तीतुस 1:16 बाइबल पद की व्याख्या
तीतुस 1:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वे कहते हैं, कि हम परमेश्वर को जानते हैं पर अपने कामों से उसका इन्कार करते हैं*, क्योंकि वे घृणित और आज्ञा न माननेवाले हैं और किसी अच्छे काम के योग्य नहीं।
तीतुस 1:16 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
तीतुस 1:16 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 यूहन्ना 2:4 (HINIRV) »
जो कोई यह कहता है, “मैं उसे जान गया हूँ,” और उसकी आज्ञाओं को नहीं मानता, वह झूठा है; और उसमें सत्य नहीं।

यशायाह 29:13 (HINIRV) »
प्रभु ने कहा, “ये लोग जो मुँह से मेरा आदर करते हुए समीप आते परन्तु अपना मन मुझसे दूर रखते हैं, और जो केवल मनुष्यों की आज्ञा सुन सुनकर मेरा भय मानते हैं, (मत्ती 15:8,9, मर. 7:6,7)

यहेजकेल 33:31 (HINIRV) »
वे प्रजा के समान तेरे पास आते और मेरी प्रजा बनकर तेरे सामने बैठकर तेरे वचन सुनते हैं, परन्तु वे उन पर चलते नहीं; मुँह से तो वे बहुत प्रेम दिखाते हैं, परन्तु उनका मन लालच ही में लगा रहता है।
तीतुस 1:16 का अर्थ
इस आयत में प्रेरित पॉल स्पष्ट कर रहे हैं कि वास्तविक विश्वास केवल शब्दों तक सीमित नहीं होता; इसका मोल तब दिखता है जब कर्म उनसे मेल खाते हैं। ईश्वर को मानना तभी प्रमाणित होता है जब जीवन में उसकी इच्छा के अनुरूप आचरण हो — अन्यथा प्रकट अपराध और विरोधाभास स्पष्ट हो जाते हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
तीतुस पत्रियां कालानुरूप गिरिजाघर के स्थायी नेतृत्व और नैतिकता के अध्ययन के लिए लिखी गईं। यीशु-विश्वास के साथ व्यवहारिक जीवन का मेल एक प्रमुख विषय है। यह आयत खास तौर पर शिक्षा के लक्ष्य, झूठे ज्ञानी-भक्तों की पहचान और पवित्र जीवन देने की मांग पर बल देता है।
व्याख्यात्मक निष्कर्ष
कथा-सार और क्रॉस-रेफरेंसेस
यह विचार पुराने नियम की सार-धारणा से जुड़ता है— अहंकारपूर्ण ज्ञान के पीछे प्रमाणित परिवर्तन का अभाव। नीचे दिए गया छोटा संदर्भ तात्पर्य को मजबूत करते हैं:
पुनरावर्तन और उद्धार का संदेश
यथार्थ विश्वास उन लोगों के लिए है जो परमेश्वर को अपने जीवन के हर पहलू में मानते हैं—बोझ, लोभ, और अन्य गलत प्रवृत्तियों से दूर रहते हैं। यह आयत चेतावनी भी देती है कि केवल धार्मिक बोलचाल से मर्यादित जीवन नहीं बनता; प्रभावी परिवर्तन आवश्यक है।
संक्षिप्त व्यवहारिक takeaway
उद्धरण के संकेत
नीचे के कुछ पहचाने जाने योग्य टिप्पणीकारों के विचार संक्षेप में मिलते हैं, जिनसे इस पाठ की दिशा स्पष्ट होती है:
Matthew Henry, Adam Clarke, Albert Barnes तथा अन्य सार्वजनिक डोमेन टीका-लेखकों के विचारों के संकेत नीचे समाहित हैं; खास उद्धरण यदि उपलब्ध हों तो सीधे संकलन में नहीं, बल्कि भावना के अनुसार समाहित किया गया है।
याद रहे: यदि शब्द-जाल में जैसे-के-तैसे विश्वास न हो सके, तो ईश्वर के साथ वास्तविक संबंध और व्यवहार का पुनर्मूल्यांकन आवश्यक है।