तीतुस 1:13 बाइबल पद की व्याख्या
तीतुस 1:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यह गवाही सच है, इसलिए उन्हें कड़ाई से चेतावनी दिया कर, कि वे विश्वास में पक्के हो जाएँ।
तीतुस 1:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
तीतुस 1:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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तीतुस 2:2 (HINIRV) »
अर्थात् वृद्ध पुरुष सचेत और गम्भीर और संयमी हों, और उनका विश्वास और प्रेम और धीरज पक्का हो।

तीतुस 2:15 (HINIRV) »
पूरे अधिकार के साथ ये बातें कह और समझा और सिखाता रह। कोई तुझे तुच्छ न जानने पाए।

तीतुस 1:13 का संदर्भ और उद्देश्य
पदगत संदर्भ में पॉल तीतुस को यीशुई मसीह के अध्यवसाय के लिए नियुक्त प्रेरित बनाते हैं। चर्च में तौहीन-भरे आचरण, ढंग-ढाल, और शिक्षकों की कसौटी परखी जाती है। इस पंक्ति में प्रेरित पॉल बतलाते हैं कि गलत कामों और अपवित्र जीवनशैली के अपराधी भी शुद्ध आचरण और सत्य शिक्षा से सुधरे जा सकते हैं जब warnings दी जाएँ। यह स्पष्ट करता है कि सत्य की गवाही को कठोरता से स्वीकारना आवश्यक है ताकि विश्वास मजबूत हो और विश्वास के साथ जीवन भी पवित्र बने।
मुख्य अर्थ
यह वाक्य दो भागों में स्पष्ट होता है: 1) गवाही सच है — यह उत्कृष्टता और स्पष्टता के साथ कहा गया है कि उनकी शिक्षा और चेतावनी सही और आवश्यक है, 2) इसलिए उन्हें कठोर चेतावनी दी जाए ताकि वे विश्वास में दृढ़ रहें। इन्होंने असत्य-आचरण या अविश्वास को रोक कर, सत्य और दृढ़ विश्वास के अनुरूप जीवन जीने के लिए प्रेरित किया है।
दो मुख्य थीम
सूत्र-पत्र और ऐतिहासिक संदर्भ
यह शास्त्र पॉल के प्रेरित-उपदेश का हिस्सा है जहाँ वे_titus_ को क्रमशः ‘कड़ाई से चेतावनी’ देकर विवेकशील और पवित्र जीवन की प्रेरणा देते हैं। प्रेरित पॉल के लेखों में_warning_ का उद्देश्य न पुरुषोचित दमन है न हिंसा, बल्कि संगठन के संस्थागत ढांचे में सत्य और पवित्र जीवन का पालन सुनिश्चित करना है।
किए जाने वाले प्रमुख विचार
ताकि समुदाय में विश्वास गहराए और आचरण से सत्य उजागर हो, शिक्षकों को चाहिए कि वे बनें उदाहरण—कड़ाई से चेतावनी देने के साथ प्रेमपूर्ण मार्गदर्शन भी दें।
क्रॉस-रेफरेंस (संयुक्त विचार)
व्यावहारिक विचार
यदि आप माँगते हैं कि विश्वास में दृढ़ रहें, तो अपने जीवन में पवित्रता के मानदंड स्थापित करें: प्राथना, पवित्र शास्त्र-चिन्ता, और ईश्वर के क्रोध से खेद प्रकट करने की आदत। शिक्षकों के लिए यह विचार कि वे स्पष्ट बातें कहें, परवाह के साथ प्रोत्साहन भी दें।
निष्कर्ष (संक्षेप)
तीतुस 1:13 हमें याद दिलाता है कि सत्य की गवाही कठोर हो सकती है, पर उसका उद्देश्य विश्वास को पुख्ता करना और जीवन को पवित्र बनाना है। शिक्षकों को सतर्क और स्पष्ट होना चाहिए ताकि चर्च में सत्य का प्रकाश न डूबे।
नोट: इस पद के व्याख्यात्मक सार में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणी-उद्धरणों से चयनित विचारों का समन्वय किया गया है। आवश्यक शब्द-चिह्नित उद्धरण नीचे उद्धृत हैं यदि उपलब्ध हों:
उद्धरण स्मृति: “यह गवाही सच है…” — यह विचार उनके तर्क का मूल ध्वन्यात्मक भाग है जिसे समकालीन हिंदी पाठकों के लिए अनुवादित किया गया है; पूर्ण उद्धरण के बजाय, संदर्भ-जनक पाठ में प्रयुक्त विचार के रूप में प्रस्तुत है।