रोमियों 14:20 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

भोजन के लिये परमेश्‍वर का काम* न बिगाड़; सब कुछ शुद्ध तो है, परन्तु उस मनुष्य के लिये बुरा है, जिसको उसके भोजन करने से ठोकर लगती है।

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रोमियों 14:20 पद-दर-पद बाइबल टीका

रोमियों 14:20 का व्याख्या संदर्भ में

पोषण के विषय में रोमियों 14:20 में पौलुस बतला रहे हैं कि परमेश्वर के काम के लिए जो कुछ भी है वह ठीक है, परंतु किसी की आस्था-चिन्ता या ठोकर से बचना चाहिए। पवित्रशास्त्र यह स्पष्ट कर देता है कि भोजन स्वयं शुद्ध है, पर लोग या सामाजिक दबाव इसे लेकर भिन्न-भिन्न विचार रखते हैं। जो दूसरों के लिए ठोकर का कारण बन सकता है, वह व्यवहार विवेक के विरुद्ध है। इस पाठ का लक्ष्य है कि ईसाई समुदाय में स्वतंत्रता के बावजूद प्रेम और करुणा के साथ जीना सीखें।

मुख्य अर्थ

यह verse ईसाई स्वतंत्रता और बन्धन के बीच संतुलन पर प्रकाश डालता है। परमेश्वर के काम के लिए भोजन स्वीकार्य है; लेकिन जो लोग इससे आहत हों या उनके विश्वास में बाधा आये, उनके प्रति वह व्यवहार सुरक्षा और संवेदना की मांग करता है।

दो-तीन प्रमुख विषय

  • धार्मिक स्वतंत्रता सभी के लिए है, पर उसे प्रेम के साथ पेश करना चाहिए ताकि दूसरों को ठोकर न लगे।
  • हर व्यक्ति के आस्था-संरोध का सम्मान करें; विवेकहीन व्यवहार से बचें जो साथी विश्वासियों के विश्वास को कमजोर कर सके।
  • विश्वासियों की एकता और प्रेम परमेश्वर के कल्याण के लिए उच्च मूल्य रखते हैं; मतभेदों के बावजूद एक दूसरे के लिए प्रेरणा बनना चाहिए।

क्रॉस-रेफरेंस (संक्षिप्त उल्लेख)

यसीः 1) 1 कुरिन्थियों 8–10: खाने-पीने के विषय में विभिन्न अधिकार और समझदारी; 2) गलातियों 5:13: प्रेम से जीवन की स्वतंत्रता का अभ्यास; 3) यूहन्ना 13:34–35: एक दूसरे के प्रेम से ईमानदारी का परिचय। इन संदर्भों में पवित्र आत्मा की नेतृत्व से विवेक, प्रेम और एकता का महत्व उभरता है।

व्यावहारिक अनुप्रयोग

  • अपने किसी भाई-बहन की आस्था की संवेदनशीलता रखें; जब संभव हो तो ऐसे भोजन और कार्यक्रम से बचें जिससे उन्हें ठोकर लगे।
  • स्वतंत्रता का प्रयोग करते समय प्रेम को प्राथमिकता दें; विवाद से दूर रहें ताकि समुदाय में बंधन मजबूत रहे।
  • दलीलों के बजाय उदाहरण बनें—कैसे प्रेम से जीवन बिताने से परमेश्वर की महिमा बढ़ती है।

संक्षिप्त निष्कर्ष

इसverse में पौलुस हमें याद दिलाते हैं कि ईसाई जीवन में सांसारिक अधिकार और व्यक्तिगत आस्था के बीच संतुलन आवश्यक है। भोजन—या अन्य धार्मिक रीति-रिवाज—स्वतः शुद्ध है, पर प्रेम और दूसरों के विश्वास की रक्षा करना अक्षरशः परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप है। एकता और करुणा के साथ चलना ही वास्तविक स्वतंत्रता का नतीजा है।

एतिहासिक-धर्मग्रंथीय नोट

यहाँ पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेबल टिप्पणीकारों के भीतर से संक्षिप्त उद्धरण बिल्कुल आवश्यक हो तो प्रविष्ट किए जा सकते हैं, किन्तु पूर्ण पाठ नहीं; नीचे केवल संवेदी स्मरण प्रकाशित किया गया है. (उद्धरण: “...”)

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

रोमियों 14:20 समानांतर पद और संबंधित वचन

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