Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
प्रकाशितवाक्य 1 प्रकाशितवाक्य 2 प्रकाशितवाक्य 3 प्रकाशितवाक्य 4 प्रकाशितवाक्य 5 प्रकाशितवाक्य 6 प्रकाशितवाक्य 7 प्रकाशितवाक्य 8 प्रकाशितवाक्य 9 प्रकाशितवाक्य 10 प्रकाशितवाक्य 11 प्रकाशितवाक्य 12 प्रकाशितवाक्य 13 प्रकाशितवाक्य 14 प्रकाशितवाक्य 15 प्रकाशितवाक्य 16 प्रकाशितवाक्य 17 प्रकाशितवाक्य 18 प्रकाशितवाक्य 19 प्रकाशितवाक्य 20 प्रकाशितवाक्य 21 प्रकाशितवाक्य 22Verse
प्रकाशितवाक्य 1:1 प्रकाशितवाक्य 1:2 प्रकाशितवाक्य 1:3 प्रकाशितवाक्य 1:4 प्रकाशितवाक्य 1:5 प्रकाशितवाक्य 1:6 प्रकाशितवाक्य 1:7 प्रकाशितवाक्य 1:8 प्रकाशितवाक्य 1:9 प्रकाशितवाक्य 1:10 प्रकाशितवाक्य 1:11 प्रकाशितवाक्य 1:12 प्रकाशितवाक्य 1:13 प्रकाशितवाक्य 1:14 प्रकाशितवाक्य 1:15 प्रकाशितवाक्य 1:16 प्रकाशितवाक्य 1:17 प्रकाशितवाक्य 1:18 प्रकाशितवाक्य 1:19 प्रकाशितवाक्य 1:20



प्रकाशितवाक्य 1:17 पर व्याख्या — डर को मिटाकर जीवन की पुष्टि
मुख्य interpretive point: प्रकाशितवाक्य 1:17 में प्रभु यीशु का दर्शन कर के पतरस-यूसुफ नहीं, परमेश्वर के सामर्थ्य और जीवित रहने की महिमा स्पष्ट रूप से उभरती है। देखते ही पतरस का भय डीगता है, पर यीशु का संदेश है: मैं प्रथम और अन्तिम हूँ, और जीवित भी मैं हूँ। यह उद्धारकर्ता के दिव्य आत्म-परिचय और उन लोगों के लिए आश्वासन है जो अत्यंत कठिन समय मेंखड़े हैं।
साहित्यिक संदर्भ
यह अनुभूति द डेनियल-यशा के संदर्भों से प्रेरित है जिसमें ईश्वर का आत्म-स्वरूप गूंजता है; साथ ही यह यशायाह 44:6 के साथ समानता दिखाती है: प्रभु एक है और उसके बदले कौन भी नहीं हो सकता। पैगंबरदानियों द्वारा प्रस्तुत Θεός-परिचय और वह जो जीवित है, पाठक को यह याद दिलाता है कि चांदनी-रौशनी के बीच भी प्रभु वर्तमान है।
धार्मिक महत्व
1) प्रभु का प्रथम और अन्तिम होना: यह निर्भरता का आधार है—वह शुरुआत भी है और सीमा भी। हमारे जीवन की सभी घटनाओं के पीछे उसकी योजना है, और उसका अंत भी वही है जो ईश्वर चाहता है।
2) जीवित होना: मृत्यु के बाद भी उसकी सत्ता और सजीवता अक्षुण्ण है; संकट में भी वह हमारा जीवनकर्ता है। यह वचन पाठक को भय से उबारकर विश्वास की सीढ़ी देता है कि ईश्वर हमारे साथ है।
अन्य-आत्मीक सम्बद्धता (Cross-references)
चर्चनात्मक प्रश्न (Reflection questions)
संक्षिप्त निष्कर्ष
इस वचन में प्रभु यीशु अपने दिव्य आत्म-प्रकाश के साथ प्रस्तुत होते हैं—पुनः चेतावनी है कि भय पर विजय की कुंजी उनके हाथ में है। वह हमारे जीवन के आन्तरिक और बाह्य संकट दोनों में जीवित रहने वाला आधार हैं। यह पाठ बताता है कि विश्वास के दौरान भी हमारी रक्षा और दिशा परमेश्वर के धैर्यपूर्ण हाथों में है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (महिमामय विचार)
Matthews Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट विचारों में से उचित संक्षेप, जहां मिल सके, नीचे दिया गया है:
“John sees the glorified Christ, and falling at his feet, is reassured: Fear not; I am the First and the Last, and the Living One.”
नोट: ऊपर का उद्धरण एक सुसंगत सार है जो पारंपरिक टीकाओं के रूप में पंक्तिबद्ध रूप में मिलता है।