Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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मत्ती 16:18 — स्थिति और संदेश
परिवर्तनशील कब्रस्थल के किनारे से रोमাঞ্চकारी उच्चारण: यीशु ने पीटर से यह कहकर अपनी पहचान स्पष्ट की कि उसे मसीह के रूप में ग्रहण किया जाए; उसके उत्तरदायित्व की पहचान भी वहीं से शुरू होती है। इस वाक्य का संदर्भ यह है कि यीशु अपने चेलों के साथ अपने मिशन की दिशा तय करते हैं, और पतरस के माध्यम से उन्होंने कलीसिया की स्थापना का एक विश्वसनीय आधार दिया।
यह पाठ क्या बताता है—ईश्वर और विश्वास के बारे में
यह वचन दिखाता है कि ईश्वर की देह-रचना, विश्वसनीय प्रशंसा और धर्म-निर्माण मनुष्य के सामाजिक-आचरण से नहीं, बल्कि मसीह-विश्वास से है। पतरस को “पत्थर” कहा गया है, पर असली पत्थर वह ईसा हैं; यीशु ने कहा कि वह अपनी कलीसिया उस पत्थर पर बनाएँगे—यानी परमेश्वर की योजना और प्रेरणा से मिसाल बने निर्माण के केंद्र के रूप में। यह स्पष्ट करता है कि कलीसिया स्वयं शक्ति नहीं, बल्कि मसीह की कृपा और निर्देश पर खड़ी है।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्र
संबद्ध आयतें और उनकी संक्षिप्त समझ
1) մत्ती 28:18-20 (आज्ञा और परिचारিকা): मसीह चेलों को सभी राष्ट्रों तक जाकर शिक्षा देने और कलीसिया को बनाये रखने के निर्देश देता है, यह कलीसिया के स्थायित्व का विस्तार है।
2) 1 पतरस 2:4-6 (पत्थर की संरचना): गिरजे के सदस्य एक ही स्तंभ के रूप में मसीह के द्वारा बनते हैं—जीवित पत्थर जो परमेश्वर के घर के निर्माण में सहभागी हैं।
3) इफिसीयों 2:19-22 (कलीसिया का जीवन): विश्वासी एक साथ एक नया घर बनाते हैं, जिसमें यीशु Christus ही कोहिनूर पत्थर हैं।
इतिहास-आधारित टिप्पणी से संक्षेप
१८वीं सदी के प्रसिद्ध टिप्पणीकार मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बर्न्स और एडम क्लार्क के सारगर्भित विचार इस पाठ के साथ सामंजस्य रखते हैं: वे कहते हैं कि पतरस बिहारी नहीं, परन्तु प्रेरित के रूप में चिह्नित है कि मसीह के साथ जुड़कर कलीसिया की दृढ़ नींव बनी रहे। यदि किसी टिप्पणी में उद्धरण हों, तो संदर्भ के अनुसार संकेत दिए जाते हैं।
आज के जीवन के लिए अनुप्रयोग
संक्षिप्त सार
येशु ने पतरस को कहा, तू पतरस है, और मैं इस पत्थर पर अपनी कलीसिया बनाऊँगा। यह प्रेरणा कलीसिया की भीत और आंतरिक संरचना के लिए आधारस्तम्भ दर्शाती है: मसीह ही केन्द्र है, और उसकी कृपा से ही ईश्वर का राज्य पृथ्वी पर स्थापित होता है।
उद्धरण-योग्य टिप्पणियाँ (संक्षेप): मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बर्न्स और एडम क्लार्क से संबंधित विचार—“पत्थर” का संबोधन, कलीसिया की स्थापना, और अधोलोक के फाटक के विरुद्ध सुरक्षा—इनमें से कुछ संकेत यहाँ संकलित हैं।