Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 17:1 मत्ती 17:2 मत्ती 17:3 मत्ती 17:4 मत्ती 17:5 मत्ती 17:6 मत्ती 17:7 मत्ती 17:8 मत्ती 17:9 मत्ती 17:10 मत्ती 17:11 मत्ती 17:12 मत्ती 17:13 मत्ती 17:14 मत्ती 17:15 मत्ती 17:16 मत्ती 17:17 मत्ती 17:18 मत्ती 17:19 मत्ती 17:20 मत्ती 17:21 मत्ती 17:22 मत्ती 17:23 मत्ती 17:24 मत्ती 17:25 मत्ती 17:26 मत्ती 17:27



सीधा अर्थ
यीशु कह रहे हैं कि अविश्वास और हठ से प्रभावित लोग उद्धार के काम को समझ नहीं पाते और उनकी स्थिति बनी रहती है, जबकि वे शारीरिक रूप से उससे नजदीक हैं। इस घटना में यीशु ने अपने शिष्यों की मानसिक कसौटी को उजागर किया और यह संकेत दिया कि भीतर की श्रद्धा के बिना बाहरी प्रत्यक्ष चमत्कार भी अपूर्ण रहता है।
पृष्ठभूमि और सन्दर्भ
यह पाठ मत्ती 17:14-21 के क्रम में आता है, जहां पहाड़ से परिवर्तन के बाद शिष्य एक दुष्ट आत्मा से मिलते हैं जो उनके द्वारा निष्कासित नहीं किया गया। यीशु ने शिष्यों से कहा कि उनकी कमी विश्वास की है। उन क्षणों में भीूद्दे की यह अस्थिरता दिखती है कि वे चमत्कार देखने पर ही आश्वस्त होते हैं; परंतु विशिष्ट परिस्थितियों में उन्हें गहरा विश्वास और तत्परता चाहिए।
व्याख्या के संकेत
टिप्पणीय धारणाएँ (थीमैटिक सूची)
अन्य प्रासंगिक पद
1) मारकुस 9:19 में यीशु का अनुरोध-संकेत: “हे दुष्टात्माओं पर विजय पाने के लिए तुम्हारा विश्वास अधिक होना चाहिए।” यह दिखाता है कि विश्वास युद्ध का आधार है।
2) मरियम 11:22-23 (संदर्भ-विश्वास): “ईश्वर में विश्वास रखो; जो कहे वह पाएगा,” यह भय्यत दूत के साथ भी आत्म-विश्वास को बढ़ावा देता है।
3) लूका 17:6 (छोटे अनुपात में विश्वास): “यदि तुमके पास पत्ती भर का विश्वास भी हो, तो तुम पहाड़ों को हिला सकते हो,” यह दर्शाता है कि वास्तविक शक्ति विश्वास में है, न कि आधिकारिक चमत्कार में।
व्यावहारिक निष्कर्ष
हर परिस्थिति में हमें बाहरी चमत्कारों से नहीं, बल्कि परमेश्वर पर निर्भर रहने वाले विश्वास को बनाये रखना चाहिए। यदि हमारी prarthana और दैनिक आस्थाएं शिथिल पड़ जाएं, तो यीशु की आवाज़ हमें लौटकर सचेत करती है—तब ही धैर्य और विश्वास से उत्तर मिलेगा।
कुँजी विचार
क्योंकि यह स्मरण कराता है कि हमारी कमज़ोरी के समय भी परमेश्वर की कृपा और शक्ति हमारे साथ है—यदि हम उसे सच्चे दिल से बुलायें और अपने विश्वास को सतर्क रखें।
उद्धृत विचार: मत्ती Henry/Barnes/Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों से संकलित दृष्टिकोणों में,“If the Lord’s power be in the faith that pleads, many things become possible” जैसी धारणा बार-बार मिलती है; इनमें हिंदी पाठक के लिए यह संदेश समाहित रहता है कि विश्वास के साथ प्रार्थना और पूर्णत: निर्भरता आवश्यक है।