तीतुस 1:11 बाइबल पद की व्याख्या
तीतुस 1:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इनका मुँह बन्द करना चाहिए: ये लोग नीच कमाई के लिये अनुचित बातें सिखाकर घर के घर बिगाड़ देते हैं।
तीतुस 1:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
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तीतुस 1:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 तीमुथियुस 3:6 (HINIRV) »
इन्हीं में से वे लोग हैं, जो घरों में दबे पाँव घुस आते हैं और उन दुर्बल स्त्रियों को वश में कर लेते हैं, जो पापों से दबी और हर प्रकार की अभिलाषाओं के वश में हैं।

रोमियों 3:19 (HINIRV) »
हम जानते हैं, कि व्यवस्था जो कुछ कहती है उन्हीं से कहती है, जो व्यवस्था के अधीन हैं इसलिए कि हर एक मुँह बन्द किया जाए, और सारा संसार परमेश्वर के दण्ड के योग्य ठहरे।

1 तीमुथियुस 6:5 (HINIRV) »
और उन मनुष्यों में व्यर्थ रगड़े-झगड़े उत्पन्न होते हैं, जिनकी बुद्धि बिगड़ गई है और वे सत्य से विहीन हो गए हैं, जो समझते हैं कि भक्ति लाभ का द्वार है।
तीतुस 1:11 पर टिप्पणी (HINIRV)
पॉल ने तीतुस के पास यह निर्देश दी है कि काँटेदार प्रवृत्ति वाले अनुयायियों के खिलाफ कसकर कदम उठाए जाएँ, ताकि समस्या स्थलस्थ हो। इस पद में बतलाया गया है कि ऐसे लोग “नीच कमाई के लिये अनुचित बातें सिखाकर घर के घर बिगाड़ देते हैं” — अर्थात वे स्वार्थी लाभ के लिए न केवल गलत शिक्षा देते हैं, बल्कि समाज में ग़लत धारणा बनाकर परिवार-परिवार और समुदाय के सामान्य जीवन को नुकसान पहुँचाते हैं। स्थिति यह है कि ऐसी शिक्षाओं के कारण विश्वासयोग्य व्यक्ति और मण्डली भीतर असंतोष, भ्रम और बुरे परिणामों से जूझती है।
मुख्य अर्थ
यह संदेश दो बार कहता है कि ऐसे प्रचारकों को रोकना आवश्यक है, ताकि वे प्रचारित कर उन्हीं के स्वार्थ के कारण विश्वासघात और नैतिक हानि पैदा न करें। प्रेरित-उद्धार के संकेतों को बनाए रखना और सत्य की मर्यादा से हटकर होने वाले शिक्षण पर विराम लगाना एक समुदाय की जिम्मेदारी है।
दो-तीन प्रमुख विषय
अन्य सन्दर्भ सहयोगी विचार
यहे विचार अन्य साक्ष्यों से सम्बद्ध करते हैं जिनमें धार्मिक आचार-विधि और परिवार-संरचना पर ध्यान दिया गया है। उदाहरण के लिए, आसपास के शिक्षणों के स्पष्ट प्रमाण और चरित्र-निर्भरता की आवश्यकता पर बल देना है ताकि अनुयायी गलत संदेशों से बच सकें।
व्यावहारिक अनुसंधान
एक कबूला-सा कदम यह है कि कमियों को साफ़-साफ़ पहचानना और नए शिक्षणों की जाँच करना; अगर शिक्षा व्यक्तिगत लाभ के लिए हो और समुदाय के हित के विरुद्ध जाए, तो उसे संबोधित करना चाहिए। साथ ही, शिष्टाचार, ईमानदारी और स्पष्टता के साथ चर्चाओं को चलाना चाहिए ताकि भ्रम न बने और भरोसा बना रहे।
क्रॉस-रेफरेंसे
यही विचार पवित्र शास्त्र के अन्य हिस्सों से भी जुड़ते हैं: - तीतुस 3:10: कड़वे-व्यक्तियों के साथ चट्टान-जैसी स्पष्टता से व्यवहार करना, ताकि शुद्धता बनी रहे। - 1 तीमुथियुस 5:13: बिना वजह बहस और अयुक्त प्रचारों से बचना।
संक्षेप
तीतुस 1:11 कहता है कि ऐसे प्रचारकों को रोकना आवश्यक है, जो स्वार्थ के लिये अनुचित शिक्षाएं देकर घर-घर को नुकसान पहुँचाते हैं। यह पाठ समुदाय की शुद्धता और विश्वास की सुरक्षा के लिए सक्रिय discernment और अनुशासन की पुकार है।