Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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मत्ती 16:27 पर टिप्पणी (HINIRV)
पर्व के संदर्भ में यह वाक्य उद्धृत होता है जब यीशु अपने शिष्यों को उनके भवितव्य कर्मों के अनुसार भविष्य की इनाम-प्रतिफल के बारे में सतर्क करते हैं। पहले भाग में यीशु बताते हैं कि मनुष्य का पुत्र अपने स्वर्गदूतों के साथ अपनी पिता की महिमा में आएगा; इससे यह स्पष्ट होता है कि वह सारा ब्रह्मांडीय महत्त्व और प्रभुत्व लेकर आएगा। इसके बाद कहा गया है कि हर एक को उसके कर्मों के अनुसार प्रतिफल दिया जाएगा, अर्थात् प्रत्येक व्यक्ति की ईमानदारी, विश्वास और सेवा के पुरस्कार/फल उसे प्राप्त होंगे।
केंद्रीय स्पष्टता
यह वाक्य दो मुख्य कल्पनाओं को जोड़ता है: (1) मसीह का महत्त्वपूर्ण आगमन और उसकी सत्ता की पुनर्रचना, जो कि स्वर्गीय महिमा और न्याय के साथ जुड़ा है; (2) प्रत्येक व्यक्ति के कर्मों के अनुसार उत्तराधिकार, पुरस्कार या जवाबदेही। यह क्रिया-प्रतीक स्पष्ट करती है कि विश्व के नियम नितांत निष्कपट नहीं हैं; परमेश्वर हर द slew के काम का लेखा माँगेगा और उचित प्रतिफल देगा।
मुख्य थीम
संबद्ध आयतें और उनका संक्षिप्त संबंध
पवित्र ग्रंथ के अन्य हिस्सों में यह विचार मिलता है कि समय और न्याय उसे निर्धारित करेगा—यशायाह या रोमी लेखन के परंपरागत तत्व यहाँ भी प्रतिध्वनित होते हैं। उदाहरणार्थ, हर कर्म के अनुसार प्रतिफल का विचार 1) आशीष/शासन-इनाम, 2) दण्ड के विचार के साथ जुड़ा है; इसलिए यह संदेश शिष्य-चरित्र की परिपक्वता पर बल देता है।
क्रॉस-रेफरेंस (संबलित सार)
- मत्ती 25:14-30 (कथा-परक प्रतिफल): प्रतीकात्मक दास-प्रथा के जरिये प्रतिफल की प्रकृति बताती है।
- रोम 2:6-11 (न्याय का सिद्धांत): हर एक को उसके कर्मों के अनुसार प्रतिफल मिलेगा।
- 2 कुरिन्थ 5:10 (हम सभी का लेखा-जोखा): प्रतिफल का विचार हमारी पृथ्वी-जीवन और चरम दिन की तैयारी से जुड़ा है।
व्यावहारिक विचार
जीवन के छोटे-छोटे चुनाव भी अंततः बड़े परिणामों से जुड़े होते हैं। आस्था, नम्रता, और ईमानदारी—इन गुणों के साथ चलना एक ऐसे प्रतिफल की ओर ले जाता है जो समय के कारण नहीं, पर उद्देश्य के अनुसार आता है। प्रेरणा के लिए यह विचार दें कि हर दिन की सेवकई और प्रेमपूर्ण क्रियाएं परमेश्वर के राज्य के अग्रिम भाग होते हैं।
क्लोजिंग समरी
मत्ती 16:27 में दिखती euro-यक्त तस्वीर बताती है कि यीशु का आगमन महिमा के साथ होगा और हर ব্যক্তি अपने कामों के अनुसार प्रतिफल पाएगा। यह संदेश शिष्यों को न केवल भविष्य की आशा देता है, बल्कि आज के जीवन के लिए मार्गदर्शक नियम भी बनता है: विश्वास-चलन, ध्यान और कर्म-निर्वाह—इनके द्वारा हम सही उत्तर का भागी बनते हैं।