Old Testament
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मत्ती 28:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उसके भय से पहरेदार काँप उठे, और मृतक समान हो गए।
मत्ती 28:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मत्ती 28:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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प्रकाशितवाक्य 1:17 (HINIRV) »
जब मैंने उसे देखा, तो उसके पैरों पर मुर्दा सा गिर पड़ा* और उसने मुझ पर अपना दाहिना हाथ रखकर यह कहा, “मत डर; मैं प्रथम और अन्तिम हूँ, और जीवित भी मैं हूँ, (यशा. 44:6, दानि. 8:17)


Reader-friendly overview
यह वाक्य मत्ती के Gospel के अंतर्गत यीशु के मरण के बाद के घटनाक्रम को उजागर करता है। पहरेदारों का भय और उनकी काँप उठने की अवस्था एक ठंडे, यथार्थ दृश्यों वाला चित्र प्रस्तुत करती है—पद्म का भौतिक चिह्न नहीं, बल्कि प्रभु के पुनर्जीवन की शक्ति के सामने संसार की समस्त व्यवस्था की अस्थिरता का संकेत। यह दृष्टांत दर्शाता है कि ईश्वर के कार्य का प्रकाश शाकाहारी नहीं होता; वह भयभीत करने के बजाय आत्म-समर्पण और विश्वास की दिशा खोल देता है।
पद परिदृश्य और विषय
पद से स्पष्ट है कि मरघट के पहरेदार यीशु के शव की सुरक्षा के लिए पहरे के बीच स्थित थे, किंतु पृथ्वी-झटके से वे भय और अस्थिरता में डूब गए। यह घटना मृत्यु पर विजय के पहले संदेश का पहला भाग बन जाती है—यीशु के पुनर्जीवन का व्यापक प्रभाव संसार पर प्रारम्भ होता है, भले ही अभी इसे वे देख नहीं पाए हों।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस वाक्य का सार तीन बिंदुओं में समाहित है: एक आशंका के बावजूद परमेश्वर की सत्ता की स्पष्ट गवाही—मरघट के पहरेदार भी उसे रोक नहीं पाते; दूसरा, भय के प्रभाव से चकित होना, जो ईश्वर के भरे हुए तेज से तुलना में एक संवेदना मात्र है; और तृतीय, यीशु के पुनर्जीवन की पूर्वसूचना के रूप में, কী प्रकार से अनुयायियों के लिए नया दायरा और प्रोत्साहन खुलता है। यह घटनाक्रम बताता है कि प्रभु की सत्ता संसार की भयावहताओं पर भी हावी है, और उसकी मुक्ति की यह सूचीस्तरीय प्रक्रिया मानव की दृष्टि से विचलित कर सकती है, परन्तु विश्वास के द्वारा उसे स्वीकारना चाहिए।
अन्य प्रचलित टिप्पणीपुस्तकों से तुलनात्मक विचार
मैथ्यू हेनरी और अल्बर्ट बर्न्स के विचारों में इस क्षण की उपलब्धि यीशु के दिव्य अधिकार और पुनर्जीवन के प्रमाण के रूप में मानी जाती है—जो प्रभु के अभिषिक्त रहने के संकेत को पुष्ट करते हैं। एडम क्लार्क अलग-अलग घटनाओं के समन्वय के साथ यह कथन जोड़ते हैं कि पृथ्वी पर गिरते कांप हमारे दैनिक भय को नहीं, बल्कि परमेश्वर की निर्भयता को दिखाते हैं। सुझाव है कि पहरेदारों का भय एक संकेत है कि संसार की सत्ता कितनी तुच्छ है जब परमेश्वर की जयकारा गूंजता है।
कई क्रॉस-रेफरेंसेज़ और उनके संक्षिप्त संबंध
इन संदर्भों में एक स्पष्ट निष्कर्ष निकलता है: भयमुक्त आस्था की उत्पत्ति और प्रेरणा प्रत्यक्ष रूप से पुनर्जीवन के संदेश से जुड़ती है; लोग परमेश्वर की महत्ता को पहले स्थान पर रखें, न कि अपने भय को।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
संक्षेप-सार
मत्ती 28:4 में पहरेदारों का काँपना बतलाता है कि नियंत्रक सभ्यता के सामने भी प्रभु की शक्ति कैसे उजागर होती है। यह घटना पुनर्जीवन के पहले संकेत के रूप में कार्य करती है और विश्वासियों को यह प्रेरणा देती है कि भय के बीच भी ईश्वर की विजय की योजना सच है। इसके साथ, चर्चित टिप्पणियाँ और क्रॉस-रेफरेंसेज़ यह दिखाती हैं कि पुनर्जीवन विश्व की स्थिति बदल सकता है जब लोग प्रभु की महत्ता को अपनाते हैं।
----- संदर्भ-उद्धरण (संक्षेप) -----
मैथ्यू हेनरी, अर्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क के विचार ने इस मंत्रण को प्रभु की सत्ता और पुनर्जीवन की गहराई से जोड़ा है—"वह भय नहीं, पर विश्वास का कारण बनता है" जैसे संकल्पों के साथ।