Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 2:1 रोमियों 2:2 रोमियों 2:3 रोमियों 2:4 रोमियों 2:5 रोमियों 2:6 रोमियों 2:7 रोमियों 2:8 रोमियों 2:9 रोमियों 2:10 रोमियों 2:11 रोमियों 2:12 रोमियों 2:13 रोमियों 2:14 रोमियों 2:15 रोमियों 2:16 रोमियों 2:17 रोमियों 2:18 रोमियों 2:19 रोमियों 2:20 रोमियों 2:21 रोमियों 2:22 रोमियों 2:23 रोमियों 2:24 रोमियों 2:25 रोमियों 2:26 रोमियों 2:27 रोमियों 2:28 रोमियों 2:29



पद्य का तत्काल संदर्भ
रोमियों 2:21 पौलुस की बड़ी बात का एक विशिष्ट तर्कांश है। रोमियों का सन्देश यह दिखाता है कि यहूदियों के पास विधि (लीखित नियम) होने पर भी यदि वे अपने व्यवहार से विधि का उल्लंघन करते हैं तो वे कोई विशेष लाभ नहीं रखते। यह पद विशेषकर उन लोगों की ओर इशारा करता है जो दूसरों को नियम पढ़ाते या विनियम सिखाते हैं पर स्वयं उन नियमों का पालन नहीं करते। मत्ती 23:3 में भी इसी विरोधाभास पर ध्यान आकृष्ट किया गया है—जो लोग उपदेश देते हैं पर अपने कर्मों से वही नहीं दिखाते।
यह पद परमेश्वर और विश्वास के बारे में क्या बताता है
यहां मुख्य संदेश न्याय और दायित्व की सार्वभौमिकता है। परमेश्वर की न्यायव्यवस्था बाहरी पहचान या औपचारिक ज्ञान से नहीं चलती, बल्कि उपदेश देने वालों और सुनने वालों दोनों की जिम्मेदारी की ओर देखती है। जो कोई सत्य का उपदेश देता है पर अनुपयुक्त जीवन जीता है, वह अपने श्रोताओं के लिए भ्रम और झूठ का कारण बनता है। सच्चा धर्म ज्ञान और आचरण दोनों का मेल मांगता है; धार्मिक वचन का अधिकार केवल तभी बना रहता है जब उसका प्रमाण जीवन में दिखे।
महत्वपूर्ण शब्द और रूपक
“सिखाता है” — न केवल बुध्धि-ज्ञान देना, बल्कि व्यवहार और नैतिकता आकार देना।
“चोरी न करने का उपदेश” — विशिष्ट उदाहरण के रूप में लिया गया है; पौलुस यहाँ सामान्य सिद्धान्त दिखाने के लिए एक रोजमर्रा का अपराध चुनते हैं। यह उदाहरण क्लासिकल है: छोटे-छोटे अनुष्ठानिक नियमों से लेकर नैतिक जीवन के बड़े मामलों तक, उपदेश और अभ्यास का सामंजस्य आवश्यक है।
संबंधित शास्त्रपदे और उनकी व्याख्या
पुरानी टिप्पणियों से युक्त सारांश (संक्षेप में संदर्भ)
मैथ्यू हेनरी की शैली में विचार करें तो वे इस प्रकार के पद पर लोगों की द्रुत-निन्दा के स्थान पर आत्म-परीक्षण पर बल देते थे। अल्बर्ट बार्न्स ने ऐसे वचनों में लेखों के सामाजिक प्रभाव और व्यक्तिगत नैतिकता के मेल पर प्रकाश डाला। एडम क्लार्क ने कानून और धर्म के बीच के सम्बन्ध तथा उस समय की यहूदी-रिस्पॉन्सिव संस्कृति की पृष्ठभूमि समझाने में मदद की। (इन टिप्पणीकारों के किसी एक वाक्य का सटीक उद्धरण यहाँ सम्मिलित नहीं किया गया है।)
आधुनिक जीवन के लिए उपयुक्ति
आज भी यह पद नेताओं, शिक्षकों, पादरियों, माता-पिता और सभी व्यक्तियों के लिये महत्वपूर्ण है। कुछ व्यावहारिक बिंदु:
निष्कर्षतः रोमियों 2:21 हमें याद दिलाता है कि धार्मिक अधिकारों या उपदेशों का मूल्य तभी है जब वे जीवन में जायज़ रूप से परिलक्षित हों। जो दूसरों को सही मार्ग दिखाता है, उसे स्वयं उस मार्ग पर चलने का बोझ और प्रमाण भी होना चाहिए।