Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीमत्ती 4:6 बाइबल पद की व्याख्या
मत्ती 4:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और उससे कहा, “यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो अपने आप को नीचे गिरा दे; क्योंकि लिखा है, ‘वह तेरे विषय में अपने स्वर्गदूतों को आज्ञा देगा, और वे तुझे हाथों हाथ उठा लेंगे; कहीं ऐसा न हो कि तेरे पाँवों में पत्थर से ठेस लगे*।’” (भज. 91:11-12)
मत्ती 4:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
मत्ती 4:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

भजन संहिता 91:11 (HINIRV) »
क्योंकि वह अपने दूतों को तेरे निमित्त आज्ञा देगा, कि जहाँ कहीं तू जाए वे तेरी रक्षा करें।

भजन संहिता 34:7 (HINIRV) »
यहोवा के डरवैयों के चारों ओर उसका दूत छावनी किए हुए उनको बचाता है। (इब्रा. 1:14, दान. 6: 22)

2 कुरिन्थियों 11:14 (HINIRV) »
और यह कुछ अचम्भे की बात नहीं क्योंकि शैतान आप भी ज्योतिर्मय स्वर्गदूत का रूप धारण करता है।
मत्ती 4:6 पर दृष्टिकोण: परमेश्वर के पुत्र के विरुद्ध पापी परीक्षा
इस पद में शिक्षा का केंद्र यह है कि शैतान ने यीशु से परमेश्वर के पुत्र होने के ठोस प्रमाण की मांग की। बेचैनी और भ्रांति से परे, यह आदर्श परख है कि परमेश्वर के वचन से प्रेरित जीवन कैसे जोखिम-भरे परीक्षणों के बीच भी विश्वास के साथ टिके रहते हैं। भजन-यात्रा में मोक्षदाता ने न केवल अजेय शक्ति दिखाने की मांग,S बल्कि अपने संबंध और ज्ञान पर आधारित प्रतिरक्षा का मार्ग अपनाया है—ईश्वर के वचन की सुरक्षा।
ऋण-भिन्न अध्याय में संदर्भ
यह पाठ मत्ती के पहले अध्याय के बाद आता है जब यीशु जंगल में परीक्षण से गुजरते हैं। शैतान ने उसे तीन बार टटोला—नीतिगत ध्वनि, अकथित धार्मिकता, और खुद के व्यक्तिगत महिमामंडन के अंशों पर। यदि यीशु ने नीचे गिरने को स्वीकार कर लिया होता, तो वह परमेश्वर के पुत्र की उसकी भूमिका को अधूरा मान लेते, और शाश्वत योजना से विचलित होते। परन्तु यीशु ने हर बार ईश्वर के वचन से उत्तर दिया और सत्य के रास्ते पर दृढ़ रहा।
मुख्य सीख
अन्य पवित्र ग्रंथों से संगति
Cross-reference 1: भज 91 का सार—ईश्वर अपने बच्चों को सुरक्षा देता है जब वे उसकी निरंतर स्वागत-आज्ञाओं में रहते हैं। यह उद्धृत वचन शैतान को एक विशिष्ट सिद्धांत देता है: परमेश्वर के साथी बनकर चलना, न कि स्वयं के पराक्रम पर टिकना।
Cross-reference 2: यूहना 14:28 में यीशु कहते हैं कि पिता अधिक महिमा में है—यह दिखाता है कि प्रभु के जीवन में परमेश्वर का उद्देश्य सर्वोपरि है, न कि इंसानी आत्म-गौरव।
Cross-reference 3: 1 कुरिन्थियों 10:13 के अनुसार, हर परीक्षा मानवीय चेष्टा से अधिक है, पर परमेश्वर हमारे साथ है और वह हमें संभव उपाय देता है।
व्यावहारिक आवेदन
जीवन में जब भी आत्मा-आतंक या असफलता का डर हो, हमें इन उपदेशों को याद रखना चाहिए: पहले परमेश्वर के वचन को खोजें, फिर उसी के अनुसार निर्णय लें। दुष्कर परिस्थितियाँ ईश्वर के विश्वसनीय वचनों पर टिके रहने के अवसर बनाती हैं। स्मरण रखें कि ईश्वर की प्रतिज्ञाएँ हमें भय से उबारेंगी, न कि भय को बढ़ाएंगी।
संक्षेप
यूहन्नी तरीके से यह पाठ सिखाता है कि परमेश्वर के पुत्र के रूप में प्रेरित जीवन में मुकाबला तब हुआ जब शैतान ने ईश्वर के चिह्न का प्रश्न उठाया। यीशु ने हर बार परमेश्वर के वचन के आधार पर उत्तर दिया और अपनी पवित्रता बनाए रखी। यह हमारे लिए भी स्पष्ट करता है कि कठिन समय में भी ईश्वर की वाचा और सत्य के साथ चलना ही वास्तविक सुरक्षा है।
योगदानक: इस पाठ पर प्रसिद्ध पवित्र-व्याख्याकारों के सम्मिलित विचारों से प्रेरणा मिलती है, जैसे महेरी (Matthew Henry) और अॅल्बर्ट बार्न्स (Albert Barnes) तथा एडम क्लार्क (Adam Clarke) के संक्षिप्त बिंब, जो इस प्रसंग की महिमा और प्रतिशोध-निवारण को प्रकाश डालते हैं। ये विचार इस विशिष्ट संदर्भ में संयुक्त रूप से यह दर्शाते हैं कि विश्वास के लिए शब्द की प्रेरणा सर्वोपरि है।