Old Testament
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मत्ती 4:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और नासरत को छोड़कर कफरनहूम में जो झील के किनारे जबूलून और नप्ताली के क्षेत्र में है जाकर रहने लगा।
मत्ती 4:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मत्ती 4:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यूहन्ना 4:46 (HINIRV) »
तब वह फिर गलील के काना में आया, जहाँ उसने पानी को दाखरस बनाया था। वहाँ राजा का एक कर्मचारी था जिसका पुत्र कफरनहूम में बीमार था।

मरकुस 1:21 (HINIRV) »
और वे कफरनहूम में आए, और वह तुरन्त सब्त के दिन आराधनालय में जाकर उपदेश करने लगा।

मत्ती 11:23 (HINIRV) »
और हे कफरनहूम, क्या तू स्वर्ग तक ऊँचा किया जाएगा? तू तो अधोलोक तक नीचे जाएगा; जो सामर्थ्य के काम तुझ में किए गए है, यदि सदोम में किए जाते, तो वह आज तक बना रहता।
मत्ती 4:13 का संदर्भ और अर्थ
यह वचन बताता है कि यीशु नासरत से चले, और कफरनहूम में जाकर रहने लगे, जो झील गालाइल से लगा एक महत्त्वपूर्ण नगर है। इससे पहले वचन भजन-प्रेषिताओं में यीशु के प्रचार-कार्य के आरम्भ और उनके सिद्ध-चिह्नों के माध्यम से लोगों के लिए एक नई आशा का उद्घोष है। मत्ती का यह विवरण दर्शाता है कि यीशु की ministry एक विशिष्ट भू-स्थिति से शुरू होकर विस्तारित होती है, और उसका प्रभाव सीमाओं से बाहर निकलकर अगली पीढ़ियों तक गया।
मुख्य भावार्थ
ईसा-यात्रा एक निश्चित फोकस के साथ आगे बढ़ती है: वह अपने जननी-गृह से बाहर आकर एक नए केंद्र में आकर टिकते हैं ताकि उनका संदेश, चमत्कार और प्रेरणा अधिक जन-सामर्थ्य तक पहुँच सके। कफरनहूम में बसना दर्शाता है कि धर्मीय परहेज़ के बजाय यीशु की उपस्थिति लोगों के बीच जीवन्तता और पहुँच बनाती है।
दो-तीन प्रमुख विषय
व्याख्यात्मकCross-References
1) उद्देश्य और नगर-स्थिति की भूमिका: मरकुस और लूका के विवरण की दिशा में देखें कि कैसे यीशु के प्रवास और निवास से उसका प्रचार-कार्य व्यवस्थित होता है; यह संकेत देता है कि प्रचार-यात्रा का नियम जीवन्त समुदाय के साथ जुड़ने से अधिक प्रभावी होता है।
2) चमत्कार-साक्ष्य और संदेश-आधार: पुराने नियम के प्रतीकात्मक शहरों के साथ यीशु के निवास का संयोजन यह दर्शाता है कि उनका राज्य-कार्य स्थानीय से शुरू होकर विश्वव्यापी दायरे में फैलना है।
3) प्रभुत्व और अपील: नये निवास से उनका प्रभाव स्थानीय लोगों में विश्वास और खोज को प्रेरित करता है, जो आगे के चमत्कारों और शिक्षा के लिये द्वार खोलता है।
प्रायोगिक विचार
आप के लिए इसका पाठ यह कहता है कि ईश्वर की योजना अक्सर हमारे आस-पास के सामान्य जीवन से शुरू होती है—घर, शहर या कार्य-स्थल—जहाँ हम नयी दृष्टि और सेवा लेकर कदम बढ़ाते हैं। यदि यीशु जैसे प्रभु ने एक नगर में settle किया, तो हमें भी अपनी जगह में प्रेम, शिक्षा और सहायता की भूमिका निभानी चाहिए।
संक्षेप निष्कर्ष
मत्ती 4:13 यीशु के प्रचार की दिशा-स्थिति में एक महत्वपूर्ण मोड़ दर्शाता है: नासरत से निकलकर कफरनहूम में आना, ताकि उनका संदेश और जीवन-उद्धार का तरीका अधिक लोगों तक पहुँचे। यह कदम यह संकेत करता है कि ईश्वर की योजना स्थानीय समुदाय से आरम्भ होकर विश्वव्यापी प्रभाव डालती है।
निष्कर्षणीय टिप्पणी
यह वचन हमें प्रेरित करता है कि हम अपनी जगह में ईश्वर की आवाज़ को सुनें और अपने जीवन-कार्य में प्रेम और साक्ष्य को केंद्रित करें। कहीं भी हम रहें, हमारी उपस्थिति का उद्देश्य लोगों को प्रभु के पास लाने का हो।
ग्रंथ-नज़र
यथार्थ संदर्भ से प्रेरित विचार के लिए देखें: यीशु का प्रारम्भिक प्रचार-कार्य, नगर-स्थापना और समुदाय के साथ समन्वय पर अभिज्ञानात्मक नज़र।
उद्धरण नोट: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के पूर्ण वाक्यों का यहां संक्षेप में उनका संदर्भ देते हुए उपयोग किया गया है। किसी स्पष्ट उद्धरण का यदि उपलब्ध हो तो उसी रूप में हल्के-फुल्के रूप में उल्लेख किया गया है।