Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 पतरस 3:11 बाइबल पद की व्याख्या
2 पतरस 3:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तो जब कि ये सब वस्तुएँ, इस रीति से पिघलनेवाली हैं, तो तुम्हें पवित्र चाल चलन और भक्ति में कैसे मनुष्य होना चाहिए,
2 पतरस 3:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 पतरस 3:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 पतरस 1:15 (HINIRV) »
पर जैसा तुम्हारा बुलानेवाला पवित्र है, वैसे ही तुम भी अपने सारे चाल-चलन में पवित्र बनो।

फिलिप्पियों 1:27 (HINIRV) »
केवल इतना करो कि तुम्हारा चाल-चलन मसीह के सुसमाचार के योग्य हो कि चाहे मैं आकर तुम्हें देखूँ, चाहे न भी आऊँ, तुम्हारे विषय में यह सुनूँ कि तुम एक ही आत्मा में स्थिर हो, और एक चित्त होकर सुसमाचार के विश्वास के लिये परिश्रम करते रहते हो।

1 पतरस 2:12 (HINIRV) »
अन्यजातियों में तुम्हारा चाल-चलन भला हो; इसलिए कि जिन-जिन बातों में वे तुम्हें कुकर्मी जानकर बदनाम करते हैं, वे तुम्हारे भले कामों को देखकर उन्हीं के कारण कृपा-दृष्टि के दिन परमेश्वर की महिमा करें। (मत्ती 5:16, तीतु. 2:7-8)
अर्थ का प्रत्यक्ष संकेत
2 पतरस 3:11 कहता है कि जब सब कुछ घटित, पिघलनेवाला नष्ट हो जाएगा, तब हमें पवित्र चाल-चलन और भक्ति में कैसे जीवित रहना चाहिए। यह verse विश्वासियों को व्यावहारिक आचरण के लिए प्रेरित करता है: भक्ति के लक्ष्य के साथ जीवन बिताएं, न कि संसार के तात्कालिक आकर्षणों में फंसे रहें।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पंक्ति पतरस के दूसरे पत्र के अंतर्गत आती है, जहाँ लेखन संसार के अंत और न्याय के दिन के प्रवर्तनों की चर्चा करते हैं। प्रेरित पतरस बताते हैं कि परमेश्वर की मंजिल पर परिवर्तन और पवित्र जीवन के लिए प्रेरणा कहाँ से आती है: वह दिन आना है जब सब कुछ पिघल जाएगा, इसलिए विश्वासियों को अपने आचरण को नवीन बनाये रखना चाहिए।
व्याख्यात्मक बिंदु
इ interpretable observations
इस verse के साथ जुड़ा एक विचार है कि विश्वासियों का आचरण न केवल निजी पवित्रता तक सीमित है, बल्कि विश्वसनीयता और उदाहरण के रूप में जीवनंत प्रतिबिंब बनना है। पवित्र चाल-चलन का तात्पर्य है: ईश्वरीय सिद्धांतों के अनुसार व्यवहार, आत्म-नियंत्रण, धैर्य और करुणा से भरा जीवन।
थीमेटिक सरल सूची
अन्य समानार्थी उद्धरण (क्रॉस-रेफरंस)
प्रति: रोम 12:2 के अनुरूप, जहां विश्व-रेखा से न मिलकर मन में परिवर्तन की माँग है; याकूब 1:27, जो निरन्तर भलाई और पवित्रता के कामों को महत्त्व देता है; मीका 6:8, जो यह बताता है कि ईमानदार, दयालु और नम्र जीवन परमेश्वर की इच्छा है। इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि वास्तविक भक्ति आचरण से प्रकट होती है।
निष्कर्षात्मक Takeaway
यथार्थ जीवन-चर्या बनाये रखना ही सहज एवं आध्यात्मिक तैयारी है। जब संसार की लहरें कम-ज़्यादा घटित होंगी, तब भी हमें पवित्र चाल-चलन और भक्ति बनाए रखना चाहिए—यानी प्रेम, सत्य और तितिक्षा से भरा एक चरित्र, जो परमेश्वर की दृष्टि में सही ठहरता है।
एतिहासिक टीप (एलबर्ट बार्न्स, अडाम क्लार्क के संकेत)
यदि आप कलात्मक ताज़ा दृष्टिकोण चाहें, तो अतीत के प्रसिद्ध टिप्पणीकारों के विचार प्रेरित करते हैं कि पवित्र जीवन का सार अंत के दिन की तैयारी से जुड़ता है: आत्म-नियंत्रण, आस्था-जीवन और ईश्वर-केन्द्रित दृष्टिकोण। उल्लेखित विचारधाराएँ संदर्भ को समृद्ध करते हैं, परन्तु मूल संदेश वही रखा गया है: विश्वासियों को अपने आचरण को विशुद्ध बनाकर जीना चाहिए।
टिप्पणी-नोट्स
यदि आप चाहें, मैं Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के संक्षिप्त उद्धरण (अनुमत-पारिभाषिक) शामिल कर सकता हूँ, बशर्ते उपलब्ध हों और संदर्भ के साथ सहमत हों।