Old Testament
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मत्ती 4:24 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और सारे सीरिया देश में उसका यश फैल गया; और लोग सब बीमारों को, जो विभिन्न प्रकार की बीमारियों और दुःखों में जकड़े हुए थे, और जिनमें दुष्टात्माएँ थीं और मिर्गीवालों और लकवे के रोगियों को उसके पास लाए और उसने उन्हें चंगा किया।
मत्ती 4:24 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मत्ती 4:24 समानांतर पद और संबंधित वचन
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मत्ती 17:15 (HINIRV) »
“हे प्रभु, मेरे पुत्र पर दया कर! क्योंकि उसको मिर्गी आती है, और वह बहुत दुःख उठाता है; और बार-बार आग में और बार-बार पानी में गिर पड़ता है।

मत्ती 17:18 (HINIRV) »
तब यीशु ने उसे डाँटा, और दुष्टात्मा उसमें से निकला; और लड़का उसी समय अच्छा हो गया।

क्यों यह वचन महत्वपूर्ण है
मत्ती 4:24 में यीशु के प्रभाव और उसकी सेवा की व्यापकता स्पष्ट होती है। पूरे देश में उसका यश फैलना दिखाता है कि प्रभु का राज्य धीरे-धीरे जमीन पर आ रहा है; वह लोगों के दिलों-दिमाग़ में आशा का केंद्र बन रहा है। जिस प्रकार लोग बीमारियों और दुःखों से जकड़े हुए लोगों को लाए, वही दर्शाता है कि ईश्वर का प्रेम और चंगाई उन तक पहुँचने के लिए तैयार है। यह verse यीशु की निश्चयात्मकता, शान्ति-लाभ और सत्यान्वेषी सेवा का सार प्रस्तुत करता है।
मूल संदर्भ और पृष्ठभूमि
यह वचन मत्ती के Gospel के शुरुआती चरणों का है, जहाँ यीशु का प्रचार-कार्य शुरू होता है और वह चंगा करने वाले के रूप में उभरते हैं। यीशु के विभु-यश की गाथा और उसकी शिक्षाओं के बीच यह संकेत है कि उसकी “राज्य-यात्रा” बीमारों के साथ संवाद बनाती है। यह एक सामुदायिक दृष्टि देता है कि ईश्वर का राज्य उन लोगों के लिए है जो सामाजिक या चिकित्सीय दृष्टि से मुखाकर्षण से बाहर माने जाते हैं—जिन्हें लोग अक्सर हल्के में लेते या त्याग देते हैं।
मुख्य संदेश
विशेष थीम्स और तुलनात्मक संकेत
यह वचनों का मिश्रण साबित करता है कि यीशु के चंगाई-कार्य में डाक्टर-सीधा इरादा नहीं, बल्कि दया और सत्य का समन्वय है। जो लोग समाज से अलग-थलग पड़े रहते थे, उनके लिए वह एक सच्चे उद्धारकर्ता के रूप में चित्रित होते हैं। यह कहानी ईसाई-समुदाय के लिए सेवा-संबंधी आह्वान को मजबूत करती है—स्वास्थ्य-चेतना, आध्यात्मिक अधिष्ठान और दया-कार्य एक साथ चलते हैं।
क्रॉस-रेफरेंसेज (संकेत व संकल्प)
1) मरकुस 1:34 — यीशु ने शहरों में चंगा किया, यह दिखाते हुए कि उसका राज्य लोगों तक कैसे पहुँचेगा।
2) लुका 4:18 — उद्धार, चंगा, और दया-कार्य एक गोलार्ध में लाये जाते हैं; यह सेवक-उद्धार के रूप में मसीह के मिशन का विवरण है।
3) यशायह 35:5-6 — मसीह के आने पर अंधे-चेतना, कान-खुलना और रोगियों का निवारण कैसे होता है—प्रतीकात्मक पूर्वालोचन।
पैग़लिक विचारों का संकल्प
इस पाठ से यह निष्कर्ष निकलता है कि ईश्वर का राज्य व्यक्ति के समस्त दुखों और बन्धनों को बेध कर आता है। चंगाई केवल बीमारी की जड़ काटना नहीं, बल्कि व्यक्ति के जीवन में नई आशा और समाजीकरण की पुनर्स्थापना है। यह प्रवृत्ति चर्च के लिए एक स्थिर, करुणामय मिशन बनती है—जहां हर रोगी, हर पिड़ित, हर दुष्टात्मा से त्रस्त व्यक्ति को सम्मान और स्थान मिलता है।
संक्षिप्त देवotional विचार
प्रत्येक दिन में हमें याद रखना चाहिए कि प्रभु की चंगाई हमारे व्यक्तिगत संघर्षों से भी बड़े स्तर पर चलती है—यह न सिर्फ शारीरिक उपचार है, बल्कि आत्मिक नवीनीकरण है। अपने आप को यीशु के प्रेम के घेरे में रखना और दूसरों के लिए भी वही करुणा दिखाना, एक सच्चे अनुयायी के रूप में हमारा उद्देश्य बनना चाहिए।
अनुभागीय सुझाव
- अपने जीवन के रोग-या दुःख को Jesus के पास लाने की सरल अर्जी बनाएं।
- समुदाय के भीतर दया-कार्य की छोटी-छोटी क्रियाओं की योजना करें—घरेलू स्वास्थ्य-जागरूकता, असहायों की देखभाल आदि।
युक्तियाँ उद्धृत किये गए शिक्षकों के विशेष संकेत: यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के नेम-डायरेक्ट शब्द देखना चाहें, तो उनके मूल टिप्पणियों में इस वचन के चंगाई-आह्वान पर मिलती-जुलती समीक्षा मिलती है; पर यहां हमने सार-संयोजन किया है ताकि पाठ सीधे समझ में आये।