Old Testament
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रोमियों 14:1 रोमियों 14:2 रोमियों 14:3 रोमियों 14:4 रोमियों 14:5 रोमियों 14:6 रोमियों 14:7 रोमियों 14:8 रोमियों 14:9 रोमियों 14:10 रोमियों 14:11 रोमियों 14:12 रोमियों 14:13 रोमियों 14:14 रोमियों 14:15 रोमियों 14:16 रोमियों 14:17 रोमियों 14:18 रोमियों 14:19 रोमियों 14:20 रोमियों 14:21 रोमियों 14:22 रोमियों 14:23



रोमियों 14:8 का स्पष्ट अर्थ
लिखित पाठ स्पष्ट कहता है: यदि हम जीवित हैं, तो प्रभु के लिये जीवित हैं; और यदि मरते हैं, तो प्रभु के लिये मरते हैं; फिर हम जीएँ या मरें, हम प्रभु ही के हैं। इसका संचार यही है कि जीवन-परिचय और मृत्यु-परिचय दोनों में हमारा लक्ष्य और स्वामित्व प्रभु के हाथ में है।
प्रसंगिक पृष्ठभूमि
पौलुस रोम के विश्वासियों के बीच जातीय और आस्था-गत भिन्नताओं को एक साथ बांधने के प्रयास में है। चर्च में भोजन के अधिकार, पर्व-उत्सवों के नियम, और अन्य धार्मिक-आचार-व्यवहार से उठने वाले मतभेदों के बीच प्रेम और समर्पण कैसे बना रहे, यह उसकी प्रेरित-उपदेश का केंद्र है। रोमियों 14 में उन्होंने व्यक्तिगत निर्णयों को भी परमेश्वर के नियंत्रण के अधीन माना है ताकि सभी एकता में रहें।
व्याख्यात्मक बिन्दु
क्लासिक टिप्पणी से सार
Matthew Henry, Barnes, और Clarke की चारित्रिक कसौटियों में यह विचार प्रमुख रहता है कि ख्रीस्तीय जीवन एक समर्पण-जीवन है: हर स्थिति में प्रभु को ही आगे रखना। यह शास्त्रीय विवेक वक्त करता है कि परमेश्वर के लिये जीवित रहने का मतलब है प्रेम और सेवाभाव, और मरने का मतलब है विश्वास में स्वर्गीय इनाम को पाना।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
अन्य सम्बन्धित पद
यहीं विचार Römer 12:1–2 और 1 कोरल 6:19–20 में भी दिखता है, जहां प्रेरित बताते हैं कि हमारा शरीर और जीवन परमेश्वर की वहन-योग्यता का क्षेत्र हैं और हम उसे पवित्र-जीवन के लिए संकल्पित करें। केवल संकीर्ण नियमों के बजाय, समर्पण-आध्यात्मिकता अधिक प्रभावी है, ताकि प्रेम प्रभु के साथ हमारी नब्ज बन जाए।
परीक्षण-उद्धरण: Matthew Henry ने कहा है कि “यीशु के लिये जीवित रहना अपनी इच्छा नहीं, बल्कि उसकी इच्छा बन जाना है।” Albert Barnes ने कहा कि यह वचन विश्वास और प्रतिबद्धता की गहराई का प्रमाण है कि जीवन और मृत्यु—दोनों—किसी भी परिस्थिति में प्रभु के इरादे के अधीन हैं। Adam Clarke ने इस संदर्भ में कहा कि यह निरंतर समर्पण का मूल सिद्धांत है कि क्रिस्ट के प्रति हमारा संबंध हर दशा में स्थिर रहे।
सीधी दुआ
हम प्रभु के लिये जीते और मरते रहें, ताकि प्रत्येक कदम में उनकी प्रभुता उजागर हो।