मत्ती 23:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

इसलिए वे तुम से जो कुछ कहें वह करना, और मानना, परन्तु उनके जैसा काम मत करना; क्योंकि वे कहते तो हैं पर करते नहीं।

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मत्ती 23:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

मत्ती 23:3 का व्याख्या: उनके कहने और उनके कर्म की वास्तविक दूरी

मुख्य बिंदु: यीशु यहाँ कानून-निष्ठ परामर्श देते हैं कि अनुयायी वही करें जो वे कहते हैं, परन्तु उनके उदाहरण से सावधान रहें कि वे व्यवहार में कितना भिन्न हैं। यह पद स्पष्ट करता है कि धार्मिक शिक्षा और पवित्र विनय का प्रभाव तब है जब आज्ञाओं के अनुसार आचरण किया जाए, न कि केवल शब्दों से धार्मिकता प्रदर्शित की जाए।

साहित्यिक संदर्भ (लिटरेरी कंटेक्स्ट)

मत्ती 23 अध्याय में यीशु फरीसियों के आधिकारिक, दिखावटी धर्म की कठोर आलोचना करते हैं। वे तथाकथित धार्मिक नेताओं के बोल-चाल और उनके कथनों के अनुरूप जीवन जीने के बीच असंगतता दिखाते हैं। Verse 3 विशेषकर तब उद्धृत है जब यीशु चैलेंज कर रहे हैं कि शास्त्र के अनुसार सतहों पर प्रस्तुत की गई शिक्षाओं को सुनना तथा मानना चाहिए, परन्तु उनके व्यवहार से प्रेरणा न लेनी चाहिए यदि वह व्यवहार ईमानदार नहीं है।

धर्मशास्त्रीय महत्व

इस वाक्य में दो पक्ष स्पष्ट होते हैं: 1) पाठक को प्रेरित करना कि वे ईमानदारी से पालन करें, 2) गलत पाखंड से सावधान रहना। यह नियम नई व्यवस्था के दौरान व्यवहार-आचार के महत्व पर जोर देता है—कि परमेश्वर के नियमों की समानता और सच्चे दिल की भक्ति का मूल्य है, न कि केवल धार्मिक भाषण और मंचीय प्रस्तुतियाँ।

कौन से बिंदु धर्मग्रंथों के साथ सम्बद्ध होते हैं

संस्करण-घटना में नीचे दिए प्रमुख क्रॉस-रेफरेंसेस इस विचार को पुष्ट करती हैं:

  • लैव्यवस्था 19:37 तुलना में व्यवहार की सच्चाई अधिक महत्त्वपूर्ण है—जो कहा जाता है, वह किया जाए।
  • यूहन्ना 13:17—जो तुम्हें आज्ञा दी गई है, उसे करते हुए आशीष पाओ; केवल शब्द नहीं, कर्म भी साथ हों।
  • याकूब 1:22—कहने वालों के लिए है कि वे कर्म के साथ हों, वरना वे धार्मिकता न होकर अधूरी रहेगी।

इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि विश्वास में कर्म की भूमिका, और पाखंड से बचना, नयी वचा की सामान्य मार्गदर्शिका है।

विचार-आधारित प्रश्न

  1. जब आप किसी से कुछ कहते हैं, तो क्या आपका जीवन वही दिखाता है? क्या कार्यों में शब्दों की सच्ची प्रतिरूपता है?
  2. क्या आप अपने धार्मिक आचरण और दैनंदिन व्यवहार में संतुलन बनाए रखते हैं, ताकि दूसरों के लिए एक विश्वसनीय प्रतिमा बने?
  3. पाखंड के खतरे से कैसे बचें? क्या आप अपने उद्देश्य को व्यक्तिगत मान्यताओं और व्यवहार के अनुरूप सत्यापित करते हैं?

संक्षिप्त निष्कर्ष

येशु का संदेश स्पष्ट है: धार्मिक शिक्षा और आचरण में विराम नहीं होना चाहिए। वे लोग जो कहते हैं कुछ और करते हैं, वे दूसरों को मार्गदर्शित नहीं कर सकते जबतक उनका जीवन उनके वचनों के अनुरूप न हो। ईमानदार आचरण, विवेकपूर्ण नैतिकता और कर्म-आधारित भक्ति ही सच्चे विश्वास की पहचान हैं।

अनुदिश संदर्भ

यानी यह दृढ़ करता है कि हर चेतावनी और मार्गदर्शन, ताकि प्रार्थना, नीति और धार्मिक उत्सव जीवंत रहे, सिर्फ शब्द न हों बल्कि जीवन्त उदाहरण भी हों।

संक्षिप्त उद्धरण (मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बर्न्स, एडम क्लार्क)

यदि उपलब्ध हों, वे सीधे उद्धरण संकेत: “वे कहते तो हैं पर करते नहीं।” (संदर्भ लेखन में पूरा उद्धरण नहीं दिया गया है; अन्य टिप्पणीकारों के तात्पर्य में यह विचार सामान्य है कि पाखंड पर सावधान रहने को कहा गया है।)

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 23:3 समानांतर पद और संबंधित वचन

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