तीतुस 1:15 बाइबल पद की व्याख्या
तीतुस 1:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
शुद्ध लोगों के लिये सब वस्तुएँ शुद्ध हैं, पर अशुद्ध और अविश्वासियों के लिये कुछ भी शुद्ध नहीं वरन् उनकी बुद्धि और विवेक दोनों अशुद्ध हैं।
तीतुस 1:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
तीतुस 1:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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रोमियों 14:14 (HINIRV) »
मैं जानता हूँ, और प्रभु यीशु से मुझे निश्चय हुआ है, कि कोई वस्तु अपने आप से अशुद्ध नहीं, परन्तु जो उसको अशुद्ध समझता है, उसके लिये अशुद्ध है।

रोमियों 14:20 (HINIRV) »
भोजन के लिये परमेश्वर का काम* न बिगाड़; सब कुछ शुद्ध तो है, परन्तु उस मनुष्य के लिये बुरा है, जिसको उसके भोजन करने से ठोकर लगती है।

1 कुरिन्थियों 10:23 (HINIRV) »
सब वस्तुएँ मेरे लिये उचित तो हैं, परन्तु सब लाभ की नहीं। सब वस्तुएँ मेरे लिये उचित तो हैं, परन्तु सब वस्तुओं से उन्नति नहीं।
तीतुस 1:15 का संदर्भ और अर्थ
तीतुस 1:15 में पौलूस स्पष्ट करते हैं कि जो लोग सत्य-धर्म के अनुरूप शुद्धता-मान्यताएं मानते हैं, उनके लिए सब वस्तुएँ शुद्ध मानी जाती हैं; पर जो अशुद्ध और अविश्वासी हैं, उनके लिए कुछ भी véritable शुद्ध नहीं माना जाता। यहाँ शुद्धता से उद्देश्य है अंतःकरण की स्थिरता और ईश्वर के साथ पूर्ण समर्पण। इस पद में इच्छा-शुद्धि के साथ विवेक और विचार-शुद्धि का बराबर महत्त्व उभरकर आता है—उनकी बुद्धि और विवेक अशुद्ध हैं क्योंकि वे परम शास्त्र के आलोक से नहीं चलते।
मुख्य भाव: अध्यवसाय और विवेक की शुद्धता
इस वाक्य में “शुद्ध लोग” वे हैं जो ईश्वर के सामने सचेत, निर्मल और विश्वास में दृढ़ रहते हैं। उनपर बाहरी नियमों से अधिक आंतरिक परिवर्तन का प्रभाव होता है। अशुद्ध और अविश्वासी व्यक्ति निर्णय में सत्य-आधार नहीं लेते, इसलिए उनकी हर चीज पर भी शुद्धता एक अस्पष्टता बनी रहती है। यह केवल नियमों की कठोरতা नहीं—बल्कि दिल की ठहराव, ईश्वर के प्रति अनुग्रह-पूर्ण निष्ठा और संवेदनशील विवेक का परिणाम है।
तीन प्रमुख विषय
संबद्ध पदावली और संदर्भ
कई पवित्र ग्रंथों में आंतरिक शुद्धता और विचार-शुद्धि पर बल दिया गया है। उदाहरण के लिए: बाइबल के अन्य हिस्सों में सत्य-विश्वास का व्यवहारिक आचरण स्पष्ट है—जो दिल से माना जाता है, वह कर्मों में झाँकता है।
व्यावहारिक चिंतन
हम जीवन के निर्णयों में यह देखना चाहेंगे कि क्या हमारा आचरण ईश्वर की इच्छाओं के अनुरूप है। यदि हमारा मन सत्य के प्रकाश में है, तो हम कठिन समय में भी स्पष्ट और शुद्ध निर्णय ले पाते हैं। साथ ही, विवेक का प्रश्न यह है कि क्या हम परिस्थितियों में भी परम सत्य के अनुरूप सोचते और बोलते हैं।
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनका संक्षिप्त स्पष्टीकरण
1) रोम 12:2—कहता है कि विचारों को इस दुनिया के ढांचे से न ढालें, बल्कि नये मन के द्वारा परिवर्तन पाएं। इसका अर्थ है कि शुद्धता अंतःकरण से आती है, न कि मात्र सामाजिक मानदंडों से।
2) Heb 10:22—दिल की साफ़-सी धोकर आस्था के साथ विश्वासी बनना, ताकि आत्मा-संपूर्णता बनी रहे। यह विचार-शुद्धि से जुड़ता है।
3) 2 कोरिंथ 5:17—नई सृजना का जन्म आंतरिक परिवर्तन से होता है; पुराने विचार और व्यवहार परिवर्तन के साथ नए जीवन की शुरुआत होती है।
संक्षिप्त समापन
तीतुस 1:15 एक प्रशिक्षित दृष्टिकोण देता है: यदि हृदय शुद्ध हो, तो परम सत्य का प्रकाश हर चीज को पवित्र समझने की क्षमता देता है; अन्यथा बुद्धि और विवेक अशुद्ध रहते हैं। यह ईमानदारी का आह्वान है—दिल और दिमाग दोनों को परमेश्वर के प्रकाश के अधीन रखना।
आख्यायन
नोट: नीचे दिये गए वक्तव्य कुछ पुराने सार्वजनिक-डोमैन टिप्पणीकारों के संकलन से प्रेरित हैं और उन्होंने इस ध्वनी को संदर्भ-सम्प्रेषित किया है, ताकि स्पष्टता बनी रहे:
“शुद्ध व्यक्ति के लिए सब कुछ शुद्ध है; पर अशुद्ध मानवीय विवेक और संदिग्ध आस्थाओं के कारण कुछ भी शुद्ध नहीं रह जाता।”