1 कुरिन्थियों 10:23 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

सब वस्तुएँ मेरे लिये उचित तो हैं, परन्तु सब लाभ की नहीं। सब वस्तुएँ मेरे लिये उचित तो हैं, परन्तु सब वस्तुओं से उन्नति नहीं।

1 कुरिन्थियों 10:23 पद-दर-पद बाइबल टीका

आशय का संक्षेप

पौलुस कहता है कि किसी भी बात का होना स्वाभाविक रूप से गलत नहीं है—कई चीजें "मेरे लिये उचित" हैं—पर प्रश्न यह है कि क्या वे हमें आध्यात्मिक लाभ पहुँचाती हैं। हर स्वतंत्रता का उपयोग उन्नति के उद्देश्य से होना चाहिए, न कि केवल अनुमति प्राप्त होने के कारण।

प्रसंगिक पृष्ठभूमि

1 कुरिन्थियों के दसवें अध्याय में पौलुस इज़राइल और फसलों (खाने-पीने, भेड़ों की बलिदान आदि) के उदाहरणों से सीख देते हैं। वे-क्या संयम और पारस्परिक प्रेम की आवश्यकता है। पहले अध्याय के बाद से पौलुस कुरीन्तियों की स्वतंत्रता और उससे उत्पन्न लड़खड़ाहटों पर चर्चा कर रहे हैं; यह पद उसी चर्चा का निचोड़ है—मानसिक स्वतंत्रता के साथ आत्म-नियंत्रण आवश्यक है।

व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ

“सब वस्तुएँ मेरे लिये उचित तो हैं”—यह वाक्य उस सामान्य सिद्धांत का पुनरूल्‍लेख है कि मसीही स्वतंत्रता कई मामलों में अनुमति देती है। परन्तु पौलुस तुरंत जोड़ता है कि अनुमति ही पर्याप्त मापदंड नहीं है।

“परन्तु सब लाभ की नहीं” और “परन्तु सब वस्तुओं से उन्नति नहीं”—यहाँ दोहरा तर्क है: कोई कर्म नैतिक रूप से स्वीकार्य हो सकता है, किन्तु वह व्यक्ति या समुदाय के लिए फलदायी नहीं भी हो। 'लाभ' और 'उन्नति' शब्द अध्यात्मिक परिपक्वता, विवेक और प्रेम की दिशा में वृद्धि की बात करते हैं, न कि केवल तात्कालिक संतुष्टि।

पौलुस का दृष्टिकोण उपयोगितावादी नहीं है; वह यह पूछते हैं कि क्या यह कार्य मसीही जीवन में प्रेम, शान्ति और अधिकारबोध को बढ़ाता है। यदि कोई स्वतंत्रता भाइयों का विश्वास कमजोर कर दे, तो उसे त्याग देना चाहिए।

संदर्भित टिप्पणी स्रोतों से संक्षेप उद्धरण

  • मैथ्यू हेनरी ने लिखा है कि स्वतंत्रता का लक्ष्य आत्म-उन्नति और परमेश्वर की महिमा है—"उचित होने का अर्थ परमिश्रय नहीं" (संक्षेप उद्धरण)।
  • अल्बर्ट बार्न्स ने इस विचार को जोड़ते हुए कहा कि मानव स्वतंत्रता का प्रयोग अन्य विश्वासियों के हित में सोचा जाना चाहिए—"लाभ का मतलब केवल व्यक्तिगत हित नहीं" (संक्षेप उद्धरण)।

थीमैटिक सूची

  • स्वतंत्रता बनाम जिम्मेदारी
  • व्यक्तिगत अधिकार और सामुदायिक लाभ
  • आध्यात्मिक उन्नति को अंतिम मानदंड बनाना

संबंधित शास्त्रीय संदर्भ

रोमियों 14:19—शान्ति और समृद्धि के लिए निर्माण पर बल; यह पद दिखाता है कि व्यक्तिगत व्यवहारों का मूल्य सामुदायिक शांति और निर्माण से मापा जाता है।

गलातियों 5:13—स्वतंत्रता को प्रेम में सेवा करने के लिए बुलाया गया है; यह वचन पौलुस के यहाँ दिए गए तर्क को समर्थन करता है।

याकूब 3:13—परिपक्वता और सज्जनता से किए गए कर्मों की आवश्यकता; यह उद्धरण नैतिक परिपक्वता को आंकने का एक अन्य पहलू दर्शाता है।

प्रायोगिक निष्कर्ष

जब हम निर्णय लें कि क्या कुछ "ठीक" है, तो केवल अनुमति को नहीं बल्कि परिणामों को भी आंकें। मसीही स्वतंत्रता का मानदंड यह है कि क्या वह हमें और हमारे भाई-बहनों को आत्मिक रूप से ऊपर उठाती है। कठिन निर्णयों में प्रेम और निर्माण—दोनों—प्रधान मानें और अपनी आज़ादी को दूसरों के लिए बोझ या लज्जा न बनने दें।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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कोई गंदी बात तुम्हारे मुँह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही निकले जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उससे सुननेवालों पर अनुग्रह हो।

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