रोमियों 2:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्या तू उसकी भलाई, और सहनशीलता, और धीरजरूपी धन* को तुच्छ जानता है? और क्या यह नहीं समझता कि परमेश्‍वर की भलाई तुझे मन फिराव को सिखाती है?

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रोमियों 2:4 पद-दर-पद बाइबल टीका

रोमियों 2:4 पर एक सहज समझ

यह पद रोमियों पत्र में पाप के असली संकेतों और आत्म-निष्ठा के परिणामों की चर्चा के क्रम में आता है। प्रेरित पौलुस यह स्पष्ट करते हैं कि परमेश्वर की दयालुता, सहनशीलता और धीरज न केवल मनुष्य के जीवन में स्थिरता भरते हैं, बल्कि यह हमारा तिरस्कार नहीं, बल्कि repentance का कारण बनती है। भलाई की यह प्रकृति ईश्वर के आशीर्वचनों के माध्यम से हमारे मन में परिवर्तन का संकेत है, न कि केवल external कानून-पालन का औचित्य बन जाना चाहिए।

मुख्य विचार

पौलुस यहां यह पूछते हैं कि क्या आप equivalently समझते हैं कि परमेश्वर की भलाई तुझे मन फिराव को सिखाती है? यह verse यह दिखाता है कि ईमान का ठोस परिवर्तन तब होता है जब मन ईश्वर की दयालुता के कारण जीवित रहता है, न कि केवल कानून-पालन से। यदि भलाई और धीरज आपके भीतर नहीं बदलते, तो यह संकेत है कि आपका हृदय अभी तक पथभ्रष्ट है।

मुख्य विषय

  • ईश्वर की भलाई का प्रभव: भलाई से नहीं, परिवर्तन से शक्ति मिलती है; यह मन को पलट कर देता है।
  • धैर्य और सहनशीलता: कठिन परिस्थितियों में ईश्वर के धीरज के साथ व्यवहार करना सीखना है, जो आत्म-न्याय और गरिमा को बढ़ाते हैं।
  • परिवर्तन का उद्देश्य: केवल दंड से बचना नहीं, वरन् मन बदलना—तसल्ली और पवित्रता की दिशा में प्रेरित होना।

प्रमुख cross-references (संकर्ष)

  • रोमियों 12:2 — “तथा इस संसार के अनुसार ढल मत जाओ, बल्कि परिवर्तन को अपने मन में नये मानदंड से करो।” यह दर्शाता है कि परिवर्तन मन की रीढ़ की हड्डी है, न कि बाहरी नियमों के बाहर results.
  • गलातियों 5:22-23 — फल-प्रफुल्ल; प्रेम, खुशी, शांति आदि, जो आत्मा के प्रभाव से निकलते हैं।
  • याकूब 2:20 — “क्या तू ऐसे अंधे है कि विश्‍वास के बिना deeds भी नहीं होते?” यह बताता है कि विश्वास और क्रिया साथ चलते हैं।

व्यावहारिक अनुप्रयोग

जीवन में जब आप कठिन परिस्थितियों से गुजरें, तो भलाई की दिव्य धारा को तौलना न छोड़ें। अगर आपके भीतर धीरज नहीं बढ़ रहा, तो आत्म-साक्षात्कार करें कि क्या आप ईश्वर के प्रेम के द्वारा परिवर्तन को स्वीकार कर रहे हैं। प्रार्थना और स्मरण-आचरण से प्रेरित व्यवहार, दूसरों के लिए दया और संयम, आपके मन को फिर से जीने की दिशा देता है।

संक्षिप्त समरी

रोमियों 2:4 ईश्वर की दया के प्रभाव पर जोर देता है—भलाई, सहनशीलता और धीरज उसी व्यक्ति के भीतर उत्पन्न होने चाहिए जो मन फिराव के द्वारा वास्तविक परिवर्तन को स्वीकार करे। यह verse स्पष्ट करता है कि ईमानदारी का प्रमाण न सिर्फ कानून का पालन है, बल्कि ईश्वर की दयालुता से प्रेरित नया जीवन है।

नोट: नीचे के उद्धरण महान देह-चर्चों से मिलते-जुलते विचार को संक्षेप में जोड़ते हैं, ताकि पाठक को यह समझ में आए कि परिवर्तन कैसे होता है।

Matthew Henry का संकेत: “God’s kindness leads you to repentance.” (संक्षेप सार)

Albert Barnes का संकेत: भलाई के प्रभाव से अन्तःकरण में परिवर्तन होता है, न कि केवल कर्तव्य-पालन।

Adam Clarke का संकेत: परमेश्वर की सहनशीलता और धीरज मनुष्य के हृदय को खोलते हैं, ताकि वह उद्धार-परिवर्तन को स्वीकार करे।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

रोमियों 2:4 समानांतर पद और संबंधित वचन

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2 पतरस 3:9 (HINIRV) »
प्रभु अपनी प्रतिज्ञा के विषय में देर नहीं करता*, जैसी देर कितने लोग समझते हैं; पर तुम्हारे विषय में धीरज धरता है, और नहीं चाहता, कि कोई नाश हो; वरन् यह कि सब को मन फिराव का अवसर मिले। (हब. 2:3-4)

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रोमियों 9:22 (HINIRV) »
कि परमेश्‍वर ने अपना क्रोध दिखाने और अपनी सामर्थ्य प्रगट करने की इच्छा से क्रोध के बरतनों की, जो विनाश के लिये तैयार किए गए थे बड़े धीरज से सही। (नीति. 16:4)

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यशायाह 30:18 (HINIRV) »
तो भी यहोवा इसलिए विलम्ब करता है कि तुम पर अनुग्रह करे, और इसलिए ऊँचे उठेगा कि तुम पर दया करे। क्योंकि यहोवा न्यायी परमेश्‍वर है; क्या ही धन्य हैं वे जो उस पर आशा लगाए रहते हैं*।

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