Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 16:1 मत्ती 16:2 मत्ती 16:3 मत्ती 16:4 मत्ती 16:5 मत्ती 16:6 मत्ती 16:7 मत्ती 16:8 मत्ती 16:9 मत्ती 16:10 मत्ती 16:11 मत्ती 16:12 मत्ती 16:13 मत्ती 16:14 मत्ती 16:15 मत्ती 16:16 मत्ती 16:17 मत्ती 16:18 मत्ती 16:19 मत्ती 16:20 मत्ती 16:21 मत्ती 16:22 मत्ती 16:23 मत्ती 16:24 मत्ती 16:25 मत्ती 16:26 मत्ती 16:27 मत्ती 16:28



मत्ती 16:25 का महत्त्व और गहराई
यह श्लोक ऐसे समय में सबसे स्पष्ट होता है जब च्यूक-चुनाव हमें अपनी प्राथमिकताओं को दर्पण में देखने को कहता है: क्या हम अपनी सुरक्षा, आराम और सांसारिक लाभ के लिए प्राण बचाने की कोशिश करेंगे, या ईश्वर की योजनाओं के प्रति पूर्ण समर्पण दिखाते हुए उसे छोड़कर नयी जिंदगी पाएंगे? यीशु का यह निर्देश मूलतः यह बताता है कि पृथ्वी पर सांसारिक सुरक्षा की चाहत ईश्वर की बुलाहट के सामने कब तक फीका पड़ती है।
पार्श्वभूमि और मूल संदर्भ
यह वाक्य मत्ती 16:25 में आता है जब यीशु अपने चेलों से भविष्य के दुखद-पराक्रमों के बारे में बात कर रहे हैं और अपने अनुयायियों की धारणा स्पष्ट कर रहे हैं कि किस प्रकार वास्तविक जीवन वही है जो ईश्वर की misión के प्रति पूर्ण बलिदान से मिलता है। जिस समय यह कहा गया, वहाँ चर्च के लिए यह एक मार्गदर्शक सिद्धांत बन गया कि प्रेरितों को संसार की स्थिति-स्थिति से ऊपर उठकर परमेश्वर के उद्देश्य के अनुसार चलना है।
मुख्य संदेश
इस वाक्य का संकल्प तीन बातें व्यक्त करता है:
बाइबल के अन्य विचारों के साथ सम्बद्धता
इस संदेश के साथ अन्य बाइबल विचार मिलकर एक समग्र नैतिक सिद्धांत बनाते हैं:
संदर्भित क्रॉस-रेफरेंसे
नीचे तीन प्रासंगिक संदर्भ हैं जो इस सिद्धान्त को और पुष्ट करते हैं:
इन क्रॉस-रेफरेंसेस से अर्थ स्पष्ट होता है कि ईश्वर के राज्य के लिए त्याग और विश्वास आवश्यक है; संसारिक सुरक्षा की चिंता एक बाधा बन सकती है, जब तक वह ईश्वर की दृष्टि के अनुसार नहीं बदली जाती।
ऐतिहासिक-विश्वासगत समर्थक व्याख्या (सार-संक्षेप)
कई पुरालेख टिप्पणियाँ इस बात पर संकेत करती हैं कि इस वचनों में व्यक्तिगत मूल्यांकन और जोखिम उठाने का साहस आवश्यक है। यह विशेषता पुराने साहित्य में भी बाइबल के शाश्वत सिद्धांत से मेल खाती है कि धरातल पर की गई आर्तिमा और आत्म-त्याग भविष्य की अनंत जीवन के लिए रास्ता बनाते हैं।
संक्षिप्त devotional विचार
हम में से प्रत्येक को यह प्रश्न करना चाहिए: क्या मैं अपनी रूढ़ सुरक्षा या आराम के लिए जी रहा हूँ, या ईश्वर के उद्देश्य के अनुरूप अपने आत्म-स्वार्थ को दबाकर नया जीवन स्वीकार करना चुनूँगा? यदि हम अपने प्राणों को ईश्वर के पक्ष में गिरा दें, तो दैवीय जीवन के अनोखे लाभ सामने आते हैं—शांति, उद्देश्य और स्थिरता।
संक्षेपित निष्कर्ष
इस श्लोक से हमें स्पष्ट संकेत मिलता है कि वास्तविक जीवन वही है जो परमेश्वर की बुलाहट के अनुसार जीया जाए—even when it requires sacrifice. यह पृथ्वी-यात्रा में भी अचल धैर्य और विश्वास की राह दिखाता है, जिससे अंततः परमेश्वर का लाभ मिलता है।
सूचनात्मक पंक्ति—यस संदेश के लिए नज़र रखने योग्य संक्षिप्त उद्धरण: “जो अपना प्राण बचाने का प्रयत्न करेगा, वही उसे खो देगा; और जो मेरे लिए अपना प्राण खोएगा, वही उसे पाएगा।”