Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीमत्ती 4:5 बाइबल पद की व्याख्या
मत्ती 4:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब शैतान उसे पवित्र नगर में ले गया और मन्दिर के कंगूरे पर खड़ा किया। (लूका 4:9)
मत्ती 4:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
मत्ती 4:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

लूका 4:9 (HINIRV) »
तब उसने उसे यरूशलेम में ले जाकर मन्दिर के कंगूरे पर खड़ा किया, और उससे कहा, “यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो अपने आप को यहाँ से नीचे गिरा दे।

प्रकाशितवाक्य 11:2 (HINIRV) »
पर मन्दिर के बाहर का आँगन छोड़ दे; उसे मत नाप क्योंकि वह अन्यजातियों को दिया गया है, और वे पवित्र नगर को बयालीस महीने तक रौंदेंगी।

मत्ती 27:53 (HINIRV) »
और उसके जी उठने के बाद वे कब्रों में से निकलकर पवित्र नगर में गए, और बहुतों को दिखाई दिए।
मत्ती 4:5 — शैतान के ललकार का उत्तरदायित्व
यह वाक्य हमारे जीवन के सीधे परीक्षण को दर्शाता है: परमेश्वर के पुत्र यीशु मसीह को शैतान ने पवित्र नगर में ले जाकर मन्दिर के कंगूरे पर खड़ा किया। यह घटना न केवल पचासों वर्षों के कठिन समय की कहानी है, बल्कि हर believer के लिए वास्तविक नैतिक परीक्षा की मिसाल भी है—कि कदम उठाते समय हम आत्म-विश्वास और धर्मनिष्ठा दोनों की कसौटी कैसे पार करें।
सं Context and meaning
यह घटना मसीह के प्रारम्भिक वर्षों के समय की है, जब उन्होंने प्रेरितों के बुलावे से पहले आत्म-आत्म-विकास के चरण पूरे किए। शैतान ने यीशु को राज्यशक्ति या स्व-प्रकाशन के रास्ते पर जाने के लिए निमंत्रण दिया—“यदि तुम परमेश्वर के पुत्र हो, तो नीचे से (या ऊपर से) उतर कर लोकलाभ प्राप्त करो।” पर यीशु ने पवित्र नगर और मन्दिर के चकाचौंध को सत्ता-यात्रा नहीं बनन दिया।
मुख्य संदेश
- साक्षात्कार-स्थिति में भी ईश्वर के पुत्रत्व की पुष्टि के लिए महत्त्वपूर्ण सत्य यह है कि बिना विचलन के परमेश्वर की योजना पर चलना चाहिए।
- शैतान दिखावे के पीछे वास्तविक स्वार्थ दिखाने की कोशिश करता है—चाहे वह एक महान मन्दिर का मंच हो या प्रसिद्ध नगर का उच्च द्वार।
- मत्ती 4:5 हमें प्रेरित करता है कि हम हर तर्क और हर प्रस्ताव को परमेश्वर के वचन के अनुसार जाँचें।
अन्य विषयों के साथ सम्बद्ध पथ
क्रॉस-रेफरेंस (3)
- लूका 4:9 (इसी घटना का अन्य रिपोर्ट): यह पुष्टि करता है कि शैतान ने विविध परीक्षण स्थल चुने।
-്വാസ 1 पतरस 5:8: बाधाओं के समय जागरूक रहना और शत्रु के चालों से सचेत रहना।
- याकूब 4:7: प्रतिरोध देने की प्रेरणा—ईश्वर के विरुद्ध नहीं, परमेश्वर के विरुद्ध जोशपूर्ण प्रयासों के विरुद्ध।
कर्ता-व्यावहारिक टिप्पणी
हाईलाइट यह है कि परमेश्वर के पुत्र ने पवित्र शास्त्र के उद्धरण से तर्क दिए। यह बताता है कि आध्यात्मिक स्थिरता कठिन समय में भी शब्द-आधार पर ही टिके रहने से मिलती है। जब हमारे सामने शोभा-चमक और शक्ति-लालच आये, हमें भी वही पथ चुनना चाहिए जो ईश्वर के निर्देश से मेल खाता हो—आत्मसमर्पण, विश्वसनीयता, और प्रार्थना के साथ।
Devotional reflection
आज भी शैतान नए रूपों में आता है—हमारे दिनों के मंच, हमारी प्रतिष्ठा, हमारे आत्म-गौरव के रास्ते। हमें वही तरीका अपनाना चाहिए जो यीशु ने दिखाया: चुनौती मिलती है, पर हमारा मापदंड परमेश्वर के वचन में है। यदि हम हर अवसर पर शास्त्र के सत्य को केंद्रित रखें, तो हमारी आत्मा में स्थिरता, आशीर्वाद और ईश्वर-निर्भरता बनी रहती है।
याद रखने योग्य संक्षिप्त विचार: सच की कसौटी में शंकर-शक्ति नहीं, परमेश्वर के वचन और प्रभु की प्रेरणा ही सर्वोपरि है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (जिनका हवाला निहित है):
“यीशु ने कहा, मन्दिर के ऊपर से नीचे उतरना नहीं, परन्तु परमेश्वर के शब्दों के अनुसार उत्तर देना ही सही है।”