Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 पतरस 3:4 बाइबल पद की व्याख्या
2 पतरस 3:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और कहेंगे, “उसके आने की प्रतिज्ञा कहाँ गई? क्योंकि जब से पूर्वज सो गए हैं, सब कुछ वैसा ही है, जैसा सृष्टि के आरम्भ से था।”
2 पतरस 3:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 पतरस 3:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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मलाकी 2:17 (HINIRV) »
तुम लोगों ने अपनी बातों से यहोवा को थका दिया है। तो भी पूछते हो, “हमने किस बात में उसे थका दिया?” इसमें, कि तुम कहते हो “जो कोई बुरा करता है, वह यहोवा की दृष्टि में अच्छा लगता है, और वह ऐसे लोगों से प्रसन्न रहता है,” और यह, “न्यायी परमेश्वर कहाँ है?”

यिर्मयाह 5:12 (HINIRV) »
“उन्होंने यहोवा की बातें झुठलाकर कहा, 'वह ऐसा नहीं है; विपत्ति हम पर न पड़ेगी, न हम तलवार को और न अकाल को देखेंगे।

2 पतरस 3:4 — संदिग्ध प्रतिज्ञा और उसके संदर्भ का पुनः ध्यान
passage का आभास औरImmediate setting
पौलिश चिट्ठी के अंतिम भाग में यह पंक्तियाँ उन लोगों की चुनौती पर केंद्रित हैं जो पुनः वापस आते दिल से नहीं मानते कि प्रभु यीशु आ चुके हैं या आ सकते हैं। वे कहते हैं कि “उसके आने की प्रतिज्ञा कहाँ गई? क्योंकि जब से पूर्वज सो गए हैं, सब कुछ वैसा ही है, जैसा सृष्टि के आरम्भ से था।” यहाँ पाठक को यह दिखाने की कोशिश है कि समय की खिड़की दीर्घ है, कल्पनाओं की परिधियाँ चौड़ी हैं, और परमेश्वर के प्रेरित-कथन की सत्यता पर लोगों का संदेह बना रहता है।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से स्पष्ट होता संदेश
पहचानने योग्य बिंदु यह है कि परमेश्वर के समयक्रम और मानव समय की धारणा में भिन्नता है। परमेश्वर के वचनों में गोता लगाने पर हम समझते हैं कि प्रतिज्ञा का सम्मान उसकी शक्ति और धैर्य की विशेषता है। लेखन यह संकेत देता है कि ईश्वर अपनी योजना को स्थिर एवं विश्वसनीय बनाए रखते हैं, भले ही मानवीय अनुभव प्रत्यक्ष रूप से परिवर्तन न देखें। यहाँ विश्वास का मूल है: भगवान के समय पर निर्भर रहना, न कि मानव अनुभव के तर्क पर।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की व्याख्या
“ प्रतिज्ञा ” और “ आना ” जैसे शब्द यहाँ समय के क्रम और पैमाने की बात करते हैं। ये शब्द यह स्मरण करते हैं कि परमेश्वर अपने समय पर हर चीज पूरी करते हैं, और हमारे लिए धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करना धर्म का हिस्सा है। “पूर्वज सो गए” का उल्लेख वह स्मरण कराता है कि इतिहास गवाह है—धीरे-धीरे पूरा होने वाले मंगलमय वायदे अभी अधूरा नहीं; यह वह मार्ग है जिसे भविष्य के परिपूर्णत्व के लिए किया गया है।
関連 पाठ
धर्मशास्त्रीय इनसाइट्स (संक्षेप में)
फिलहाल के संदर्भ में, प्रसिद्ध पोथियाँ इस प्रकार विचार साझा करती हैं: मैथ्यू हेनरी कहते हैं कि परमेश्वर का समय मानव विचार से ऊपर है और उसका उत्साहभरा वचन अडिग रहता है; एल्बर्ट बर्न्स बताते हैं कि आस्था वही है जो परमेश्वर के विश्वासयोग्य रहने पर टिकी रहती है, भले हमारे अनुभव ठहराव दिखाएं; एडम क्लार्क स्मरण कराते हैं कि दुष्टों के तर्क में समय-आकांक्षा नहीं, बल्कि परमेश्वर की योजना और उसकी दिए मार्ग का पालन आवश्यक है।
आज का व्यवहारिक अनुप्रयोग
- कठिन परिश्रम और धैर्य के साथ विश्वास बनाए रखें: जो लोग कह रहे हैं कि प्रतिज्ञा ठहर गई, उन्हें मौजूदा घटनाओं के बजाय परमेश्वर के वचन की स्थिरता पर भरोसा देना चाहिए।
- नीतिगत निर्णयों में धैर्यपूर्ण प्रतीक्षा: जीवन के परिवर्तनों में जल्दबाजी के बजाय ईश्वर के समय-সূচी पर भरोसा करें।
- समुदाय के भीतर पवित्र जीवन: उत्साह और आशा से एक-दूसरे को प्रोत्साहित करें कि प्रभु के आगमन की प्रतिज्ञा सत्य है और वह उचित समय पर पूरा होगा।
संक्षिप्त सूत्रार्थ
आत्मिक सच यही है कि ईश्वर की प्रतिज्ञा कभी टलती नहीं; हमारे भाग्य की दिशा उनके समय पर निर्भर है। इस विश्वास के साथ धैर्य और पवित्रता के साथ जीवन जिएं, ताकि हमारे सिद्धांतों में एक स्पष्ट उदाहरण बनें।
कृपया देखें: याकूब 5:7-8; मत्ती 24:44; यूहन् 14:3 — ये क्रॉस-रेफरेंसेस इस विचार को और स्पष्ट करती हैं कि प्रतीक्षा और जागृति ईश्वर के आत्म-कार्य के साथ कैसे जुड़ी रहती है।
हिंदी शब्दावली में यह पाठ एक सरल समुदायिक स्मृति बनाता है: परमेश्वर के समय के अनुसार सब कुछ होगा; हमें विश्वास, धैर्य और पवित्रता से उठना चाहिए।