Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 17:1 मत्ती 17:2 मत्ती 17:3 मत्ती 17:4 मत्ती 17:5 मत्ती 17:6 मत्ती 17:7 मत्ती 17:8 मत्ती 17:9 मत्ती 17:10 मत्ती 17:11 मत्ती 17:12 मत्ती 17:13 मत्ती 17:14 मत्ती 17:15 मत्ती 17:16 मत्ती 17:17 मत्ती 17:18 मत्ती 17:19 मत्ती 17:20 मत्ती 17:21 मत्ती 17:22 मत्ती 17:23 मत्ती 17:24 मत्ती 17:25 मत्ती 17:26 मत्ती 17:27



मत्थी 17:18 का स्पष्ट अर्थ
येशु ने वह दुष्टात्मा निकाला जिससे लड़का तुरंत स्वस्थ हो गया। इस एक वाक्य में प्रभु के अधिकार और ज्ञान की चेतना स्पष्ट है: दिव्य शक्ति से ही रोग और नुकसान दूर होते हैं, विश्वास की कमी नहीं, केवल यीशु की उपस्थिति और आज्ञा पर्याप्त है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह उपदेश तब है जब चेलों ने एक दिव्य-बार्डर रोग से पीड़ित लड़के के बारे में यीशु से पूछा, क्योंकि उनके पास उस दुष्टात्मा पर प्रभु के पर्याप्त अधिकार के बारे में स्पष्ट अनुभव नहीं था. पहले चेलों ने प्रयास किया पर सफलता नहीं मिली; यीशु ने यह दिखाया कि विज्ञान-यौगिक शक्ति से अधिक है—पश्चात्ताप और धर्मी आज्ञा से दुष्टात्मा को निष्कासन संभव है.
व्याख्यात्मक अवलोकन
थीमगत बिंदु
अन्य उद्धृत विचार (पूर्व-स्वतंत्र टिप्पणीकारों से संक्षेप)
मैथ्यू हेनरी और ऐल्बर्ट बार्न्स के पारंपरिक प्रकाशनों के अनुसार, इस घटना में ईश्वरीय अधिकार की अभिव्यक्ति दिखती है—किसी भी मानव-यत्न से पहले परमेश्वर की सत्ता को मानना जरूरी है; यह चमत्कार विश्वास के साथ जुड़ा है। एडम क्लार्क भी यह संकेत करते हैं कि दुष्टात्मा को निष्कासित करना प्रभु के नाम और शक्ति का प्रमाण है, जो विश्वास के साथ समर्थित है.
यदि उद्धरण हैं, तो आपूर्ति के अनुसार “तब यीशु ने उसे डाँटा” जैसे स्पष्ट आज्ञाकारी शब्द प्रभु की शक्ति को दर्शाते हैं—यह छोटे-लंबे उद्धरण केवल वैधानिक रूप से उद्धृत हैं जहां उपलब्ध हों.
क्रॉस-रेफरेंसेज़ और संक्षिप्त व्याख्या
1) मरकुस 9:29— चेलों की असफलता और प्रभु की शक्ति के बीच सम्बन्ध बताता है कि कुछ मामलों में प्रार्थना और उपवास की आवश्यकता होती है; यह घटना प्रेरणा देती है कि आस्था के साथ आध्यात्मिक अभ्यास आवश्यक है।
2) लूका 9:1-2— यीशु ने चेलों को विचारों के साथ सत्ता और शक्ति दी, ताकि वे विभिन्न प्रकार के रोगों का उपचार कर सकें; यह दर्शाता है कि उनकी शिक्षा और अधिकार व्यापक थे।
3) मत्ती 10:1— यीशु चेलों को दुष्टात्माओं को निष्कासित करने की अधिकारिता देता है; यह पथ उनके मिशन के लिए निर्धारित है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
हमारे जीवन में भी परिस्थितियाँ आती हैं जब दुष्टात्माओं या समस्याओं से हताशा होती है। इस पाठ से सीखें कि प्रभु की आज्ञा में दो शर्तें हैं: विश्वास और विनम्रता। किसी भी चुनौती के सामने भय की जगह प्रभु की शक्ति पर भरोसा रखें, और यदि परिणाम में विलंब हो तो नम्र-prayer and fasting की मार्गदर्शिका अनुकूल हो सकती है।