Old Testament
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मत्ती 28:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
स्वर्गदूत ने स्त्रियों से कहा, “मत डरो, मैं जानता हूँ कि तुम यीशु को जो क्रूस पर चढ़ाया गया था ढूँढ़ती हो।
मत्ती 28:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मत्ती 28:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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इब्रानियों 1:14 (HINIRV) »
क्या वे सब परमेश्वर की सेवा टहल करनेवाली आत्माएँ नहीं; जो उद्धार पानेवालों के लिये सेवा करने को भेजी जाती हैं? (भज. 103:20-21)

प्रकाशितवाक्य 1:17 (HINIRV) »
जब मैंने उसे देखा, तो उसके पैरों पर मुर्दा सा गिर पड़ा* और उसने मुझ पर अपना दाहिना हाथ रखकर यह कहा, “मत डर; मैं प्रथम और अन्तिम हूँ, और जीवित भी मैं हूँ, (यशा. 44:6, दानि. 8:17)

यशायाह 41:10 (HINIRV) »
मत डर, क्योंकि मैं तेरे संग हूँ, इधर-उधर मत ताक, क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर हूँ; मैं तुझे दृढ़ करूँगा और तेरी सहायता करूँगा, अपने धर्ममय दाहिने हाथ से मैं तुझे सम्भाले रहूँगा। (यहो. 1:9, व्य. 31:6)
सीधे अर्थ का उद्घाटन
मत्ती 28:5 में स्वर्गदूत कहता है कि डरें नहीं, क्योंकि वे यीशु को ढूँढ़ने आई हैं। यह वाक्य यह स्पष्ट करता है कि ईश्वर की योजना के अनुसार पवित्र स्थलों पर भी चिंताओं के बीच आशा की रोशनी है: यीशु मरे नहीं हैं, वे जी उठे हैं और उनकी खोज में प्रियजन को समर्थ बनाती है।
संदर्भीय पृष्ठभूमि
इस घटना का स्थान वही है जहाँ यीशु का शव रखा गया था और चाहती महिलाएं वहाँ पहुंचे थीं ताकि सुचित-कानी की व्यवस्था के अनुसार उनकी सेवाएं दे सकें। कब्र का दरवाजा अभी भी ढका हुआ था, और मार्डन पवित्र अचंभे के बीच एक स्वर्गदूत उनके सामने उज्जवल रूप में प्रकट हुआ। यह संदेश न केवल यीशु के चरित की पुष्टि है, बल्कि पुरुष-देह की मृत्यु पर विजय का उद्घोष भी है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
छोटे थीमैटिक बिंदु
अन्य दृष्टांत-ग्रन्थ (cross-references) और उनका संक्षिप्त संबंध
1) लूका 24:5-6 — प्रभु का पुनर्जीवन का संदेश पहली नज़र में समान उद्घोष है; यह अवलोकन बताता है कि मृत्युदंड से जीवित निकलना मुक्तिदायी योजना का हिस्सा है।
2) मरकुस 16:6 — घोषित है कि यीशु जी उठे हैं; यह पुष्टि क्रमशः सुसमाचार के सबसे पहली घोषणा में स्पष्ट है।
3) यूहन्ना 20:18 — मरयूद्ध के बाद मसीह के जीवित रहते ही विश्वासियों के लिए उद्घाटन का क्षण आता है; यह घटनाक्रम प्रेरणा देता है कि प्रभु के अनुरोध के अनुसार साक्ष्य दें।
पढ़ाई के लिए छोटे सारांश निष्कर्ष
यह वाक्य एक बोधक संदेश है कि प्रभु यीशु क्रूस पर चढ़ा गया, मर गया और फिर जी उठकर मूक-सत्य को विजयी कर देता है। डरों के साथ आई स्त्रियाँ अब जान लेती हैं कि उनके दुख का कारण नहीं, बल्कि उद्धार का स्रोत है।
व्यावहारिक takeaway
निश्कर्ष
मत्ती 28:5 का संदेश है कि जीवन-पराक्रम पर विजय प्रभु की है। जिस प्रकार स्वर्गदूत ने स्त्रियों को आश्वस्त किया, उसी तरह आज का पाठक भी यह अनुभव करें कि उद्धार और जीवित प्रेम उनका मार्गदर्शक है।
संदेश-उद्धरण (महत्त्वपूर्ण उद्धरण): यदि संदर्भित किया गया हो, तो नीचे दिए जाते उद्धरणों से शिक्षित किया जा सकता है: “डरो मत”—यह अक्सर Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के टिप्पणी-परंपरा में उद्धृत भाव है; किन्तु यहाँ साक्ष्य-उद्धरण के रूप में सीधे पाठ से छंद-नोट्स सम्मिलित नहीं हैं।