Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 17:1 मत्ती 17:2 मत्ती 17:3 मत्ती 17:4 मत्ती 17:5 मत्ती 17:6 मत्ती 17:7 मत्ती 17:8 मत्ती 17:9 मत्ती 17:10 मत्ती 17:11 मत्ती 17:12 मत्ती 17:13 मत्ती 17:14 मत्ती 17:15 मत्ती 17:16 मत्ती 17:17 मत्ती 17:18 मत्ती 17:19 मत्ती 17:20 मत्ती 17:21 मत्ती 17:22 मत्ती 17:23 मत्ती 17:24 मत्ती 17:25 मत्ती 17:26 मत्ती 17:27

मत्ती 17:13 का तात्पर्य और संदर्भ
तब चेलों ने समझा कि उसने हम से यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के विषय में कहा है। यह दृश्य पवित्र पर्वत पर घटित घटना से जुड़ा है जिसमें यीशु ने अपने मौलिक सत्य और महिमा को प्रकट किया। इस वाक्य के भीतर चेलों की आस्था और उनकी पूर्व धारणाओं की खिड़की खुलती है, जिससे वे समझने लगते हैं कि यीशु का संदेश और उनकी पहचान यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले से निर्भर नहीं, बल्कि उससे आगे है:
यह पाठ ईश्वर और विश्वास के बारे में क्या बताता है
यह संदर्भ दिखाता है कि परमेश्वर के गुण और मंत्रीत्व एक परिसीमित दायरे में सीमित नहीं रहते। यूहन्ना ने बपतिस्मा देकर लोगों को repentance के लिए प्रेरित किया, पर यीशु स्वयं बपतिस्मा कराने वाले से विशिष्टतर हैं—यानी उनके मिशन, मृत्यु और पुनःजीवन के द्वारा उद्धार का पूरा संदेश होता है। चेलों का विचार यह था कि यीशु यूहन्ना के समान ही संदेश दे रहे हैं; पर पाठ बताता है कि यीशु की भूमिका और महिमा उससे पूर्णत: भिन्न और उच्च है। इस दृश्य में भगवान की योजना की गहराई, मानवता के लिए उद्धार की अनुकम्पा, और विश्वास के लिए एक स्पष्ट आह्वान दिखता है: विश्वास करें कि परमेश्वर की योजना कैसे आगे बढ़ती है।
शब्दों और छवियों की स्पष्टता
• यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला: यह नाम यहाँ एक संकेतक भूमिका में है—पूर्वदर्शी दूत जिसकी पहचान यीशु से पहले जोड़ी गई थी, ताकि लोगों को देखने में स्पष्टता मिले कि यीशु का आगमन नया दायित्व है।
• “हम से nói के विषय में कहा है”: यहाँ चेलों की धारणा थी कि यीशु यूहन्ना के समान बपतिस्मा या संदेश दे रहे हैं, पर वास्तविकता यह है कि यीशु का प्रभाव और उनका उद्धारकार्य अलग और उससे अधिक व्यापक है।
Related passages (संकेतित संदर्भ और उनके तात्पर्य)
इन Cross-references से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर की योजना विराट और बहु-अनुभागी है; यूहन्ना दूरस्थ भूमिका में रहा, किन्तु यीशु के अधिकार और उद्धारकार्य को स्थापित करता है।
आज के लिए आवेदन
– विश्वास का दबाव न डालें कि यीशु वही गतिविधियाँ दोहराते हैं जो पूर्वदत्त राही ने कीं; बल्कि समझें कि यीशु का मिशन पूर्ण उद्धार है जो पाप के बन्धनों को तोड़ता है और भगवान के राज्य को स्थापित करता है।
– ईश्वर की योजना की गहराई पर भरोसा रखें, भले ही आप अभी हर भाग को स्पष्ट न देखें; चेलों के अनुभव से प्रेरणा लें कि हमने जो कुछ भी सुना है, वह अगले कदम में विश्वास के साथ समझना है।
इतिहास-आधारित उद्धरण (संलग्न पाठ से संबद्ध)
इस संस्करण में प्रकाशित टिप्पणीकारों के सार्वजनिक-डायरी-उद्धरणों के आधार पर संक्षेप निष्कर्ष दिए जाते हैं। नीचे के संकेत केवल पाठ्य-प्रेरित हैं:
मैथ्यू हेनरी (Matthew Henry) और एडम क्लार्क (Adam Clarke) ने भगवान की उद्धार-योजना की विस्तृत व्याख्या के साथ यह दर्शाया है कि प्रभु यीशु का संदेश पूर्ववर्ती दूत से उन्नत और पूर्ण है; उनके लेखन में यह स्पष्ट किया गया है कि यीशु का उद्देश्य मानवीय आराम और सुसमाचार की पूर्णता है।
संक्षिप्त सार
पर्वत प्रस्तर में यीशु के महिमा-प्रकाश के दौरान चेलों को यह समझना चाहिए कि यूहन्ना का संदेश पहले चरण था, पर यीशु का कार्य और उद्धार का क्रम चोटी तक पहुंचाने वाला है। अभी हमें यह विश्वास रखना चाहिए कि परमेश्वर की योजना व्यक्ति-व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए पूर्ण है।