Old Testament
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यूहन्ना 13:1 पर टिप्पणी
पद में कहा गया है कि फसह के पर्व से पहले यीशु ने यह जाना कि उसका समय आ पहुँचा है कि जगत छोड़कर पिता के पास जाऊँ, और उसने अपने उन लोगों से—जो संसार में थे—जितना प्रेम वह संसार से पहले दिखाता आया था, वैसा अन्त तक भी निभाया। यह वाक्य ईश्वर के प्रेम के पूर्ण चढ़ाव और उनकी प्रेरित प्रेम का चरम है। यीशु शिष्य-समूह के बीच हलचल भरे समय में यह सुनिश्चित कर लेते हैं कि उनका संसार से निष्काम प्रेम बना रहे।
मुख्य अर्थ
यह श्लोक यीशु के जीवन के निर्णायक समय का संकेत देता है: उसकी मृत्यु, कुटुम्बिक निष्ठा, और पिता के साथ पुनः मिलन की आशा। जानना कि उसका समय आ गया है, वह न केवल पवित्र उद्देश्य की पूर्ति के लिए है, बल्कि प्रेम की उच्चतम मिसाल को दिखाने के लिए भी है—ऐसा प्रेम जो प्रतिद्वंद्विता या स्वार्थ से परे है।
कुंजी विषय
संबद्ध मार्गदर्शक विचार
गंभीर विचारणीय अनुभाग से प्रेरणा लेते हुए ऐतिहासिक टिप्पणीकारों के संकेत इस प्रकार मिलते हैं:
हम देखते हैं कि मैथ्यू हेनरी ने प्रेम की वह पराकाष्ठा स्पष्ट की है जिसमें यीशु ने अपने शिष्यों के प्रति अपने जीवन को अर्पित किया। ऐल्बर्ट बार्न्स ने यह दर्शाया है कि यह अन्त तक प्रेम का फॉर्म है, जो शिष्यों के लिए एक नया नैतिक आह्वान है। एडम क्लार्क के अनुसार यह स्पष्ट है कि यीशु का समय, उनके मरण्य को नकारात्मक नहीं, बल्कि परम प्रेम का पराक्रम है।
क्रॉस-रेफरेंस
1) यूहन्ना 13:34-35 — नया commandment: प्रेम एक-दूसरे से। यह उद्धारपूर्ण प्रेम का व्यवहार है जो शिष्यत्व को दर्शाता है।
2) यूहन्ना 15:12-13 — “तुम एक-दूसरे से वैसा ही प्रेम रखो, जैसे मैंने तुमसे किया।” यह उनके इस समय के संदेश का स्पष्ट अनुपालन है।
3) रोमियों 5:8 — परन्तु ईश्वर ने दिखा दिया प्रेम, कि हम अभी दोषी रहते हुए भी मरे—यह प्रेम initiates उद्धार के लिए है।
इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि प्रत्यक्ष सेवा और प्रेम का रवैया क्रूस तक ले जाता है, जो यीशु सिर्फ कह नहीं रहे थे, उसे जी रहे थे।
व्यावहारिक विचार
आज के शिष्यों के लिए यह प्रश्न है: मैं अपने करीब-नातेदारों और समुदाय के साथ किस प्रकार पूर्ण प्रेम से व्यवहार कर रहा हूँ? क्या मैं कठिन परिस्थितियों में भी सेवा-संघर्ष के बजाय प्रेम की चमत्कारी राह चुनता हूँ? देखें कि यीशु ने अपने शिष्यों के लिए क्या किया है—निम्नलिखित एक-आर्क विचार मदद कर सकता है:
संक्षिप्त निष्कर्ष
यूहन्ना 13:1 हमें स्मरण दिलाता है कि मसीही प्रेम अविनाशी है और समय की परवाह किए बिना निरन्तर रहता है। यह अंततः पवित्र पिता के पास लौटने की राह बनाता है, और शिष्यों के बीच एक नया, सर्व-कामयाब प्रेम-आचार देता है।