Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीमत्ती 4:3 बाइबल पद की व्याख्या
मत्ती 4:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब परखनेवाले ने पास आकर उससे कहा, “यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो कह दे, कि ये पत्थर रोटियाँ बन जाएँ।”
मत्ती 4:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
मत्ती 4:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

1 थिस्सलुनीकियों 3:5 (HINIRV) »
इस कारण जब मुझसे और न रहा गया, तो तुम्हारे विश्वास का हाल जानने के लिये भेजा, कि कहीं ऐसा न हो, कि परीक्षा करनेवाले* ने तुम्हारी परीक्षा की हो, और हमारा परिश्रम व्यर्थ हो गया हो।

उत्पत्ति 3:1 (HINIRV) »
यहोवा परमेश्वर ने जितने जंगली पशु बनाए थे, उन सब में सर्प धूर्त था, और उसने स्त्री से कहा, “क्या सच है, कि परमेश्वर ने कहा, 'तुम इस वाटिका के किसी वृक्ष का फल न खाना'?” (प्रका. 12:9, प्रका. 20:2)

गिनती 11:4 (HINIRV) »
फिर जो मिली-जुली भीड़ उनके साथ थी, वह बेहतर भोजन की लालसा करने लगी; और फिर इस्राएली भी रोने और कहने लगे, “हमें माँस खाने को कौन देगा? (1 कुरि. 10:6)
मत्ती 4:3 का संदर्भ और प्रारम्भिक स्थिति
परखनेवाला अर्थात शैतान हरिनाम से यीशु के पास आया और उसी समय के अनुभव को दर्शाने वाला यह पाठ पहली परीक्षा की मुद्रा बनाता है। यीशु ने जंगल में चालीस दिन उपवास किया था; इस ठोस एकांत परिस्थिति में誘惑 का पहला स्वरूप प्रकट हुआ—भोजन की कमी के बावजूद आत्म-विश्वास और परमेश्वर के विश्वासयोग्य पुत्र होने की स्थिति को चुनौती दी गई।
यह पाठ परमेश्वर के पुत्रत्व और परीक्षा के अर्थ पर क्या बताता है
शैतान की यह चुनौती दोहरे संकेत देती है: पहली, प्रभु यीशु के पुत्रत्व की पुष्टि के लिए बाहरी संकेत चाहिए; दूसरी, देव-निर्भरता के बजाय संभवतः केवल प्राकृतिक सुविधाओं पर भरोसा करने की इच्छा। यीशु की प्रतिक्रिया बताती है कि आध्यात्मिक परीक्षा शारीरिक आवश्यकता के अधीन नहीं होती; यह परमेश्वर के वचन पर निर्भर रहने और वह कौन है, यह पहचानने की परीक्षा है।
किए गए शब्दों और छबियों की व्याख्या
संदर्भित अंशों से सीख
आसन्न पाठ के साथ कुछ संबंधित बाइबल उपदेश इस प्रकार हैं—
प्रचलित शब्दावली के अर्थ
यहां “परखनेवाला” वह व्यक्ति है जो परमेश्वर के विश्वासयोग्य पुत्रत्व को परख रहा है। “पत्थर रोटियाँ बन जाएँ” एक चंचल प्रलोभन है: सांसारिक आवश्यकताओं के अनुभव के आधार पर प्रभु के वचन को तौलना। यीशु का उत्तर दिखाता है कि ईश्वर के पुत्र होने का प्रमाण केवल अद्भुत चमत्कार से नहीं, बल्कि परमेश्वर के वचन पर अटूट निर्भरता से मिलता है।
आज के समय में लागू करने योग्य बातें
क्लासिक टिप्पणियों से एक संयुक्त सार
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke आदि के सार्वजनिक-domain टिप्पणियों में यह विचार मिलता है कि यीशु ने भूख के कारण नहीं, बल्कि ईश्वर के वचन के आधार पर जीवन-यात्रा चुनी। Henry कहते हैं कि यीशु ने शारीरिक भूख को नहीं, परदे के पीछे की सच्ची आस्था को प्राथमिकता दी। Barnes यह दर्शाते हैं कि यह घटना मैटलाक-प्रेरित शूरता के साथ आत्म-स्वरूप का परीक्षण है। Clarke इस बात पर बल देते हैं कि यह विषम क्षण भी शौर्य की प्रकृति को प्रकट करता है: परमेश्वर के पुत्रत्व की पुष्टि के लिए बाहरी चमत्कारों की मांग नहीं, बल्कि ईश्वर के वचन पर निर्भरता।
संक्षेप में, मत्ती 4:3 में यीशु ने दिखा दिया कि परमेश्वर का पुत्र होने का प्रमाण बाहरी संकेत नहीं, बल्कि वचन-प्रतिष्ठा और परमेश्वर के विश्वास पर अडिग रहने से आता है।