2 पतरस 3:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

पर उसकी प्रतिज्ञा के अनुसार हम एक नये आकाश और नई पृथ्वी की आस देखते हैं जिनमें धार्मिकता वास करेगी। (यशा. 60:21, यशा. 65:17, यशा. 66:22, प्रका. 21:1, 27)

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2 पतरस 3:13 पद-दर-पद बाइबल टीका

2 पतरस 3:13 — नया आकाश और नई पृथ्वी की प्रतीक्षा

संदेश: परमेश्वर की प्रतिज्ञा के अनुसार हम ऐसी स्थिति की आशा करते हैं जिसमें धार्मिकता वास करे; वर्तमान इतिहास के अंत तक नहीं, बल्कि ईश्वर के पुनः परिचय के भविष्य में।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

पतरस के इस चिट्ठे में लेखक उस विश्वासयोग्य धीरता का स्मरण कराते हैं जो महान दिवस के अवसर पर आड़े आने वालों को सचेत करे। वे कहते हैं कि परमेश्वर ने पुराने संसार के ढहते समय न्याय और दया दोनों के तेज से बुलाया, फिर नया संसार, जिसमें धार्मिकता वास करेगी, की आशा रखते हैं। यह द्रष्टा नहीं कि पृथ्वी का नष्ट होना अंत नहीं, बल्कि उसे नया रूप देकर 하나님 के राज्य के अनुसार व्यवस्थित करना है।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • आकाश-भूमि का परिवर्तन: 2 पतरस 3 में परमेश्वर के अंतःक्रमिक निर्णयों के अनुसार नया आकाश और नई पृथ्वी का विचार है, जिसमें पुरानी प्रतिज्ञाओं की समाप्ति नहीं बल्कि पूर्णपूर्ण पुनर्रचना है।
  • धार्मिकता की वासना: यहाँ धार्मिकता से तात्पर्य न केवल धार्मिक रीति-रिवाज, बल्कि व्यवहार और जीवन-शैली में ईश्वरीय समानता का पूर्ण योगदान है।
  • येशु के पुनरागमन के साथ यह आशा जुड़ी है: आशा केवल काल्पनिक संतोष नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन के नये अनुभव का भरोसा है जो ईश्वर के राज्य का अभिन्न प्रमाण है।

मुख्य थीम का संक्षेप

  • हमें दृढ़ विश्वास पर टिके रहना चाहिए कि परमेश्वर स्वयं नई स्थिति प्रदान करेंगे।
  • जीवन शैली में यीशु मसीह के अनुरूप परिवर्तन आवश्यक है।
  • आशा से प्रेरित होकर वर्तमान संसार के दर्द-तकलीफों के बीच पवित्रता को बनाए रखना चाहिए।

Cross-references और उनका संक्षिप्त स्पष्टीकरण

यशा 60:21— प्रभु के राज्य की रोशनी में हर मनुष्यों के जीवन की धार्मिकता बढ़ती है; यह दृश्य 2 पतरस 3 के प्रतिफल के साथ संगत है।

यशा 65:17— नया निर्माण का सिद्धांत भविष्य में पूर्ण होने वाला है, जो 2 पतरस 3 के “नया आकाश-नई पृथ्वी” के समान दिशा देता है।

प्रक्का 21:1

— प्रचलित परमेश्वर के राज्य के भीतर महिमा-पूर्ण नये निर्माण का चित्रण; धार्मिकता का स्थापना उसी दिशा की पुष्टि करता है।

हेतु-प्रयोग और व्यवहारिक takeaway

हमारे जीवन में उम्मीद का केन्द्र परमेश्वर की महिमा है। चाहे वर्तमान संकट हों, हमें यीशु मसीह के अनुसार पवित्र जीवन जीते रहने की प्रेरणा मिलती है। इसलिए व्यक्तिगत आचरण, सेवा और प्रेम में धार्मिकता की वृद्धि करें; ताकि नया निर्माण आने पर हम प्रभु के साथ सामंजस्य में रहें।

पढ़ने के लिए संदर्भ

यशा के भविष्यवाणियाँ और प्रकट-ग्रंथ में नया निर्माण का विचार—यहाँ समन्वित रूप से प्रस्तुत है ताकि पाठक एक जागृत दृष्टि से अपने समय के संदर्भ में स्थिर रहें।

नोट: नीचे उद्धृत पूर्ण वाक्य केवल Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke से उपलब्ध हो सकेंगे।परिचयात्मक उद्धरणों के लिए चयनित भाग ही प्रस्तुत हैं; पूर्ण टेक्स्ट उपलब्धता के आधार पर व्यवहार किया गया है।

उद्धरणों के लिए संक्षेप: कोई विशिष्ट पूर्ण उद्धरण इस सार में नहीं जोड़ा गया; परन्तु इन विद्वानों के विचारों के आधार पर पाठ का एकीकृत विवेचन दिया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 पतरस 3:13 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यशायाह 65:17 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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“क्योंकि देखो, मैं नया आकाश और नई पृथ्वी उत्‍पन्‍न करता हूँ; और पहली बातें स्मरण न रहेंगी और सोच-विचार में भी न आएँगी। (2 पत. 3:13, प्रका. 21:1,4)

प्रकाशितवाक्य 21:1 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
प्रकाशितवाक्य 21:1 (HINIRV) »
फिर मैंने नये आकाश और नयी पृथ्वी को देखा, क्योंकि पहला आकाश और पहली पृथ्वी जाती रही थी, और समुद्र भी न रहा। (यशा. 66:22)

यशायाह 66:22 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 66:22 (HINIRV) »
“क्योंकि जिस प्रकार नया आकाश और नई पृथ्वी, जो मैं बनाने पर हूँ, मेरे सम्मुख बनी रहेगी*, उसी प्रकार तुम्हारा वंश और तुम्हारा नाम भी बना रहेगा; यहोवा की यही वाणी है। (2 पत. 3:13, प्रका. 21:1)

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