Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 14:1 रोमियों 14:2 रोमियों 14:3 रोमियों 14:4 रोमियों 14:5 रोमियों 14:6 रोमियों 14:7 रोमियों 14:8 रोमियों 14:9 रोमियों 14:10 रोमियों 14:11 रोमियों 14:12 रोमियों 14:13 रोमियों 14:14 रोमियों 14:15 रोमियों 14:16 रोमियों 14:17 रोमियों 14:18 रोमियों 14:19 रोमियों 14:20 रोमियों 14:21 रोमियों 14:22 रोमियों 14:23



रोमियों 14:12 का immediate सेटिंग और संदेश
यह पद रोमियों के लेखन के क्रम में, उन चर्चित बहसों के बीच आता है जो लोगों के बीच विश्वास-संयम और परमेश्वर के सामने जवाबदेही से जुड़े थे। प्रेरित पौलुस इस लेख में यह स्पष्ट करते हैं कि प्रत्येक ख्रीष्टीय व्यक्ति को परमेश्वर के सामने अपना-अपना लेखा देना होगा — न किसी के मान-मनव्वल के अनुसार, न मानवीय आचार-व्यवहार के कारण, बल्कि परमेश्वर के न्यायपूर्ण दायरे में व्यक्तिगत उत्तरदायित्व।
यह पाठ परमेश्वर या विश्वास के बारे में क्या बताता है
इस वाक्य में विश्वास का एक गंभीर आयाम उभरता है: ईमानदार आत्म-निरीक्षण और परमेश्वर की स्वतंत्र सत्ता के सम्मान के साथ जीना। भगवान हर व्यक्तिगत अवसर, हर विचार, और हर व्यवहार का लेखा लेंगे; इसलिए हमे दूसरों के साथ असंतोष या जजमेंट के बजाय अपना राज-सत्यत्व खोजने और परमेश्वर के मार्ग पर चलने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
महत्वपूर्ण शब्दों/चिन्हों की स्पष्ट व्याख्या
संबद्ध बाइबल पाठ (Cross-References)
कई स्थान रोम। 14 के विचारों को पुष्ट करते हैं कि मानवीय-अधिकार-भाव को छोड़कर विश्वास-संयम और प्रेम सर्वोपरि है:
ये संदर्भ दर्शाते हैं कि लेखा-जोखा का सिद्धांत व्यक्तिगत ईमानदारी, प्रेम-निर्मित व्यवहार और परमेश्वर की न्याय-सत्ता पर आधारित है।
प्रौद्योगिकी नहीं, जीवन-निर्देश: आज के लिए अनुप्रयोग
हमारे जीवन में रोमियों 14:12 के अनुरोध को तीन सरल कदमों में ढाला जा सकता है:
एतिहासिक टिप्पणी का संक्षेप
हेंरी, Barnes और Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणी-उद्धरणों से प्रेरित विचार इस प्रकार बनते हैं: परमेश्वर के सामने व्यक्तिगत लेखा-जोखा एक आंतरिक परिवर्तन का संकेत है, जिससे समाज-जीवन में स्थिरता और स्वतंत्रता दोनों बनी रहती हैं। किन्तु इन उद्धरणों का पूर्ण पाठ यहाँ नहीं दिया जा रहा है; यदि आप उद्धरण चाहते हैं, मैं संक्षिप्त-तरीके से उनका अर्थ-सार दे सकता हूँ।
निष्कर्षतः, रोमियों 14:12 सभी विश्वासियों के लिए एक स्पष्ट मानक है: ईश्वर के सामने हर एक को अपने जीवन-निर्णयों का जवाबदेह ठहरना चाहिए, ताकि प्रेम-आधारित समुदाय में आचार-विचार स्पष्ट और सुरक्षित रहें।