Old Testament
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प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 21:1 प्रेरितों के काम 21:2 प्रेरितों के काम 21:3 प्रेरितों के काम 21:4 प्रेरितों के काम 21:5 प्रेरितों के काम 21:6 प्रेरितों के काम 21:7 प्रेरितों के काम 21:8 प्रेरितों के काम 21:9 प्रेरितों के काम 21:10 प्रेरितों के काम 21:11 प्रेरितों के काम 21:12 प्रेरितों के काम 21:13 प्रेरितों के काम 21:14 प्रेरितों के काम 21:15 प्रेरितों के काम 21:16 प्रेरितों के काम 21:17 प्रेरितों के काम 21:18 प्रेरितों के काम 21:19 प्रेरितों के काम 21:20 प्रेरितों के काम 21:21 प्रेरितों के काम 21:22 प्रेरितों के काम 21:23 प्रेरितों के काम 21:24 प्रेरितों के काम 21:25 प्रेरितों के काम 21:26 प्रेरितों के काम 21:27 प्रेरितों के काम 21:28 प्रेरितों के काम 21:29 प्रेरितों के काम 21:30 प्रेरितों के काम 21:31 प्रेरितों के काम 21:32 प्रेरितों के काम 21:33 प्रेरितों के काम 21:34 प्रेरितों के काम 21:35 प्रेरितों के काम 21:36 प्रेरितों के काम 21:37 प्रेरितों के काम 21:38 प्रेरितों के काम 21:39 प्रेरितों के काम 21:40



वाक्य का सीधा अर्थ
प्रेरितों के काम 21:13 में प्रेरित पौलुस स्पष्ट कह देते हैं कि वह मौत के भय को नहीं मानते और इस्तीफे की बजाय ईश्वर के उद्देश्य के अनुसार अपने जीवन के बलिदान तक जाने को तैयार हैं। वे पहले अपने आप से, फिर दूसरों से, यह स्पष्ट कर देते हैं कि प्रभु यीशु के नाम के लिए उन्हें हर प्रकार की कठोर परिस्थितियों से गुजरना स्वीकार है।
प्रसंग-परिप्रेक्ष्य
यह पाठ प्रेरितों के कार्यों के क्रम में उन घटनाओं से जुड़ा है जहाँ पौलुस अपने मिशन-यात्राओं के दौरान विरोध और असहमति का सामना करते हैं। वे यरूशलेम जा कर अपने उद्धारकर्ता के नाम की पराकाष्ठा के लिए तैयार रहने का दृढ़ संकल्प दोहराते हैं, भले ही इसका परिणाम कटुभाव, धिक्कार या दमन ही क्यों न हो। यह दृढ़ आत्म-त्याग पवित्रता और श्रद्धा के साथ जुड़ा है, जिसमें प्रेरितों के सेवक-जीवन की गहराई प्रकट होती है।
Interpretive observations (व्याख्यात्मक अवलोकन)
थीम्स का छोटा सूचीबद्ध सार
क्रॉस-रेफरेंसेस (संदर्भ) और संक्षिप्त व्याख्या
1) प्रेरितों के काम 20:22-24—पौलुस अपनी यात्रा के डगर पर यह घोषणा करता है कि आत्मा उसे हर जगह ले जाती है और वह अपने जीवन के उद्देश्य को छोड़कर नहीं जाएगा, पर वही कहता है कि परमेश्वर की योजना उसकी दिशा निर्धारित है। यह उस भावना को पुष्ट करता है कि जीवन-यत्न परमेश्वर की महिमा के लिये है।
2) रोमियों 8:38-39—गहन विश्वास में कहा गया है कि न तो मृत्यु, न जीवन, न विभाजन—कुछ भी हमें प्रेम परमेश्वर के चरन से पृथक कर सकता है। पौलुस के शब्दों के पीछे यही आश्वासन है कि मृत्यु भी प्रभु के उद्देश्य में बाधक नहीं बनती।
3) फ़िलिप्पियों 1:20-21—यह प्रेरित-जीवन का समान आध्यात्मिक ध्वनि है: जीवन या मरना—सब कुछ मसीह के लिए और मसीह में।
संक्षिप्त व्यावहारिक takeaway
हम अपने सिद्धांतों में डटकर खड़े रहें, पर यह सोचे बिना नहीं कि हर असुविधा ईश्वर के उद्देश्य की पूर्ति का माध्यम बन सकती है। परेशानियों के समय भी यीशु मसीह के नाम की महिमा को सर्वोपरि रखना सीखें; अपने डर को ईश्वर की योजनाओं के सामने छोटा करें और प्रभु के विश्वास को बढ़ावा दें।
तकनीकी टिप्पणी और उद्धरण चेतावनी
यदि किसी स्रोत में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के छोटे आंशिक उद्धरण मिलें, उन्हें यहाँ ऐसे संकेत के साथ प्रस्तुत किया जाएगा: “...” यह केवल उनका छोटा उद्धरण होगा और पूर्ण टेक्स्ट नहीं दूँगा। नीचे संक्षेप में उनके विचार सामान्य रूप से समाहित किए गए हैं:
Matthew Henry के अनुसार, प्रेरितों के सेवक-जीवन में साहसिता और समर्पण परमेश्वर के राज्य के लिए आवश्यक नेतृत्व का हिस्सा है। Albert Barnes emphasises कि"]}