Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
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प्रेरितों के काम 21:31 का संकथन और उसका संदर्भ
प्रेरितों के काम में यह कड़ी घटना ईश्वर के काम के लिए प्रेरित पथ पर अनेक व्यवधानों के बीच भी胆धैर्य और प्रभु की सुरक्षा की निशानी दिखाती है। यहाँ पलटन के अधिकारी प्रेरित पौलों और सहयोगियों से एक ऐसी स्थिति आता है, जब उन्हें मार डालने की योजना बनती है, और अपराधियों के बीच से सुरक्षा व्यवस्था का कारण बनती है। इस वाक्य में राजधानी शहर यरूशलेम में शांति भंग होने की ध्वनि है, पर ईश्वर की सलाह और दी हुई सुरक्षा का संकेत भी है।
केंद्रीय अर्थ
यह वाक्य बताता है कि समाज और धार्मिक समूह के भीतर भी निंदक षड्यंत्र होते हैं; किन्तु प्रभु के सेवक जो भी जोखिम उठाते हैं, वे परमेश्वर की योजना के भीतर आते हैं। सैनिकों का संकेत, “सैन्य-दल के सरदार को सन्देश पहुँचा,” दर्शाता है कि प्रभु के संदेशवाहक कभी-कभी मानवीय सुरक्षा के घेरे में रहते हैं। यह भी दिखाता है कि यरूशलेम में शांत वातावरण टूट सकता है, पर प्रभु के संरक्षण से उद्देश्य नहीं रुकता।
मुख्य विचारधाराएँ
पवित्र पाठ से सम्बद्ध विचार
यह दृश्य फिलिस्तीनी-यात्रा जैसी भारी घटनाओं के बीच आता है, जब समुदाय को खतरे में डालकर भी ईश्वर के संदेश को आगे बढ़ाने का उद्देश्य बना रहता है। साथ ही, यह दिखाता है कि स्थानीय प्रशासन भी कभी-कभी ईश्वरीय योजना के साधन बन जाते हैं, और उनके द्वारा संचालित घटनाओं में भी ईश्वर की अनुमति कम नहीं होती।
तीन उपयोगी क्रॉस-रेफरंसे
यही संदर्भ हमें अन्य जगहों से यह सिखाता है कि विश्वासियों पर दबाव पड़ने पर भी भगवान उनके साथ होते हैं। स्मरण रखें कि अपेक्षित निष्कर्ष क्या हो सकता है:
व्यावहारिक विचार
किसी भी कठिन समय में हमें यह याद रखना चाहिए कि खतरे आते हैं, पर प्रभु की सुरक्षा और मार्गदर्शन अडिग रहते हैं। अपने विश्वास के साथ-साथ, समुदाय की सुरक्षा और एकता बनाए रखना महत्वपूर्ण है। साहस के साथ सत्य की बात कहें, पर हिंसा नहीं।
संक्षिप्त समापन
प्रेरितों के काम 21:31 वे हालात को दर्शाता है जब शांति भंग करने की योजना बनती है, पर परमेश्वर के सेवक सुरक्षित रहते हैं और उनका उद्देश्य अवरोधों के बावजूद आगे बढ़ता है। यह कथा Faithful endurance और divine sovereignty की मिसाल है।
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