Old Testament
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मत्ती 28:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
“यह कहना कि रात को जब हम सो रहे थे, तो उसके चेले आकर उसे चुरा ले गए।
मत्ती 28:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
मत्ती 28:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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मत्ती 26:64 (HINIRV) »
यीशु ने उससे कहा, “तूने आप ही कह दिया; वरन् मैं तुम से यह भी कहता हूँ, कि अब से तुम मनुष्य के पुत्र को सर्वशक्तिमान की दाहिनी ओर बैठे, और आकाश के बादलों पर आते देखोगे।”
मत्ती 28:13—रात के समय चोरता गया उनका कथन
पद के आसपास की स्थिति: यीशु की resurrection के बाद, स्त्री-गिरजाघर के चौंकाने वाले समाचार फैलते हैं। इस पंक्ति में कुछ चेलों के बारे में एक चाल पकड़ी जाती है: नेताओं का दावा है कि यीशु के चोरों ने उसे चुरा लिया और रात में चोरों ने यह किया। यह टेक्स्ट उस समय के भावनात्मक और सामाजिक दबाव को दर्शाता है जब शास्त्री-फरीसी लोग चेलों की गवाही को चुनौती देते थे और समुदाय में भय, भ्रम और गलतफहमी फैला देते थे।
क्या यह पाठ ईश्वर या विश्वास के बारे में बताता है
यह उद्घोषणा दिखाती है कि सत्य को दबाने या विकृत करने के उपाय समय-समय पर होते हैं, पर ईश्वर की योजना सत्य और पवित्रता पर आधारित रहती है। कहे गए शब्द—“रात को जब हम सो रहे थे”—में छल की आकांक्षा है, पर विश्वास के भीतर स्थिर रहने का सबक भी है: श्रोताओं को यह पूछना चाहिए कि क्या वास्तविक घटनाक्रम के सामने ठहरना और सत्य को खोजना आवश्यक है। यह संदेश दिखाता है कि ईश्वर की प्रतिष्ठा निर्भर रहती है और मानव विवेक के लिए चुनौती है कि वे किस पर भरोसा करते हैं—आदमियों के दावों पर या प्रभु की प्रम annab प्रकाश पर।
महत्वपूर्ण शब्दों/चित्रों की स्पष्ट व्याख्या
- चुरा लेना: यहाँ एक नैतिक उल्लंघन और भ्रामक दावे का प्रतीक है। सच को दबाने की कोशिश के साथ, चित्रण यह है कि परम सत्य के प्रकाश से अंधकार कैसे टकराता है।
- रात: सुनियोजन, छुपे हुए षड़यंत्र और त्रुटिपूर्ण सूचना का समय। यह एक नैतिक रण-क्षेत्र भी है जहां सत्य और झूठ का संघर्ष होता है।
संबद्ध पवित्रग्रंथ संदर्भ
उच्चारण में ये cross-refs बताते हैं कि कैसे प्रत्यक्ष प्रमाण और विश्वास के बीच संतुलन बनना चाहिए, और कैसे पहली धारणाएं कभी-कभी गलत ठहर सकती हैं, फिर भी सत्य पाठ में उजागर होता है।
आज के समय में आवेदन
- निष्पक्ष जाँच: जब भी किसी दावे पर विवाद हो, केवल एक स्रोत पर निर्भर रहने के बजाय, विभिन्न विश्वसनीय प्रमाण-पत्रों की जाँच करें।
- ईमानदारी की मांग: असहमति के बीच भी सत्य की तलाश में ईमानदार प्रश्न करें—क्या सच है और क्या उद्धृत किया गया है पर्याप्त है?
- समुदाय की सुरक्षा: गवाही और प्रमाण पर आधारित चर्चा से समुदाय को गलत फहमी से बचाने का प्रयास करें; भय या रीतिपरक चुप्पी के बजाय खुली चर्चा आवश्यक है।
याद रखने योग्य उद्धरण (सूचना हेतु): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों से आवश्यक सारांश संकलित हैं; नीचे उनके विशिष्ट शब्द केवल आवश्यकता अनुसार उद्धृत हैं:
• “यह पाठ चेलों के विरुद्ध किए गए आरोपों की गंभीरता को उजागर करता है, पर प्रभु की वास्तविकता और उनके प्रेरित होने की शक्ति पर प्रश्नचिह्न नहीं छोड़ता।” (संशोधित सार)
समापन विचार: यह पाठ मानव-स्वभाव के दमन और ईश्वर की योजना के बीच संघर्ष को कोमलता से दिखाता है। वास्तविकता वही है जो प्रभु की गवाही को माने और मिलकर सत्य की खोज करें।