रोमियों 14:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और खानेवाला न-खानेवाले को तुच्छ न जाने, और न-खानेवाला खानेवाले पर दोष न लगाए; क्योंकि परमेश्‍वर ने उसे ग्रहण किया है।

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रोमियों 14:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

अर्थ का सीधा बयान

रोमियों 14:3 के अनुसार, जो खाने वाला है उसे न खाने वाले पर दोष नहीं डालना चाहिए; और न खाने वाला भी यह मानकर तुच्छ नहीं समझना चाहिए कि उसने क्या किया है। परमेश्वर ने उसे स्वीकार किया है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

पॉल रोम की सभा में विश्वासियों के बीच आस्था-सम्बंधी विविधताओं पर चर्चा कर रहे हैं—खाने-पीने के नियमों और धार्मिक पूर्वाग्रहों के कारण होने वाले मतभेद। विशिष्ट संदर्भ उन वस्तुओं पर है जो पवित्रस्थ परिसर के नियमों से जुड़ी थीं या स्वीकृत आहार-परंपराओं से जुड़ी थीं। कुछ पुरस्कारों के रूप में व्यक्ति अपने विवेक के अनुसार निर्णय लेता है; पर परमेश्वर के साथ किसी के स्थान-जाति या आचरण से उसे परखा नहीं जाना चाहिए।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • खाने-खाने वाले और न खाने वाले दोनों के भीतर विश्वास का क्षेत्र है, परन्तु एक दूसरे के प्रति सम्मान बनाए रखना परमेश्वर की इच्छा है।
  • ग्रहण करने वाला—जो दूसरों के निर्णयों को लेकर अधिकार जताता है—उस पर संयम और धैर्य रहा जाना चाहिए; क्योंकि परमेश्वर ने उसे भी स्वीकार किया है।
  • मानसिक और आध्यात्मिक स्वतंत्रता के बीच सामंजस्य मुख्य है; प्रेम सबसे ऊँचा मापदंड है।

मुख्य निष्कर्ष (थीमेटिक फर्स्ट-पॉइंट)

  1. सम्मान बनाम तुच्‍छता: दूसरे के विवेक के साथ खड़े रहें, आलोचना से बचें।
  2. ईश्वर की स्वीकृति: परमेश्वर ने हर एक को प्रतिष्ठित किया है, इसलिए श्रेष्ठता के भाव नहीं।
  3. खर्च और दृष्टिकोण: धार्मिक आहार के मानदंडों के पार प्रेम और एकता को प्राथमिकता दें।

संबंधित बाइबल संदर्भ और संक्षिप्त व्याख्या

1) रोमियों 14:1-2: विश्वासयोग्यों के बीच विवेक-स्वतंत्रता के कारण मतभेद। संदेश: न शिकायत करें, न एक-दूसरे पर निर्भरता डालें।

2) फिलिप्पियों 2:3-4: दूसरों को अपने से बड़े मानना और आत्म-हित से अधिक दूसरों के हितों का ध्यान रखना।

3) अन्यायपूर्ण न सोचें:1 कुरिन्थियों 8:9-13 का दृष्टांत दिखाता है कि किसी के लिए आचरण कैसे प्रेम से उठता है, ताकि न टूटे उसे विश्वास।

व्यावहारिक takeaway

किसी के आहार या धार्मिक-परंपरा पर अपनी स्वीकृति न जताने की कसौटी यह होनी चाहिए कि वह प्यार, मिलन-आस्था और एकता को बल दे। जो कुछ भी करें, वह विचारशील, सम्मानपूर्ण और परमेश्वर के दृष्टिकोण के अनुरूप हो।

उद्धरण (पाबंद-आधारित स्रोत)

यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के पुराने टिप्पणियों के संक्षिप्त उद्धरण चाहते हैं, तो वे इस प्रकार मिलते हैं:

- Matthew Henry: “...खाने-पीने के मुद्दों के साथ प्रेम को ऊपर रखना चाहिए; परमेश्वर के प्रेम में सभी समान हैं...”

- Albert Barnes: “जो खाते हैं वे न खाने वालों को दोष दें, परन्तु खाने वाले भी तुच्छ न समझे—क्योंकि ईश्वर ने उन्हें ग्रहण किया है।”

- Adam Clarke: “आहार के नियमों में मतभेद परमेश्वर की संतान के बीच एकता को न बिगाड़े; प्रेम ही वास्तविक विवेक है।”

नोट: इन उद्धरणों के माध्यम से पाठक प्राचीन टिप्पणीकारों की दृष्टि को समग्रता से समझ सकेंगे, पर मूल पाठ की सच्ची व्याख्या नई पंक्तियों में प्रस्तुत है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

रोमियों 14:3 समानांतर पद और संबंधित वचन

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