मत्ती 4:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब परखनेवाले ने पास आकर उससे कहा, “यदि तू परमेश्‍वर का पुत्र है, तो कह दे, कि ये पत्थर रोटियाँ बन जाएँ।”

पिछला पद
« मत्ती 4:2
अगला पद
मत्ती 4:4 »

मत्ती 4:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

मत्ती 4:3 का संदर्भ और प्रारम्भिक स्थिति

परखनेवाला अर्थात शैतान हरिनाम से यीशु के पास आया और उसी समय के अनुभव को दर्शाने वाला यह पाठ पहली परीक्षा की मुद्रा बनाता है। यीशु ने जंगल में चालीस दिन उपवास किया था; इस ठोस एकांत परिस्थिति में誘惑 का पहला स्वरूप प्रकट हुआ—भोजन की कमी के बावजूद आत्म-विश्वास और परमेश्वर के विश्वासयोग्य पुत्र होने की स्थिति को चुनौती दी गई।

यह पाठ परमेश्वर के पुत्रत्व और परीक्षा के अर्थ पर क्या बताता है

शैतान की यह चुनौती दोहरे संकेत देती है: पहली, प्रभु यीशु के पुत्रत्व की पुष्टि के लिए बाहरी संकेत चाहिए; दूसरी, देव-निर्भरता के बजाय संभवतः केवल प्राकृतिक सुविधाओं पर भरोसा करने की इच्छा। यीशु की प्रतिक्रिया बताती है कि आध्यात्मिक परीक्षा शारीरिक आवश्यकता के अधीन नहीं होती; यह परमेश्वर के वचन पर निर्भर रहने और वह कौन है, यह पहचानने की परीक्षा है।

किए गए शब्दों और छबियों की व्याख्या

  • — शैतान ने तुरंत भूख के मजबूत अनुभव को उठाकर यीशु के ताइवान के आत्म-स्वराग को चुनौती दी। यह संकेत है कि भूख-इच्छा में भी परमेश्वर के उद्धार के वचन पर निर्भरता बनानी चाहिए, न कि स्व-सिद्धि से पथ चुनना चाहिए।

संदर्भित अंशों से सीख

आसन्न पाठ के साथ कुछ संबंधित बाइबल उपदेश इस प्रकार हैं—

  • यहोशू 1:8— परमेश्वर के वचन पर निरन्तर ध्यान और उसमें दृढ़ता रखने की महत्ता।
  • फिलिप्पियों 4:19— परमेश्वर की कृपा से हर आवश्यकता की पूर्ति का आश्वासन।
  • यूहन्ना 6:35— यीशु स्वयं रोटी है, जो जीवन को संतुष्टि दे mukti नहीं, बल्कि आस्था पर आधारित है।

प्रचलित शब्दावली के अर्थ

यहां “परखनेवाला” वह व्यक्ति है जो परमेश्वर के विश्वासयोग्य पुत्रत्व को परख रहा है। “पत्थर रोटियाँ बन जाएँ” एक चंचल प्रलोभन है: सांसारिक आवश्यकताओं के अनुभव के आधार पर प्रभु के वचन को तौलना। यीशु का उत्तर दिखाता है कि ईश्वर के पुत्र होने का प्रमाण केवल अद्भुत चमत्कार से नहीं, बल्कि परमेश्वर के वचन पर अटूट निर्भरता से मिलता है।

आज के समय में लागू करने योग्य बातें

  • भूख या कठिनाई के क्षण में भी परमेश्वर के वचन पर टिके रहें; संसार की तत्कालीन मांगें कभी-कभी विश्वास की राह में बाधा बन सकती हैं, परन्तु ईश्वर की प्रतिज्ञा अधिक विश्वसनीय है।
  • वचन के स्मरण और स्मरण-आदेश— प्रभु के शब्द हमारे अंतरमन को प्रभावित करते हैं और हमें आत्म-प्रकटन से बचाते हैं।

क्लासिक टिप्पणियों से एक संयुक्त सार

Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke आदि के सार्वजनिक-domain टिप्पणियों में यह विचार मिलता है कि यीशु ने भूख के कारण नहीं, बल्कि ईश्वर के वचन के आधार पर जीवन-यात्रा चुनी। Henry कहते हैं कि यीशु ने शारीरिक भूख को नहीं, परदे के पीछे की सच्ची आस्था को प्राथमिकता दी। Barnes यह दर्शाते हैं कि यह घटना मैटलाक-प्रेरित शूरता के साथ आत्म-स्वरूप का परीक्षण है। Clarke इस बात पर बल देते हैं कि यह विषम क्षण भी शौर्य की प्रकृति को प्रकट करता है: परमेश्वर के पुत्रत्व की पुष्टि के लिए बाहरी चमत्कारों की मांग नहीं, बल्कि ईश्वर के वचन पर निर्भरता।

संक्षेप में, मत्ती 4:3 में यीशु ने दिखा दिया कि परमेश्वर का पुत्र होने का प्रमाण बाहरी संकेत नहीं, बल्कि वचन-प्रतिष्ठा और परमेश्वर के विश्वास पर अडिग रहने से आता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 4:3 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

1 थिस्सलुनीकियों 3:5 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 थिस्सलुनीकियों 3:5 (HINIRV) »
इस कारण जब मुझसे और न रहा गया, तो तुम्हारे विश्वास का हाल जानने के लिये भेजा, कि कहीं ऐसा न हो, कि परीक्षा करनेवाले* ने तुम्हारी परीक्षा की हो, और हमारा परिश्रम व्यर्थ हो गया हो।

उत्पत्ति 3:1 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
उत्पत्ति 3:1 (HINIRV) »
यहोवा परमेश्‍वर ने जितने जंगली पशु बनाए थे, उन सब में सर्प धूर्त था, और उसने स्त्री से कहा, “क्या सच है, कि परमेश्‍वर ने कहा, 'तुम इस वाटिका के किसी वृक्ष का फल न खाना'?” (प्रका. 12:9, प्रका. 20:2)

गिनती 11:4 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
गिनती 11:4 (HINIRV) »
फिर जो मिली-जुली भीड़ उनके साथ थी, वह बेहतर भोजन की लालसा करने लगी; और फिर इस्राएली भी रोने और कहने लगे, “हमें माँस खाने को कौन देगा? (1 कुरि. 10:6)

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें