Old Testament
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प्रेरितों के काम 2:1 प्रेरितों के काम 2:2 प्रेरितों के काम 2:3 प्रेरितों के काम 2:4 प्रेरितों के काम 2:5 प्रेरितों के काम 2:6 प्रेरितों के काम 2:7 प्रेरितों के काम 2:8 प्रेरितों के काम 2:9 प्रेरितों के काम 2:10 प्रेरितों के काम 2:11 प्रेरितों के काम 2:12 प्रेरितों के काम 2:13 प्रेरितों के काम 2:14 प्रेरितों के काम 2:15 प्रेरितों के काम 2:16 प्रेरितों के काम 2:17 प्रेरितों के काम 2:18 प्रेरितों के काम 2:19 प्रेरितों के काम 2:20 प्रेरितों के काम 2:21 प्रेरितों के काम 2:22 प्रेरितों के काम 2:23 प्रेरितों के काम 2:24 प्रेरितों के काम 2:25 प्रेरितों के काम 2:26 प्रेरितों के काम 2:27 प्रेरितों के काम 2:28 प्रेरितों के काम 2:29 प्रेरितों के काम 2:30 प्रेरितों के काम 2:31 प्रेरितों के काम 2:32 प्रेरितों के काम 2:33 प्रेरितों के काम 2:34 प्रेरितों के काम 2:35 प्रेरितों के काम 2:36 प्रेरितों के काम 2:37 प्रेरितों के काम 2:38 प्रेरितों के काम 2:39 प्रेरितों के काम 2:40 प्रेरितों के काम 2:41 प्रेरितों के काम 2:42 प्रेरितों के काम 2:43 प्रेरितों के काम 2:44 प्रेरितों के काम 2:45 प्रेरितों के काम 2:46 प्रेरितों के काम 2:47



प्रेरितों के काम 2:1 पर टिप्पणी
पिन्तेकुस्त के दिन पर प्रेरित-चेलों का एक साथ एक जगह इकट्ठा होना पहली चर्चानुभव का निर्णायक क्षण है। यीशु केAscending के बाद, वे अपनी प्रार्थना, विश्वास और एकता के साथ प्रतीक्षा कर रहे थे। यह verse संदर्भ देता है कि वे एक साथ, एक ही स्थान पर, एक साझा उत्साह और उद्देश्य के साथ परमेश्वर की कृपा के आगे मात्रावस्था में थे। यह घटना फिलहाल यह संकेत करती है कि ईश्वर पवित्र आत्मा को उन पर गिराने के लिए समय-सारिणी तय कर चुका था और यह घटना नई प्रेरित-यात्रा की शुरुआत बन गई।
मुख्य अर्थ
यह verse दर्शाता है कि परमेश्वर की योजना के अनुसार पवित्र आत्मा का प्रभाव तब खुलकर सामने आता है जब समुदाय एकजुट रहता है, आस्था में एकरूपता बनाये रखता है और प्रभु के निमितता में प्रतीक्षा करता है। पिन्तेकुस्त का दिन एक प्रतीक है कि डाक्टिन नहीं, बल्कि आत्मा के प्रचंड प्रभाव से चर्च जीवंत हो उठता है और सार्वजनिक साक्षी बनता है।
कई महत्त्वपूर्ण विषय
संदर्भित पवित्र पाठ के साथ संबंध
1) पुराने नियम की परंपरा के साथ लिंक — ल्यव्यवस्था 23:15-21 और व्यवस्थाएं 16:9-11: ये संकेत देते हैं कि उत्सव-समय के विधान में विशिष्ट तिथि-सम्बन्ध और पुरुष-शॉक के साथ एकरूपता का महत्व है। यह प्रेरितों के अनुभव के साथ एक प्रकार का संरचनात्मक पूरक है, जहाँ ईश्वर की चुनी गई सभा प्रतीक्षा में है।
2) अन्य प्रेरित-आत्मिक अनुभव — मत्ती 3:16-17 और यूहन्ना 14:16-17: पवित्र आत्मा के आना और उसका जीवनप्रवाह विश्वासी समुदाय के भीतर क्रिया करता है; यह घटना उस अनुमानित क्रम की पुष्टि है जिसमें विश्वासियों में आत्मा का निवास और निर्देशन होता है।
व्यावहारिक विचार
- एकता की आवश्यकता: चर्च के लिए यह सीख कि एकजुटता में ही वास्तविक शक्ति और दिशा मिलती है।
- Pray और प्रतीक्षा: पिन्तेकुस्त के दिन की तरह, प्रार्थना और विश्वास में समय देना चाहिए जब ईश्वर अपने समय पर कार्य करते हैं।
- मंच-सेवा की तैयारी: आत्मा के आगमन के बाद व्यक्तिगत और सार्वजनिक सेवा के अवसर बढ़ते हैं; हर एक को अपने दायित्व का आकलन करके सेवक बनना चाहिए।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह verse चर्च की प्रारम्भिक अवस्था में एक साथ आने की महत्ता और पवित्र आत्मा के आगमन का आरम्भ दिखाता है—एक ऐसी शक्ति जो विश्वासियों को एकजुट कर के उनके लिए नए साक्षी-कार्य की राह खोलती है।
संदर्भ-विचार
यद्यपि यह पाठ मूल घटनाक्रम है, पर इसलिए भी प्रेरित-चेलों की एकता और आत्मा के आगमन के साथ आने वाले परिवर्तन आज भी चर्च के लिए मार्गदर्शक हैं।