Old Testament
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मत्ती 4:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यीशु ने उससे कहा, “यह भी लिखा है, ‘तू प्रभु अपने परमेश्वर की परीक्षा न कर।’” (व्य. 6:16)
मत्ती 4:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मत्ती 4:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
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व्यवस्थाविवरण 6:16 (HINIRV) »
“तुम अपने परमेश्वर यहोवा की परीक्षा न करना, जैसे कि तुमने मस्सा में उसकी परीक्षा की थी। (मत्ती 4:7, लूका 4:12)

1 कुरिन्थियों 10:9 (HINIRV) »
और न हम प्रभु को परखें; जैसा उनमें से कितनों ने किया, और साँपों के द्वारा नाश किए गए। (गिन. 21:5-6)

मत्ती 4:7 पर टिप्पणी
येशुवर ने शैतान से उद्धार के पहले प्रयोग के दौरान कहा, “यह भी लिखा है, ‘तू प्रभु अपने परमेश्वर की परीक्षा न कर।’” यह वाक्य उद्धार के पाठ के भीतर एक महत्वपूर्ण मोड़ दिखाता है। शैतान ने यीशु को पत्ती-प्रश्नों के माध्यम से tempt किया, ताकि वह परमेश्वर के बारे में गलत दावे करवाए या गलत विश्वास धारण कराए। यीशु का उत्तर परमेश्वर के उद्धारक संदेश की स्थिरता और विश्वास की पुख़्तरता को दर्शाता है।
केंद्रीय अर्थ
यह verse परमेश्वर की आज्ञा का प्रत्युत्तर है: यीशु अपने परमेश्वर की परीक्षा लेने से इनकार कर देते हैं। वे यह संकेत करते हैं कि विश्वास का परीक्षण कभी भी परमेश्वर के विरुद्ध नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि उसका आज्ञा-पालन परमेश्वर के लिए पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। यह न केवल वास्तविक परीक्षा के समय की बात है, बल्कि हर दृष्टिकोण से विश्वास की नीति है: परमेश्वर की रोक-टोक नहीं, बल्कि उसकी योजना पर निर्भर रहते हुए जीवन जीना।
दो-तीन प्रमुख थेम
संबद्ध पदस्थ सरल cross-रेफरेंसेज
यही धारणा बाइबल के अन्य हिस्सों में भी मिलती है:
व्यावहारिक प्रतिबिंब
हमारे दैनिक जीवन में भी यह सीख स्पष्ट है: जब हम किसी परिस्थिति में “परीक्षण” या “चैलेंज” के नाम पर अपने मन की मर्जी को ठेस पहुँचाने दें, तब हमें याद रखना चाहिए कि परमेश्वर की इच्छा सर्वोपरि है। कठिन परिस्थितियों में भी शब्द के अनुसार चलना, और स्वयं को परीक्षा में डालकर प्रभु की रक्षा और मार्गदर्शन माँगना, सत्य के साथ व्यवहार का अभ्यास है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
Matthew 4:7 में यीशु की प्रतिज्ञा-शक्ति दिखती है: परमेश्वर की आज्ञा को तोड़ना नहीं, बल्कि उसकी आज्ञा के अनुसार जीना ही जीवन की सच्ची राह है। यह संदेश विश्वस्त विश्वास का मूलाधार बनकर प्रत्येक अनुयायी को प्रेरित करता है कि वे परीक्षणों में भी परमेश्वर की शब्दावली को स्मरण रखें और उसी मार्ग पर चलते रहें।
मानक उद्धरणों से मिलती संकल्पना: “यह भी लिखा है, ‘तू प्रभु अपने परमेश्वर की परीक्षा न कर।’” यह वाक्य डार्क-टेम्प्टेशन के खिलाफ एक स्पष्ट सिद्धांत देता है—विश्वास और पवित्रता के बीच सबसे मजबूत आधार।
टिप्पणी के स्रोत संकेत
इस तरह के चिंतन के लिए पारंपरिक बाइबल व्याख्या-परंपराओं में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के निष्कर्ष मिलते हैं, जो क्लियर-एविडेंस के साथ कहतें हैं कि पवित्र शास्त्र के अनुसार आचरण ही वास्तविक धर्म है।