Old Testament
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2 पतरस 3:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
कि तुम उन बातों को, जो पवित्र भविष्यद्वक्ताओं ने पहले से कही हैं और प्रभु, और उद्धारकर्ता की उस आज्ञा को स्मरण करो, जो तुम्हारे प्रेरितों के द्वारा दी गई थी।
2 पतरस 3:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 पतरस 3:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहूदा 1:17 (HINIRV) »
पर हे प्रियों, तुम उन बातों को स्मरण रखो; जो हमारे प्रभु यीशु मसीह के प्रेरित पहले कह चुके हैं।

लूका 1:70 (HINIRV) »
जैसे उसने अपने पवित्र भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा जो जगत के आदि से होते आए हैं, कहा था,

2 पतरस 2:21 (HINIRV) »
क्योंकि धार्मिकता के मार्ग का न जानना ही उनके लिये इससे भला होता, कि उसे जानकर, उस पवित्र आज्ञा से फिर जाते, जो उन्हें सौंपी गई थी।
2 पतरस 3:2 का महत्व: पवित्र भविष्यद्वक्ताओं के शब्द और प्रेरितों की आज्ञा स्मरण
इस आयत में प्रेरित पतरस पाठक-समुदाय को चेतावनी देता है कि वे उन बातों को न भूलें जो पहले से पवित्र भविष्यद्वक्ताओं ने कही हैं और प्रभु ईसा मसीह के उद्धारकर्ता के बारे में जो आज्ञा उनके प्रेरितों के द्वारा दी गई है। यह संदेश मूल रूप से स्थिर विश्वास और सही आस्था की सुरक्षा पर केंद्रित है: विश्वासियों को अतीत की कृपा-प्रेरणा से जुड़ना होगा और प्रेरितों की शिक्षा के आधार पर अपने जीवन का आचार-व्यवहार निर्धारित रखना होगा।
1) मूल संदर्भ क्या कहता है?
पतरस उन गलतमानी और तर्कों का ध्यान दिलाते हैं जो आखिर समय में बढ़ेंगे—इनमें नास्तिक-प्रवृत्ति, समय से पहले समाप्त होने वाले समय के स्व-आत्म-विश्वास और ठोस सामान्यचर्या की कमी शामिल है। परन्तु पतरस यह स्पष्ट करते हैं कि परमेश्वर की सच्ची चिंगारी और उद्धार की राह पुराने भविष्यद्वक्ताओं के पूर्ण शब्दों में और मसीह के उद्धार-कार्य में दृढ़ है। इसलिए पाठक वही सच्चाई पकड़ें जो ईश्वर द्वारा संहिताबद्ध है—यानी परमेश्वर के द्वारा पहले से बताई गई भविष्यवाणियाँ और प्रेरितों द्वारा दी गई प्रेरित-आज्ञा।
2) संदेश की मुख्य धारा
- पहले से कही गई बातों को स्मरण रखना: अतीत की घोषणा नहीं भागी-भागी, बल्कि ठोस राहत और मार्गदर्शक प्रकाश है।
- प्रभु के उद्धारकर्ता के बारे में प्रेरितों की आज्ञा पर टिके रहना: प्रेरितों ने मसीह के बारे में सही शिक्षाएं दीं, जिन्हें विश्वस्त सदनों के लिए जीवन-मार्ग बनना चाहिए।
यह दोहरी स्मरण–आज्ञा बताती है कि धर्म-सत्य एक निरंतर दायित्व है: पुरानी भविष्यवाणी की परंपरा और नई शिक्षा के बीच एक अखंड कड़ी बनी रहे।
3) थीम्स जिन्हें समझना उपयोगी है
4) संबंधित पवित्र ग्रंथों से cross-references
- यशया 8:20 और 2 तीमुथ 3:14: “जो तुमने देखा नहीं, पर जो सच है उसे पकड़ो” का संदर्भ—विश्वासियों के लिए सत्य के प्रति दृढ़ रहने की exhortation.
- मत्ती 7:24-27: सत्य-आधार पर जीवन बनाए रखने की आवश्यकता—जो शैक्षिक शिक्षाओं को ठोस कर्म में बदले।
- 1 पतरस 1:10-12: पुरानी भविष्यवाणियों की खोज और उद्धारकर्ता के संदर्भ का पुनरावलोकन—यह दिखाता है कि पूरी योजना एक ध्रुवधार स्थित है।
5) संक्षिप्त समझ/शब्द-विन्यास
यह आयत हमें याद दिलाती है कि विश्वासी को न केवल पुरानी भविष्यवाणियों के साथ जुड़ा रहना है, बल्कि प्रेरितों द्वारा दी गई शिक्षाओं के आधार पर जीवनयापन भी करना है। सत्य, उद्धार और आज्ञा—तीनों एक साथ चलते हैं ताकि विश्वास मजबूत रहे और गलत शिक्षाओं से बचा जा सके।
6) देवotional ध्यान
जब हम स्मरण-योग्य सत्य पर टिके रहते हैं, तब जीवन में स्थिरता मिलती है। कटु आलोचनाओं के बीच भी अगर हम पवित्र भविष्यद्वक्ताओं की भविष्यवाणियों और प्रेरितों की शिक्षाओं को स्मरण करें, तो हमारे विश्वास की नींव मजबूत होती है। चाहे समय कैसा भी हो, परमेश्वर की योजना और उद्धार का प्रभाव हमारे भीतर और समुदाय में स्पष्ट रहता है।
7) संक्षिप्त उद्धृत आवश्यक (public-domain) टिप्पणीकारों से संकेत
इस भाग में हमने संयुक्त प्रस्तुति के लिए Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के सामान्य विद्यार्थ-परंपरा से प्राप्त विचारों को संजोया है. इसलिए नीचे किसी भी ठोस उद्धरण-रेखा को शामिल किया गया है:
“यही है कि विश्वासियों को हर समय उन बातों को याद रखना चाहिए, जो सत्य में है”—यह एक सामान्य भावना है जो Henry के प्रकार के अध्याय-व्याख्या में भी मिलती है।
“प्रेरितों की शिक्षा वह आधार है, जिस पर नयी शिक्षाएं टिकती हैं; यदि उनके शब्दों को छोड़ा जाए, तो विश्वास में भटकाव आता है।”
“पुरानी भविष्यवाणियाँ और नए आदेश एक ही प्रकाश-स्तंभ से आगे बढ़ते हैं; दोनों मिलकर एक ही सत्य को प्रमाणित करते हैं।”
8) मिनिमा-Cross-reference स्पष्ट विवरण
- संदर्भ: यशया 8:20 — सत्य के अनुसार आचरण का दमन और सत्य पर टिके रहना.
- संदर्भ: मत्ती 7:24-27 — शास्त्रमूलक शिक्षाओं को जीवन-यथार्थ में बदले जाना चाहिए.
- संदर्भ: 1 पतरस 1:10-12 — भविष्यवाणियाँ और उद्धारकर्ता की योजना एक साथ स्पष्ट हैं.