Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 पतरस 3:3 बाइबल पद की व्याख्या
2 पतरस 3:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और यह पहले जान लो, कि अन्तिम दिनों में हँसी-उपहास करनेवाले आएँगे, जो अपनी ही अभिलाषाओं के अनुसार चलेंगे।
2 पतरस 3:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 पतरस 3:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहूदा 1:18 (HINIRV) »
वे तुम से कहा करते थे, “पिछले दिनों में ऐसे उपहास करनेवाले होंगे, जो अपनी अभक्ति की अभिलाषाओं के अनुसार चलेंगे।”

2 पतरस 2:10 (HINIRV) »
विशेष करके उन्हें जो अशुद्ध अभिलाषाओं के पीछे शरीर के अनुसार चलते, और प्रभुता को तुच्छ जानते हैं वे ढीठ, और हठी हैं, और ऊँचे पदवालों को बुरा-भला कहने से नहीं डरते।

1 तीमुथियुस 4:1 (HINIRV) »
परन्तु आत्मा स्पष्टता से कहता है कि आनेवाले समयों में कितने लोग भरमानेवाली आत्माओं, और दुष्टात्माओं की शिक्षाओं पर मन लगाकर विश्वास से बहक जाएँगे,
शब्दशः अर्थ और पहली समझ
2 पतरस 3:3 में कहा गया है कि अंतिम दिनों में हँसी-उपहास करनेवाले आएँगे, जो अपनी ही अभिलाषाओं के अनुसार चलेंगे। सरल शब्दों में इसका मतलब है कि कुछ लोग सच का मार्ग जानकर भी उसे न मानकर, अपने desires के अनुसार मार्ग चुनेंगे और उन पर हँसेंगे या उसे मजाक समझेंगे।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पत्र पौलुस-समकालीन नहीं, प्रेरित पतरस द्वारा लिखा गया है ताकि विश्वासियों को अन्तिम दिनों की वास्तविक प्रवृत्ति के बारे में सचेत किया जा सके। अंतकाल के संकेतों के बीच, संसार की प्रवृत्ति का एक प्रमुख बिंदु यह है कि लोग परमेश्वर के आदेश और न्याय को उड़ा देंगे, और एक प्रकार का तख्तापलट-भाव प्रकट करेंगे जहाँ वे स्वयं के सुख और अभिलाषाओं को सर्वोपरि मानते हैं।
व्याख्यात्मक अवलोकन
थीमेटिक बिंदु
अन्य स्वीकृत टिप्पणीकारों के सार
मार्थ्य हेनरी की दृष्टि से यह चेतावनी अच्छे नैतिकता की तरफ इशारा करती है—अपने मन के अहंकार के कारण लोग सच को छोड़ देते हैं।‑
एल्बर्ट बार्न्स कहते हैं कि इन हँसी-उपहास करनेवालों की प्रवृत्ति मानव स्वार्थ और सांसारिक आनन्द से उपजी है; यह अंत के दिनों की सामान्य अवस्था है।
आदम क्लार्क बतलाते हैं कि यह निंदा उन लोगों के बारे में है जो सत्य को संदिग्ध बनाते हैं, ताकि वे अपने फैसलों को सही ठहरावा दें।
क्रॉस-रेफरेंसेज (संश्लेषणात्मक संदर्भ)
- यशायाह 5:20-21: ... जो विपरीत चीजों को अच्छा कहें, और बुराई को शुभ मानें; यह विश्वसनीय चेतावनी से जुड़ता है कि समय आने पर सच से मुंह मोड़ना सामाजिक दबाव बन जाता है।
- 2 पतरस 2:3: आत्म-स्वार्थ और छल से भरे विचारों की घेराबंदी, जो अन्तिम दिनों की प्रवृत्ति के समान है।
- यूहन्ना 15:18-19: यदि संसार तुमसे न माने, तो यह समझो कि वे मुझे नहीं, बल्कि मुझे भेजने वाले को न मानते हैं; भरोसे और प्रोत्साहन के लिए यह एक परीक्षण है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
विश्वास में स्थिर रहने के लिए संभव प्रतिरोध: - सत्य के प्रति विनम्रता बनाए रखें, भले ही यह समाज के कथित “हँसी” के विरुद्ध हो। - अपनी आंखों को परमेश्वर की ओर टिकाय रखें और अपनी अभिलाषाओं को नियंत्रण में रखें। - समुदाय के भीतर प्रेम और सच का आत्म-सम्मान बनाए रखें, ताकि दबाव के बावजूद विश्वास दृढ़ रहे।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह पवित्रता की सुरक्षा के लिए एक चेतावनी है कि अंतिम दिनों में प्रचलित चुटकी और व्यंग्य भी सत्यान्वेषी प्राणों को विचलित कर सकता है। पर प्रभु के न्याय और विश्वास की स्थिरता हमारे लिए मार्गदर्शक है।