Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 13:1 यूहन्ना 13:2 यूहन्ना 13:3 यूहन्ना 13:4 यूहन्ना 13:5 यूहन्ना 13:6 यूहन्ना 13:7 यूहन्ना 13:8 यूहन्ना 13:9 यूहन्ना 13:10 यूहन्ना 13:11 यूहन्ना 13:12 यूहन्ना 13:13 यूहन्ना 13:14 यूहन्ना 13:15 यूहन्ना 13:16 यूहन्ना 13:17 यूहन्ना 13:18 यूहन्ना 13:19 यूहन्ना 13:20 यूहन्ना 13:21 यूहन्ना 13:22 यूहन्ना 13:23 यूहन्ना 13:24 यूहन्ना 13:25 यूहन्ना 13:26 यूहन्ना 13:27 यूहन्ना 13:28 यूहन्ना 13:29 यूहन्ना 13:30 यूहन्ना 13:31 यूहन्ना 13:32 यूहन्ना 13:33 यूहन्ना 13:34 यूहन्ना 13:35 यूहन्ना 13:36 यूहन्ना 13:37 यूहन्ना 13:38



यूहन्ना 13:3 का संदर्भ और संदर्भ-प्रवाह
यूहन्ना 13:3 में यीशु यह जानकर कार्य कर रहे थे कि पिता ने सब कुछ उनके हाथ में कर दिया है और वे परमेश्वर के पास से आए हैं और परमेश्वर के पास जाते हैं। यह संदर्भ में उस रात की घटना से जुड़ा है जब यीशु अपने चेले-समूह के बीच रात्रिभोजन के समय सेवा-भाव दिखाते हैं और अपने एक-एक चेलों के साथ नाते और भूमिका के महत्त्व को स्पष्ट करते हैं। उद्धरणों के अनुसार यीशु का यह ज्ञान और नियंत्रण उनके जन्म-उद्देश्य को दर्शाता है: वे दया, सेवा और बल के स्रोत के रूप में सामने आते हैं, न कि केवल एक मर्यादित शिक्षक के रूप में।
मुख्य अर्थ
पिता ने सब कुछ उसके हाथ में कर दिया है—इस बात से यह स्पष्ट होता है कि यीशु की earthly भूमिका परमेश्वर के कर्तव्य-निर्वहन का केंद्र है। वे परमेश्वर के पास से आए हैं और परमेश्वर के पास जाते हैं, जो उनकी महिमाीय स्थिति, उनकी सच्ची पहचान और उनके मिशन की पूर्णता को संकेत करती है। यह वाक्य उनके आत्म-निर्विक्चार को पुष्ट करता है: उनका अर्पण, क्रूस तक का भविष्य और पुनः ज्योति-युग के लिए उनकी योजना एक परंपरा बनती है।
केंद्रीय विचार
2-3 प्रमुख थीम
संदर्भ-प्रकाश
- Matthew Henry: यीशु के अपने दायित्व को समझना—परमेश्वर के उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने स्वयं को सब कुछ दे दिया।
- Albert Barnes: उनका यह ज्ञान उनकी आत्म-स्थिति को दर्शाता है—आया हुआ था, और फिर–जाने वाला है; यह सत्य कि वे मनुष्यों के उद्धार के साधन हैं।
- Adam Clarke: यह वाक्य उनके पृथ्वी-कार्य और आकाश-यात्रा के मिलन को दर्शाता है, जो पिता की महिमा के लिए है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संकेतार्थ)
1) यशायाह 53:10-11— दया का यह क्रम कि परमेश्वर की इच्छा से क्रिया होती है; उद्धार का मार्ग दयालु क्रम में होता है।
2) प्रार्थना 17:5— पिता की महिमा, और पुत्र के द्वारा पुनः गौरव की माँग।
3) यूहन्ना 14:28— मेरा जाना और आना, परमेश्वर के साथ का सम्बंध और दिशा स्पष्ट करते हैं।
व्यावहारिक विचार
हमारे लिए यह सಣ್ಣ्देश है कि परमेश्वर की योजना में हमारा भाग भी एक सेवा-आधारित जीवन हो। चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों, ईश्वर के हाथों में हमारी राह सुरक्षित है। दूसरों के लिए नम्रता, विनम्रता और प्रेम से व्यवहार करें, ताकि प्रभु की महिमा दिखे।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यूहन्ना 13:3 मानव-जीवन के भीतर ईश्वर की योजनाओं की पूर्णता का संकेत देता है: पिता के हाथ में सब कुछ और यीशु का आना-जाना, एक अभिन्न सत्य है—दया, सेवा और उद्धार की पूरी योजना उनके माध्यम से पूरी होती है।