Old Testament
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रोमियों 14:1 रोमियों 14:2 रोमियों 14:3 रोमियों 14:4 रोमियों 14:5 रोमियों 14:6 रोमियों 14:7 रोमियों 14:8 रोमियों 14:9 रोमियों 14:10 रोमियों 14:11 रोमियों 14:12 रोमियों 14:13 रोमियों 14:14 रोमियों 14:15 रोमियों 14:16 रोमियों 14:17 रोमियों 14:18 रोमियों 14:19 रोमियों 14:20 रोमियों 14:21 रोमियों 14:22 रोमियों 14:23



अर्थ का सीधा बयान
रोमियों 14:3 के अनुसार, जो खाने वाला है उसे न खाने वाले पर दोष नहीं डालना चाहिए; और न खाने वाला भी यह मानकर तुच्छ नहीं समझना चाहिए कि उसने क्या किया है। परमेश्वर ने उसे स्वीकार किया है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
पॉल रोम की सभा में विश्वासियों के बीच आस्था-सम्बंधी विविधताओं पर चर्चा कर रहे हैं—खाने-पीने के नियमों और धार्मिक पूर्वाग्रहों के कारण होने वाले मतभेद। विशिष्ट संदर्भ उन वस्तुओं पर है जो पवित्रस्थ परिसर के नियमों से जुड़ी थीं या स्वीकृत आहार-परंपराओं से जुड़ी थीं। कुछ पुरस्कारों के रूप में व्यक्ति अपने विवेक के अनुसार निर्णय लेता है; पर परमेश्वर के साथ किसी के स्थान-जाति या आचरण से उसे परखा नहीं जाना चाहिए।
व्याख्यात्मक अवलोकन
मुख्य निष्कर्ष (थीमेटिक फर्स्ट-पॉइंट)
संबंधित बाइबल संदर्भ और संक्षिप्त व्याख्या
1) रोमियों 14:1-2: विश्वासयोग्यों के बीच विवेक-स्वतंत्रता के कारण मतभेद। संदेश: न शिकायत करें, न एक-दूसरे पर निर्भरता डालें।
2) फिलिप्पियों 2:3-4: दूसरों को अपने से बड़े मानना और आत्म-हित से अधिक दूसरों के हितों का ध्यान रखना।
3) अन्यायपूर्ण न सोचें:1 कुरिन्थियों 8:9-13 का दृष्टांत दिखाता है कि किसी के लिए आचरण कैसे प्रेम से उठता है, ताकि न टूटे उसे विश्वास।
व्यावहारिक takeaway
किसी के आहार या धार्मिक-परंपरा पर अपनी स्वीकृति न जताने की कसौटी यह होनी चाहिए कि वह प्यार, मिलन-आस्था और एकता को बल दे। जो कुछ भी करें, वह विचारशील, सम्मानपूर्ण और परमेश्वर के दृष्टिकोण के अनुरूप हो।
उद्धरण (पाबंद-आधारित स्रोत)
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के पुराने टिप्पणियों के संक्षिप्त उद्धरण चाहते हैं, तो वे इस प्रकार मिलते हैं:
- Matthew Henry: “...खाने-पीने के मुद्दों के साथ प्रेम को ऊपर रखना चाहिए; परमेश्वर के प्रेम में सभी समान हैं...”
- Albert Barnes: “जो खाते हैं वे न खाने वालों को दोष दें, परन्तु खाने वाले भी तुच्छ न समझे—क्योंकि ईश्वर ने उन्हें ग्रहण किया है।”
- Adam Clarke: “आहार के नियमों में मतभेद परमेश्वर की संतान के बीच एकता को न बिगाड़े; प्रेम ही वास्तविक विवेक है।”
नोट: इन उद्धरणों के माध्यम से पाठक प्राचीन टिप्पणीकारों की दृष्टि को समग्रता से समझ सकेंगे, पर मूल पाठ की सच्ची व्याख्या नई पंक्तियों में प्रस्तुत है।