Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 पतरस 3:5 बाइबल पद की व्याख्या
2 पतरस 3:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वे तो जान-बूझकर यह भूल गए, कि परमेश्वर के वचन के द्वारा से आकाश प्राचीनकाल से विद्यमान है और पृथ्वी भी जल में से बनी और जल में स्थिर है (उत्प. 1:6-9)
2 पतरस 3:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 पतरस 3:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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इब्रानियों 11:3 (HINIRV) »
विश्वास ही से हम जान जाते हैं, कि सारी सृष्टि की रचना परमेश्वर के वचन के द्वारा हुई है। यह नहीं, कि जो कुछ देखने में आता है, वह देखी हुई वस्तुओं से बना हो। (उत्प. 1:1, यूह. 1:3, भज. 33:6,9)

उत्पत्ति 1:9 (HINIRV) »
फिर परमेश्वर ने कहा, “आकाश के नीचे का जल एक स्थान में इकट्ठा हो जाए और सूखी भूमि दिखाई दे,” और वैसा ही हो गया। (2 पत. 3:5)

भजन संहिता 24:2 (HINIRV) »
क्योंकि उसी ने उसकी नींव समुद्रों के ऊपर दृढ़ करके रखी*, और महानदों के ऊपर स्थिर किया है।
2 पतरस 3:5 का सार: परमेश्वर के क्रम को भूला नहीं जाना
सीधे शब्दों में अर्थ: लोग यह मानकर चल पड़ते हैं कि आकाश-भूमि पहले से स्थिर है, जबकि परमेश्वर के वचनों की गवाही से उन्होंने यह भूल की है कि आकाश प्राचीन काल से परमेश्वर की सृष्टि के अनुसार चला आ रहा है तथा पृथ्वी जल और जल के भीतर बनी है, जैसा उत्पत्ति 1:6-9 में दर्शाया गया है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पाठ पतरस के उस खतरे के प्रति चेतावनी से जुड़ा है जिसमें कुछ लोग प्रभु के दीर्घकालिक धैर्य को गलत समझते हैं और दर्शन-ज्ञान में ठहराव मान लेते हैं। पतरस याद दिलाते हैं कि परमेश्वर के वचन से प्रकृति और इतिहास का क्रम बना है—आकाश पहले पानी से और पृथ्वी जल से विभाजित होकर स्थिर हुई। यह उद्धरण पुराने नियम के सृष्टि-उद्धरण की याद दिलाते हैं ताकि विश्वासियों को यह पता चले कि परमेश्वर की कृपा और न्याय दोनों एक क्रम के अनुसार चलते हैं।
व्याख्या के मुख्य बिंदु
संकेत संकेतक विचार
अन्य संदर्भों से जुड़ाव
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पवित्र चरित्र के लिए व्यावहारिक निष्कर्ष
हमारे विश्वास में स्थिरता बनाए रखने के लिए यह है कि हम प्रभु की सृष्टि-क्रम और उनकी प्रतिज्ञाओं पर दृढ़ दृष्टि रखें। जब संसार-प्रकृति के संकेत आते हैं, तब भी हमारी आशा उनके पछाने नहीं, उनकी योजना के अनुरूप रहती है।
संदेह से बचाव—संक्षिप्त पाठ
यहाँ बताया गया है कि परमेश्वर के वचन की स्मृति ही अस्थिरता को रोकती है: वे जो जान-बूझकर भूल जाते हैं कि आकाश-भूमि परमेश्वर के क्रम से प्राचीनकाल से विद्यमान हैं, वे अपने समय के धोखे में पड़ जाते हैं। इस कारण हमें सत्य के मार्ग पर स्थिर रहते हुए धैर्य और विवेक के साथ जिएँ।
आवश्यक उद्धरण और टिप्पणी
यदि आप चाहें, तो यह पंक्ति Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-domain टिप्पणियों से संकलित मुख्य विचारों के अनुरूप भी देखी जा सकती है। इन टिप्पणियों में प्रमुख सूत्रधार यह है कि परमेश्वर के सृजन-क्रम और उनके समय की वाणी हर स्थिति में विश्वसनीय है; मानव धारणाओं की कलाबाज़ी से अधिक, परमेश्वर का वचन स्थिर है।