Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीमत्ती 28:18 बाइबल पद की व्याख्या
मत्ती 28:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यीशु ने उनके पास आकर कहा, “स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार* मुझे दिया गया है।
मत्ती 28:18 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मत्ती 28:18 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 पतरस 3:22 (HINIRV) »
वह स्वर्ग पर जाकर परमेश्वर के दाहिनी ओर है; और स्वर्गदूतों, अधिकारियों और सामर्थियों को उसके अधीन किए गए हैं। (इफि. 1:20-21, भज. 110:1)

मत्ती 11:27 (HINIRV) »
“मेरे पिता ने मुझे सब कुछ सौंपा है, और कोई पुत्र को नहीं जानता, केवल पिता; और कोई पिता को नहीं जानता, केवल पुत्र और वह जिस पर पुत्र उसे प्रगट करना चाहे।

मत्ती 28:18 पर टिप्पणी — स्वीकृत अधिकार का उद्घोष
यह वचन क्यों महत्त्वपूर्ण है: यीशु के यह कथन प्रत्यक्ष उद्घोष है कि आकाशीय और पृथ्वीतली सभी अधिकार उसका है। यह अधिकार का उद्घोष, मसीह के पुनर्जीवन के बाद की प्रत्यक्ष उपस्थित capaciteit का संकेत है और विश्व-युग के उद्धारकार्य के लिए उसकी आधिकारिक प्राधिकृति को प्रमाणित करता है। पाठक समझता है कि चूंकि मृत्यु पर विजय उसी के हाथ में है, इसलिए अभी के प्रेरितों के आगे उनका काम भी उसी सत्ता के भरोसे आगे बढ़ सकता है।
प्रस्तुत संदर्भ और उस समय की स्थिति
पहले शास्त्रों में, मरियम-सम्मुख ईस्टर के दिन महिलाओं को सुराग मिला कि यीशु का शरीर नहीं है, परन्तु वे एक तरल आशा लेकर कौन-सा मार्ग पकड़ें—यह मत्ती 28 के पाठ का केंद्र है। परम प्रेरणा से भरे यीशु निर्गत पश्चात्व (post-resurrection) अब यह स्पष्ट करते हैं कि वे जो कुछ भी करते हैं, उसे पूर्णत्व के साथ उनके द्वारा किया जाएगा, क्योंकि “स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार” उनके पास है। यह पवित्र सिंहासन का उद्घोष है, न कि मानव सत्ता की इच्छा-शक्ति।
मुख्य संदेश
1) पूर्ण अधिकार: अधिकार का स्रोत यीशु है; उसका भागीरथ हाथ उनके ईश्वरत्व की पुष्टि करते हैं।
2) विश्वस्त उद्धारकार्य की कड़ी: इस सार्वभौमिक अधिकार के साथ वह बढ़ते हुए शिष्य-कार्य के लिए प्रेषित करता है—गौण नहीं, बल्कि निर्णायक निर्देश देता है।
3) प्रेरित-गति में आत्मविश्वास: यीशु की सत्ता पर आधारित साक्ष्य-आधारित भागीदारी से शिष्य समुदाय को साहस और स्पष्ट दिशा मिलती है।
पवित्र लेखन से जुड़ाव—थीम्स
cross-references (संक्षिप्त):
1) यूहन्ना 17:2-3: पिता ने उन्हें दिया है कि वे जिन्हें वह दे, उन्हें जीवन दें—यही अधिकार और दायित्व का ढांचा।
2) मत्ती 28:19-20 (अगला चरण): निष्कर्षतः इन्हीं अधिकार के साथ शिष्य-कार्य का सार्वत्रिक मार्ग निर्देशित है—पृथ्वी भर में संदेश फैलना।
3) कुलुस्सियों 2:15: सत्ता के प्रदर्शन—क्रूस पर पराजय पर विजय का प्रदर्शन, ईश्वर के आधिकारिक राजा के रूप में।
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke — संक्षिप्त संदर्भ
इन पवित्र-वचन-व्याख्याओं के अनुसार, यीशु की यह घोषणा उनके सम्मानित स्वरूप और पूर्ण अधिकार को दर्शाती है ताकि शिष्य उनके नाम पर निर्भय रूप से प्रचार करें।
कई टिप्पणियाँ उनके कार्य की स्पष्टता पर जोर देती हैं—यही संदेश चरितार्थ करता है कि मिशन का समस्त क्षेत्र और समय यीशु के अधिकार के अनुरोध को मानता है।
देवotional reflection
हम कभी-कभी अपने छोटे-छोटे भय और सीमाओं में फँस जाते हैं। परन्तु यह वचन याद दिलाता है कि जो व्यक्ति सारी सत्ताओं का स्वामी है, वह हमारा साथ देता है। उसका अधिकार हमें न तो दबाव में डालता है और न थकन से रोकता है; वह हमें बुलाता है ताकि हम उसकी शक्ति के साथ आगे बढ़ें, जो संसार के हर कोने तक पहुँच सके।
छोटा-सा अनुपूरक विचार
संयोजन-उल्लेख: यूहन्ना 17:2-3, मत्ती 28:19-20, कुलुस्सियों 2:15—इनमें सत्ता, दायित्व और विजय के संयुक्त अर्थ स्पष्ट होते हैं।
प्रश्न-पर-प्रश्न: क्या आप अपनी दैनिक प्रेरित गतिविधियों में यीशु के पूर्ण अधिकार को मानकर काम कर रहे हैं? क्या आप अपने जीवन के क्षेत्र—परिवार, कार्य, समुदाय—में उसकी महिमा का ट्वीट बनकर प्रस्तुत कर सकते हैं?