प्रकाशितवाक्य 21:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

फिर मैंने नये आकाश और नयी पृथ्वी को देखा, क्योंकि पहला आकाश और पहली पृथ्वी जाती रही थी, और समुद्र भी न रहा। (यशा. 66:22)

प्रकाशितवाक्य 21:1 पद-दर-पद बाइबल टीका

नया आकाश और नई पृथ्वी: प्रकाशितवाक्य 21:1 पर इस महान परिवर्तन की व्याख्या

मुख्य interpretive बिंदु: भविष्यवाणी पाठ यह दर्शाता है कि ईश्वर के राज्य में सभी संकट, पाप और पुरानी व्यवस्था की प्रतिध्वनियाँ समाप्त हो जाएंगी; नया सृष्टि-परिवर्तन पूर्ण रूप से परमेश्वर के नये-प्रस्तावित राज्य की स्थापना का संकेत है, जिसमें न तो समुद्र और न ही पुरानी बाधाएं शेष रहेंगी।

साहित्यिक संदर्भ ( Literary Context )

यह प्रकरण दिव्यता के क्रम के अंत और नया सृजन מבח की शुरुआत का दृश्य प्रस्तुत करता है। 21:1 बताता है कि पहला आकाश और पहली पृथ्वी चली गईं; यहाँ “पहला” से पुराने सृष्टि-युग की दूरी स्पष्ट होती है, जबकि नया आकाश-नया पृथ्वी यह दर्शाते हैं कि परमेश्वर की योजना में पुनः-स्थापना की कोई कमी नहीं। यशायाह 66:22 जैसे पुराने निर्बन्धों से अनुगूँज मिलती है कि निर्माण-कार्य का पुनः-नविकरण परमेश्वर की स्थिरता और उसकी महिमा है।

गंभीर theological significance (धर्मशास्त्रीय महत्व)

यह उद्घोषति संकेत देता है कि ईश्वर अपने चूड़ित समुदाय के लिए एक पूर्ण और अपरिवर्तनीय निवास बनाते हैं। यह ज्ञान कि समुद्र नहीं रहेगा, पहले के अंधकार, भय और विदेशी शक्तियों के वियोग का प्रतीक है; नया सृजन शांति, न्याय और सीधी सहभागिता से पूर्ण होगा। यह यह भी दिखाता है कि ईश्वर का राज पुराने भू-स्थितियों से ऊपर उठकर एक स्थायी व्यवस्था बनाता है, जहाँ रिश्ते और उपस्थिति सीधे भगवान से होती है।

Cross-references (अनुदान संदर्भ) और उनसे आपका संलग्नन

  • यशायाह 65:17–25 – एक नई सृष्टि और शांति-युक्त नगर का वर्णन; यह बताता है कि परमेश्वर नया निर्माण कैसे बनाएँगे जिसमें दुख और दर्द नहीं।
  • 2 कुरिन्थियों 5:17 – क्रिस्ट में नया सृजन; पुरानी बाते समाप्त, नई जीवन-शैली की शुरुआत।
  • यहेउ 12:26–28 – विश्वस्त जीवन में परमेश्वर की सत्ता और शांति की महिमा—नए आकाश-नई पृथ्वी की तैयारी की प्रेरणा।

संक्षेप में इन संदर्भों से दिखता है कि नया निर्माण मसीही आस्था का केंद्रीय आश्वासन है: परमेश्वर का तात्कालिक राज्य भी पुरानी विपत्तियों से मुक्त होगा और उसका चेहरा सभी के लिए प्रत्यक्ष होगा।

जीवंत प्रश्न (Reflection)

  • मेरे जीवन में कहाँ मुझे पुरानी चीजों से मुक्त होकर परमेश्वर के नए राज्य के अनुरूप बदला हुआ जीवन चाहिए?
  • जब वर्तमान दुःख बार-बार आ जाए, तब मैं इस वचन को कैसे याद करूँ कि नया निर्माण संभव है?
  • क्या मेरी उम्मीदें नए आकाश-नई पृथ्वी संबंधी मिसालों से प्रेरित होकर परमेश्वर की महिमा में केंद्रित हैं?

संক্ষिप्त निष्कर्ष

प्रकाशितवाक्य 21:1 हमें यह दृढ़ आश्वस्ति देता है कि ईश्वर के महान उद्धारकार्य के अंत में एक पूर्ण, पवित्र और स्थिर सृष्टि आएगी। नया आकाश और नई पृथ्वी एक दिव्य प्रेम-आधारित निवास का संकेत हैं, जहाँ प्रभु का राज्य पूरी तरह से स्थापित होगा और पुराने सब दुःख मिटेंगे। यह पाठ हमें वर्तमान परिस्थितियों में भी भरोसा देता है कि परमेश्वर की योजना सर्वोपरि है और उसकी महिमा में प्रकृति स्वयं नई गूँज के साथ जन्मेगी।

मूल पाठ के समान विचारधारक उद्धरण (यदि उपलब्ध) — मॉथ्यू Henry, Albert Barnes, Adam Clarke

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*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

प्रकाशितवाक्य 21:1 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यशायाह 65:17 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 65:17 (HINIRV) »
“क्योंकि देखो, मैं नया आकाश और नई पृथ्वी उत्‍पन्‍न करता हूँ; और पहली बातें स्मरण न रहेंगी और सोच-विचार में भी न आएँगी। (2 पत. 3:13, प्रका. 21:1,4)

2 पतरस 3:13 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
2 पतरस 3:13 (HINIRV) »
पर उसकी प्रतिज्ञा के अनुसार हम एक नये आकाश और नई पृथ्वी की आस देखते हैं जिनमें धार्मिकता वास करेगी। (यशा. 60:21, यशा. 65:17, यशा. 66:22, प्रका. 21:1, 27)

यशायाह 66:22 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 66:22 (HINIRV) »
“क्योंकि जिस प्रकार नया आकाश और नई पृथ्वी, जो मैं बनाने पर हूँ, मेरे सम्मुख बनी रहेगी*, उसी प्रकार तुम्हारा वंश और तुम्हारा नाम भी बना रहेगा; यहोवा की यही वाणी है। (2 पत. 3:13, प्रका. 21:1)

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