जन अनेक प्रकार के रोगों से मुक्त होने के लिए पंक्तिबद्ध होते हैं। चमत्कार उनके संदेश का एक दृश्य प्रमाण था—ईश्वर के Kingdom की निकटता की खबर को भीड़ तक पहुँचाने का एक शक्तिशाली माध्यम।
व्यावधानात्मक अवलोकन
सारसूत्र, थीमैटिक बिंदु
अन्य पाठ-backed संदर्भ
दूसरे गवाही-पाठों से मिलने वाले संकेत हैं: - चमत्कार से जनसमूह की प्रतिक्रिया: यह उनके समर्पण और विश्वास की विविधता को दर्शाता है; एक पक्ष आस्थावान होता है, दूसरा आकर्षण पर टिके रहता है। - यीशु की करुणा: रोगी को देखकर उत्तर देना, दया दिखाना—यह प्रेम का व्यवहार है। - संदेश की स्पष्टता: चमत्कार सुनते समय यह नहीं कि लोग तुरंत समझ लें, बल्कि वे अनुसरण की राह खोजते हैं।
अनुवाद-नोट्स (संकेत मात्र)
यह पंक्ति HINIRV में सरल और स्पष्त रूप से प्रस्तुत है: भीड़ के पीछे चल पड़ने का कारण केवल आश्चर्य ही नहीं, बल्कि वह आश्चर्य जिसमें बीमार सहायता पाते हैं—जो दिखाता है कि यीशु ईश्वर के राज्य की पुष्टि कैसे करते हैं।
संयोजन: व्यवहारिक निष्कर्ष
आज के पाठ के लिए एक स्पष्ट takeaway यह है: यदि हम यीशु के काम को देखते हैं और उसकी करुणा के साथ Respond करते हैं, तो हमारा विश्वास भी गहरा होता है—परिभाषित चमत्कार से नहीं केवल नई उम्मीद से। हमें अपेक्षा रहे कि ईश्वर हमारे जीवन में भी वही दयालुता खोलते हैं, जो रोगों और दुःखों के बीच आशा बनकर आता है।
उद्धरण-नोट
अगर आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सीधे शब्द ढूंढते हैं, तो ध्यान दें कि इनमें से कुछ विचार उनके अपने टिप्पणियों में चमत्कार-आलोक, आस्था बनाम जिज्ञासा, और यीशु की दया—इन विषयों पर दोहराते हैं। उनके शब्द सीधे उद्धरित यहाँ पर नहीं दिए गए हैं, पर इन दार्शनिक धुनों के भीतर ही यह टिप्पणी सुसंगत है।