Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 14:1 रोमियों 14:2 रोमियों 14:3 रोमियों 14:4 रोमियों 14:5 रोमियों 14:6 रोमियों 14:7 रोमियों 14:8 रोमियों 14:9 रोमियों 14:10 रोमियों 14:11 रोमियों 14:12 रोमियों 14:13 रोमियों 14:14 रोमियों 14:15 रोमियों 14:16 रोमियों 14:17 रोमियों 14:18 रोमियों 14:19 रोमियों 14:20 रोमियों 14:21 रोमियों 14:22 रोमियों 14:23



रोमियों 14:15 का व्याख्यान: प्रेम के मार्ग में सावधानी
पाठ-भूमिका: रोमियों 14 में पवित्र लिखित संदेश है कि विश्वास में दृढ़ रहने के साथ-साथ भाइयों के बीच समझदारी और सहनशीलता कैसे बनाए रखें। यहाँ verse 15 उस सामाजिक-नीति पर केंद्रित है कि यदि हमारा भोजन किसी भाई को उदास कर दे, तो हमारी क्रिया प्रेम की रीति से नहीं चलनी चाहिए। मसीह के प्रायश्चित्त के उद्देश्य पर विचार करते हुए यह हमें सिखाता है कि चमत्कारपूर्ण स्वतंत्रता तब तक उचित नहीं जब वह किसी दूसरे के विश्वास को ठेस पहुँचाए।
पद का संदर्भ और उसका अध्याय में स्थान
रोमियों 14 अध्याय में ख्रीष्ट-विश्वासियों के बीच विविधताओं को सहन करने, मतभेदों के बावजूद एकता बनाए रखने तथा भरपेट स्वच्छता से जीने की शिक्षा है। 14:15 विशेष रूप से यह बताता है कि हमारा भोजन—जो सामान्यतः एक व्यक्तिगत क्रिया है—अगर वह हमारे भाई के लिए ठेस पहुँचाए, तो वह प्रेम की परंपरा के विरुद्ध है। इसलिए मसीह के मरण-जीवन उद्देश्य के प्रकाश में, दर्शक को अपने अधिकारों को कभी-भी दूसरे के विश्वास को चोट पहुँचाने के लिए नहीं देना चाहिए।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस पद का मूल पाठ यह है कि प्रेम आपकी स्वतंत्रता पर नियंत्रण नहीं करता, बल्कि उसे नियंत्रित करता है ताकि भाई-बहन के विश्वास को नुकसान न पहुँचे। यीशु मसीह ने अनुमति नहीं दी कि हमारी स्वतंत्रता दूसरों के पतन का कारण बने; हमारा विकल्प उनके विश्वास के लिए ऊर्जा बनना चाहिए, न कि बाधा।
केंद्रीय विचार—प्रेम-चहलकदमी बनाम व्यक्तिगत अधिकार
स्थापनात्मक निष्कर्ष यह है: जब किसी के लिए भोजन या रीति-रिवाज उदासी का कारण बनते हैं, तो विश्वास के मानदंडों के भीतर परिजन, धार्मिक समुदाय और नैतिकता की सीमा को बनाए रखना आवश्यक है। मसीह ने हमारे लिए स्वयं को निम्न किया, ताकि उत्तराधिकारी अभी भी एकता के साथ चल सकें; इसी दुरंदेश के अनुरूप, हमारे क्रिया-कलापों को प्रेम के मार्ग पर चलना चाहिए, भले ही वह हमें अपने अधिकारों से थोड़ा पीछे कर दे।
अन्य बाइबल पाठों से संगति (संक्षेप)
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता तब ही सार्थक होती है जब वह समुदाय के सदस्यों के विश्वास और शांति को संरक्षित रखे।
उचित अनुप्रयोग
छोटा-सा cross-reference और स्पष्ट व्याख्या
1) 1 कुरिन्थियों 8:13 का संकल्प बताता है कि किसी भी आहार के कारण अगर हमारा भाई ठेस खाए तो हम अपनी स्वतंत्रता त्याग दें। यह शब्द रोमियों 14:15 के अनुरूप है।
2) याकूब 2:8 कहता है कि यदि तुम राज्य-योजनाओं के भीतर प्रेम के अनुसार काम करो, तो कन्या-सीमा नहीं टूटती—यह समुदाय की एकता के लिए आवश्यक है।
3) रोमियों 12:10 प्रेम-भाव के साथ भाइयों का सम्मान करने पर जोर देता है, जो कि इस पद के व्यवहारिक अनुप्रयोग की दिशा निर्धारित करता है।
संक्षेप-निष्कर्ष
रोमियों 14:15 हमें याद दिलाता है कि सत्य-याद में भी विनम्रता और प्रेम सर्वोपरि है। हमारे व्यक्तिगत अधिकार तब तक सही नहीं जब उनका परिणाम किसी भाई-बंधु के विश्वास को कमज़ोर करे। इस तरह, हमारे भोजन, व्यवहार और रीति-रिवाज मसीह के प्रेम के अनुरूप परिशुद्ध रहते हैं—ताकि समुदाय मजबूत हो और हर सदस्य आशीष पाए।
नोट: इस पाठ के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों से समाकलित धारणा का संक्षेप उपयोग किया गया है; यदि आवश्यक हो तो उनके स्पष्ट छोटे उद्धरण नीचे विचार के रूप में उद्धृत हो सकते हैं.