Old Testament
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प्रेरितों के काम 2:1 प्रेरितों के काम 2:2 प्रेरितों के काम 2:3 प्रेरितों के काम 2:4 प्रेरितों के काम 2:5 प्रेरितों के काम 2:6 प्रेरितों के काम 2:7 प्रेरितों के काम 2:8 प्रेरितों के काम 2:9 प्रेरितों के काम 2:10 प्रेरितों के काम 2:11 प्रेरितों के काम 2:12 प्रेरितों के काम 2:13 प्रेरितों के काम 2:14 प्रेरितों के काम 2:15 प्रेरितों के काम 2:16 प्रेरितों के काम 2:17 प्रेरितों के काम 2:18 प्रेरितों के काम 2:19 प्रेरितों के काम 2:20 प्रेरितों के काम 2:21 प्रेरितों के काम 2:22 प्रेरितों के काम 2:23 प्रेरितों के काम 2:24 प्रेरितों के काम 2:25 प्रेरितों के काम 2:26 प्रेरितों के काम 2:27 प्रेरितों के काम 2:28 प्रेरितों के काम 2:29 प्रेरितों के काम 2:30 प्रेरितों के काम 2:31 प्रेरितों के काम 2:32 प्रेरितों के काम 2:33 प्रेरितों के काम 2:34 प्रेरितों के काम 2:35 प्रेरितों के काम 2:36 प्रेरितों के काम 2:37 प्रेरितों के काम 2:38 प्रेरितों के काम 2:39 प्रेरितों के काम 2:40 प्रेरितों के काम 2:41 प्रेरितों के काम 2:42 प्रेरितों के काम 2:43 प्रेरितों के काम 2:44 प्रेरितों के काम 2:45 प्रेरितों के काम 2:46 प्रेरितों के काम 2:47



प्रेरितों के काम 2:26 — "इसी कारण मेरा मन आनन्दित हुआ, और मेरी जीभ मगन हुई; वरन् मेरा शरीर भी आशा में बना रहेगा।"
यह पद पवित्र आत्मा के भरने के समय पतरस के भाषण के भीतर आया है, जब बपतिस्मा लेने वाले हजारों यहूदियों के सामने ईश्वर के महान काम का उद्घाटन हुआ। प्रेरितों के काम 2 में, पवित्र आत्मा का आना और मसीही समुदाय की प्रारम्भिक धार्मिक अनुभूति उजागर होती है; כאן प्रेरक बात यह है कि ईश्वर की योजना और उनके विश्वासियों की आस्थाएं कैसी दृढ़ होती हैं।
यह पाठ परमेश्वर और विश्वास के बारे में क्या बताता है
पद बताता है कि विश्वासियों की आस्था में एक विशिष्ट स्वागत और उत्साह है: मन आनंदित होता है, जीभ मगन होती है, और शरीर भी आशा में बना रहता है। इसका अर्थ है कि किस प्रकार ईश्वर के उपस्थिति में रहने से जीवन की हर अवस्था में सुख-शांति और स्थिर आशा मिलती है। यह एक आंतरिक विरोधाभास नहीं, बल्कि विश्वास के अनुभूति-सूचक संकेत हैं—ख़ासकर जब मानव चेतना सामाजिक-आकांक्षा, पाप के कारण उथल-पुथल और विरोध का सामना कर रही हो।
महत्वपूर्ण यह है कि यह आनन्द, मगनता और आशा सभी एक साथ हैं—यह केवल बाहरी खुशी नहीं, परन्तु केन्द्रीय विश्वास का स्थाई फल है। यह उद्धारकर्ता की ओर उन्मुख आत्म-समर्पण और ईश्वर की साक्षीभूत उपस्थिति का परिणाम है।
शब्दों और imagery की स्पष्टता
आनन्दित हुआ— एक गहराई से भरा जीवनत्वी भाव जो ईश्वर के वचन और प्रवर्तन के कारण उभरता है।
जीभ मगन हुई— खुशी से भरी वक्त- वक्तव्य की चहक-चहक; भक्त-गायन, गवाही देने की तत्परता का प्रतीक।
शरीर भी आशा में बना रहेगा— शरीर की सुरक्षा और स्थिरता की आशा; मृत्यु के बाद भी जीवन की निश्चितता के साथ जुड़ा हुआ विश्वास का प्रमाण।
संबद्ध टेक्स्ट से संकेत
- इब्न-ए- नूर (यूहन्ना 14) में यीशु ने पवित्र आत्मा को सहायक बताया, जो विश्वासियों को स्थिरता और स्मरण-शक्ति देता है।
- रोमियों 15:13 में कहा गया कि परमेश्वर merges आत्मा के माध्यम से विश्वासियों को आशा, आत्म-सम्पादन और आनंद दें।
पितृ-टिप्पणियाँ से संगत निष्कर्ष
प्वित्र-तत्व के साथ जीना, सभ्यता के भीतर एकता और उत्साह बनाये रखने का भरोसा देता है। Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke जैसी चर्चित सार्वजनिक-डायनाकृत टिप्पणीकारों ने स्पष्ट किया है कि यह आनन्द और आशा, विश्वास के वास्तविक परिणाम हैं, जो मानव-जीवन में परमेश्वर की निकटता के कारण प्रकट होते हैं।
उद्धृत संक्षेप (आशय-रेखा): James-स्टाइल आत्म-समर्पण से प्रेरणा पद्धति, पवित्र आत्मा का आना और विश्वास-जीवन का स्थायित्व—ये सब एक दूसरे से जुड़ते हैं और परिचित अनुभव के रूप में दिखते हैं।
पुनरावलोकन/सार
यह पाठ यह दर्शाता है कि ईश्वर के साथ लगन से जीना मानसिक सुख और बाहरी जीवन की स्थिरता का स्रोत बनता है। यदि हम ईश्वर के वचन पर दृढ़ विश्वास रखें, तो हमारे दिल-जीभ-शरीर सभी भाग एक संग एक साथ आनंद, गान और आशा के साथ चलते हैं।
आज की व्यावहारिक क्रिया-योग्यता
cross-references
- रोमियों 15:13: परमेश्वर विश्वास में आशा की पूर्णता दे ताकि आत्मा में आनंद और शांति बनी रहे।
- यूहन्ना 14-16: पवित्र आत्मा के अवतार से साक्षी बनना और आंतरिक सुरक्षा।
- रोमियों 8:28: सभी चीजें मिलकर परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप अच्छे के लिए काम करती हैं—हमारी आशा को पुष्ट करती है।
टिप्पणी-संदर्भ उद्धरण: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke की सामान्य टिप्पणी से सार यह है कि यह आनन्द और आशा विश्वास-जीवन के प्राकृतिक फल हैं; उनके संक्षेप विचार का उपयोग यहां समेकित किया गया है।