मत्ती 4:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब यीशु ने उससे कहा, “हे शैतान दूर हो जा, क्योंकि लिखा है: ‘तू प्रभु अपने परमेश्‍वर को प्रणाम कर, और केवल उसी की उपासना कर।’” (व्य. 6:13)

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मत्ती 4:10 पद-दर-पद बाइबल टीका

सीधी परिचय: मत्ती 4:10 का अर्थ

इस वाक्य में यीशु स्पष्ट और दृढ़ रूप से शैतान के हर दबाव और सांसारिक誘惑 को अस्वीकार करते हैं, और केवल परमेश्वर को प्रणाम और उसकी उपासना को सर्वोपरि मानते हैं। प्रलोभन के क्षण में उन्होंने शास्त्रीय धारणा के अनुरूप एक परमेश्वर के प्रति अटूट समर्पण दिखाया।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यहोशुवा के संदेशों के बाद, यीशु ने जंगल में चालीस दिन उपवास किया और शैतान उसके सामने आकर उसे सांसारिक सत्ता, चमत्कार, और गौरव के बजाय परमेश्वर की पूजा के लिए बुलाते हुए परीक्षा दी। यीशु का उत्तर तीनों समय वही है—िर्चित प्रत्यक्ष उद्धारक के रूप में परमेश्वर में स्थिरता। यहाँ उनका उद्धारक स्वरूप और बतौर छात्र-खिताब की भूमिका स्पष्ट है: परमेश्वर ही प्रथम है, और उसकी सेवा के अलावा कोई अन्य सत्ता समर्थ नहीं है।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • प्रत्येक परीक्षण एक बड़ी ईमानदारी का आह्वान है—हम किस रूप में प्रभु को देखते हैं: प्राथमिक, या सफलता-धन-स्वामित्व के सांकेतिक देवताओं के नीचे?
  • येशुआ का उत्तर: शास्त्र कहता है कि प्रभु के सामने पूर्ण सम्मान और केवल उसी की उपासना व सेवा आवश्यक है; यह परमेश्वर की सत्ता और पूजा की एकता को रेखांकित करता है।

संदेश के मुख्य अंश (आउटलाइन)

  1. एक एकाग्रता: केवल परमेश्वर की worship सर्वोपरि है।
  2. आत्म-त्याग: सांसारिक आकर्षण भी इसे चुनौती देते हैं, पर यीशु ने दृढ़ता से नकार दिया।
  3. कर्म-निष्ठा: प्रभु से पहले कुछ भी नहीं, यही सच्ची आज्ञापालन है।

संबद्ध आयतें और उनके अर्थ

परोक्ष गूढ़ार्थ के साथ कुछ सूक्तियाँ जो इस घटनाक्रम से जुड़ती हैं:

  • व्यवस्थापित आज्ञा: “प्रभु अपने परमेश्वर को प्रणाम कर, और केवल उसी की उपासना कर”—यह निर्गुण अनुशासन बताती है कि परमेश्वर के अतिरिक्त किसी अन्य सेवा को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
  • अन्य आयतों के संकेत: यीशु की यह प्रतिक्रिया पुराने नियम के उद्धारक-उद्धृतियों के अनुरूप है, जो ईमानदारी और एकेश्वरवाद को स्थापित करती है।

cross-references (संक्षेप में अर्थ सहित)

1) यूहन्ना 14:6 के समान एकेश्वरवाद और मार्ग की शुद्धता पर बल; 2) लूका 4:8 में भी शैतान के साथ विरोध की भूमिका; 3) दृढ़ विश्वास के लिए याकूब 4:7 की प्रेरणा।

इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर की एकात्र पूजा और उसकी सेवा सर्वोच्च है, और किसी भी सांसारिक लालच से उसे प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता।

संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष

हम सभी अपनी जिंदगी में शैतानी प्रलोभनों के सामने एक ही मार्ग अपनाएं: प्रभु के सामने घुटने टेक दें, दायित्वपूर्ण विश्वास रखें, और प्रभु की आज्ञाओं को पहले रखें। दैनिक निर्णयों में ईश्वर से पूछकर ही कदम उठाएं—यही जीवन-संघर्ष का विश्वसनीय उत्तर है।

यानी कोर संदेश

प्रभु की worship में एकता बनाकर रखें; किसी भी क्षण स्वयं को परमेश्वर के सामने समर्पित करें और सांसारिक आकर्षणों को उसकी प्रधानता के आगे दबने दें।

टिप्पणी: Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के संदर्भ में: यीशु की प्रत्यक्ष उत्तर-संदेश में “तू प्रभु अपने परमेश्वर को प्रणाम कर, और केवल उसी की उपासना कर” के अभिव्यक्ति का समर्थन उनके नियम-आदेश पर आधारित व्याख्या में मिलता है; इनमें से 2-3 पंक्तियाँ उद्धृत करते समय यह नोट किया गया है कि प्रभु के अलावा किसी अन्य के सामने श्रद्धा न डाली जाए।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 4:10 समानांतर पद और संबंधित वचन

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अपने परमेश्‍वर यहोवा का भय मानना; उसी की सेवा करना, और उसी के नाम की शपथ खाना। (मत्ती 4:10, लूका 4:8)

व्यवस्थाविवरण 10:20 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
व्यवस्थाविवरण 10:20 (HINIRV) »
अपने परमेश्‍वर यहोवा का भय मानना; उसी की सेवा करना और उसी से लिपटे रहना, और उसी के नाम की शपथ खाना।

यहोशू 24:14 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यहोशू 24:14 (HINIRV) »
“इसलिए अब यहोवा का भय मानकर उसकी सेवा खराई और सच्चाई से करो; और जिन देवताओं की सेवा तुम्हारे पुरखा फरात के उस पार और मिस्र में करते थे, उन्हें दूर करके यहोवा की सेवा करो।

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