Old Testament
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2 पतरस 3:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
प्रभु अपनी प्रतिज्ञा के विषय में देर नहीं करता*, जैसी देर कितने लोग समझते हैं; पर तुम्हारे विषय में धीरज धरता है, और नहीं चाहता, कि कोई नाश हो; वरन् यह कि सब को मन फिराव का अवसर मिले। (हब. 2:3-4)
2 पतरस 3:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 पतरस 3:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 तीमुथियुस 2:4 (HINIRV) »
जो यह चाहता है, कि सब मनुष्यों का उद्धार हो; और वे सत्य को भली-भाँति पहचान लें। (यहे. 18:23)

रोमियों 2:4 (HINIRV) »
क्या तू उसकी भलाई, और सहनशीलता, और धीरजरूपी धन* को तुच्छ जानता है? और क्या यह नहीं समझता कि परमेश्वर की भलाई तुझे मन फिराव को सिखाती है?

हबक्कूक 2:3 (HINIRV) »
क्योंकि *इस दर्शन की बात नियत समय में पूरी होनेवाली है, वरन् इसके पूरे होने का समय वेग से आता है; इसमें धोखा न होगा। चाहे इसमें विलम्ब भी हो, तो भी उसकी बाट जोहते रहना; क्योंकि वह निश्चय पूरी होगी और उसमें देर न होगी।
सीधा अर्थ
2 पतरस 3:9 का मुख्य आशय यह है कि ईश्वर की देरी मनुष्य की अक्खड़ता या असावधानी का परिणाम नहीं है, बल्कि वह धैर्य से प्रतीक्षा कर रहा है ताकि अधिक से अधिक लोग पश्चाताप कर सकें। परमेश्वर चाहता है कि कोई नाश न हो, परन्तु सबको मन फिराव का अवसर मिले।
प्रसंगिक पृष्ठभूमि
पतरस यह पत्र परलोक के आने और न्याय से जुड़ी शंका के उत्तर में लिख रहा है। कुछ लोग प्रभु की प्रतिज्ञा के विरुद्ध कथ्य कर रहे थे कि वह देर कर रहा है; इसी संदर्भ में लेखक स्पष्ट करता है कि देरी दुष्टों के लिए स्थगन नहीं, बल्कि तारण के लिए अवसर है। पाठ के समीपदान में (कथित विरोधियों के संदेश और परमेश्वर के दिन की प्रतीक्षा) न्याय और धीरज का विरोधाभास प्रस्तुत है।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
1) "देर नहीं करता" — यहाँ देरी को नकारात्मक रूप में नहीं, बल्कि परमेश्वर की समय-स्थिति के संदर्भ में समझाया गया है: वह अपने संपूर्ण उद्देश्य के अनुसार क्रियाशील है।
2) "तुम्हारे विषय में धीरज धरता है" — परमेश्वर की धैर्यता दया-भरी है; वह अपना न्याय स्थगित कर रहा है ताकि लोग अवसर पाकर सचेत हों।
3) "नहीं चाहता कि कोई नाश हो; वरन् यह कि सब को मन फिराव का अवसर मिले" — यह वाक्य ईश्वर की उद्धार-इच्छा और मानवीय स्वतंत्रता के बीच संतुलन दिखाता है: ईश्वर बचाने की इच्छा रखता है, पर मनुष्य का उत्तर आवश्यक है।
थोड़ी भाषा-वैचारिक सूक्ष्मताएँ
संबंधित शास्त्रावलियाँ और उनका संबंध
इब्रानियों 2:3-4 — वहां भी मुक्ति का संदेश और परमेश्वर की सत्यता का स्मरण है; दोनों स्थानों पर उद्धार की गंभीरता और उसकी स्वीकृति की आवश्यक्ता पर बल है।
पोस्टिव संदेश के रूप में रोमियों 2:4 — परमेश्वर की कोमलता, उदारता और धैर्य मनुष्य को पश्चाताप के लिए प्रेरित करती है; यही विषय पतरस में भी देखा जाता है।
मत्ती 24 के कुछ हिस्से — युगान्त और प्रभु के आगमन के संकेतों की चर्चा, जहाँ भी देरी के प्रश्न उठते हैं और जागरूकता की आवश्यकता पर जोर दिया जाता है।
संदर्भीय उद्धरण (सारगर्भित)
मैथ्यू हेनरी का संक्षेप-नोट यह रेखांकित करता है कि परमेश्वर की देरी अनुग्रह का अवसर है और न कि चिन्ह-भ्रष्टता; (यहाँ पाठ से सीधे उद्धरण नहीं दिया गया)।
अल्बर्ट बार्न्स ने टिपण्णी में ध्यान दिलाया है कि पतरस का उद्देश्य विश्वासियों को अपार आशा और धैर्य से संभालना है; (सीधे वाक्यांश नहीं)।
व्यवहारिक शिक्षा
1) ईश्वर की प्रतीक्षा को नरोध मानना छोड़ दें; उसकी देरी को अवसर समझें—ये हमारे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन के लिए आमंत्रण है।
2) दया और न्याय के बीच सामंजस्य को अपनाएँ: परमेश्वर की अपेक्षा है कि हम भी दूसरों के प्रति धैर्य और उद्धारकारी प्रेम दिखायें।
3) सक्रिय रूप से पश्चाताप और परिर्वतन की प्रेरणा लें; देरी का अर्थ स्थगन नहीं, अवसर है।
समेकित निष्कर्ष
2 पतरस 3:9 हमें चेतावनी देता है कि प्रभु की देरी हमारे हित के विरुद्ध नहीं है, बल्कि वह सबको पश्चाताप का आवास देने के लिए धैर्य रखता है। यह शास्त्र हमें न केवल परमेश्वर की दया को समझने की प्रेरणा देता है, बल्कि हमें भी उसी दयालुता और सक्रिय परिवर्तन की राह पर चलने का आग्रह करता है।