Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 2:1 रोमियों 2:2 रोमियों 2:3 रोमियों 2:4 रोमियों 2:5 रोमियों 2:6 रोमियों 2:7 रोमियों 2:8 रोमियों 2:9 रोमियों 2:10 रोमियों 2:11 रोमियों 2:12 रोमियों 2:13 रोमियों 2:14 रोमियों 2:15 रोमियों 2:16 रोमियों 2:17 रोमियों 2:18 रोमियों 2:19 रोमियों 2:20 रोमियों 2:21 रोमियों 2:22 रोमियों 2:23 रोमियों 2:24 रोमियों 2:25 रोमियों 2:26 रोमियों 2:27 रोमियों 2:28 रोमियों 2:29



रोमियों 2:4 पर एक सहज समझ
यह पद रोमियों पत्र में पाप के असली संकेतों और आत्म-निष्ठा के परिणामों की चर्चा के क्रम में आता है। प्रेरित पौलुस यह स्पष्ट करते हैं कि परमेश्वर की दयालुता, सहनशीलता और धीरज न केवल मनुष्य के जीवन में स्थिरता भरते हैं, बल्कि यह हमारा तिरस्कार नहीं, बल्कि repentance का कारण बनती है। भलाई की यह प्रकृति ईश्वर के आशीर्वचनों के माध्यम से हमारे मन में परिवर्तन का संकेत है, न कि केवल external कानून-पालन का औचित्य बन जाना चाहिए।
मुख्य विचार
पौलुस यहां यह पूछते हैं कि क्या आप equivalently समझते हैं कि परमेश्वर की भलाई तुझे मन फिराव को सिखाती है? यह verse यह दिखाता है कि ईमान का ठोस परिवर्तन तब होता है जब मन ईश्वर की दयालुता के कारण जीवित रहता है, न कि केवल कानून-पालन से। यदि भलाई और धीरज आपके भीतर नहीं बदलते, तो यह संकेत है कि आपका हृदय अभी तक पथभ्रष्ट है।
मुख्य विषय
प्रमुख cross-references (संकर्ष)
व्यावहारिक अनुप्रयोग
जीवन में जब आप कठिन परिस्थितियों से गुजरें, तो भलाई की दिव्य धारा को तौलना न छोड़ें। अगर आपके भीतर धीरज नहीं बढ़ रहा, तो आत्म-साक्षात्कार करें कि क्या आप ईश्वर के प्रेम के द्वारा परिवर्तन को स्वीकार कर रहे हैं। प्रार्थना और स्मरण-आचरण से प्रेरित व्यवहार, दूसरों के लिए दया और संयम, आपके मन को फिर से जीने की दिशा देता है।
संक्षिप्त समरी
रोमियों 2:4 ईश्वर की दया के प्रभाव पर जोर देता है—भलाई, सहनशीलता और धीरज उसी व्यक्ति के भीतर उत्पन्न होने चाहिए जो मन फिराव के द्वारा वास्तविक परिवर्तन को स्वीकार करे। यह verse स्पष्ट करता है कि ईमानदारी का प्रमाण न सिर्फ कानून का पालन है, बल्कि ईश्वर की दयालुता से प्रेरित नया जीवन है।
नोट: नीचे के उद्धरण महान देह-चर्चों से मिलते-जुलते विचार को संक्षेप में जोड़ते हैं, ताकि पाठक को यह समझ में आए कि परिवर्तन कैसे होता है।
Matthew Henry का संकेत: “God’s kindness leads you to repentance.” (संक्षेप सार)
Albert Barnes का संकेत: भलाई के प्रभाव से अन्तःकरण में परिवर्तन होता है, न कि केवल कर्तव्य-पालन।
Adam Clarke का संकेत: परमेश्वर की सहनशीलता और धीरज मनुष्य के हृदय को खोलते हैं, ताकि वह उद्धार-परिवर्तन को स्वीकार करे।