Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 कुरिन्थियों 10:1 1 कुरिन्थियों 10:2 1 कुरिन्थियों 10:3 1 कुरिन्थियों 10:4 1 कुरिन्थियों 10:5 1 कुरिन्थियों 10:6 1 कुरिन्थियों 10:7 1 कुरिन्थियों 10:8 1 कुरिन्थियों 10:9 1 कुरिन्थियों 10:10 1 कुरिन्थियों 10:11 1 कुरिन्थियों 10:12 1 कुरिन्थियों 10:13 1 कुरिन्थियों 10:14 1 कुरिन्थियों 10:15 1 कुरिन्थियों 10:16 1 कुरिन्थियों 10:17 1 कुरिन्थियों 10:18 1 कुरिन्थियों 10:19 1 कुरिन्थियों 10:20 1 कुरिन्थियों 10:21 1 कुरिन्थियों 10:22 1 कुरिन्थियों 10:23 1 कुरिन्थियों 10:24 1 कुरिन्थियों 10:25 1 कुरिन्थियों 10:26 1 कुरिन्थियों 10:27 1 कुरिन्थियों 10:28 1 कुरिन्थियों 10:29 1 कुरिन्थियों 10:30 1 कुरिन्थियों 10:31 1 कुरिन्थियों 10:32 1 कुरिन्थियों 10:33



कौरिन्थियों के पास पढ़े जाने वाला पाठ: 1 कुरिन्थियों 10:26
मुख्य व्याख्यात्मक बिंदु: यह Verse परमेश्वर की समस्त सामर्थ्य और अधिकार की पुष्टि करता है—पूरी पृथ्वी और उसमें जो कुछ भी है—सब प्रभु की है। इसके कारण ईश्वर की प्रसंशा, आशीष और कर्तव्य पर संतुलित दृष्टिकोण बनता है: मनुष्य को दृढ़ विश्वास से यह मानना चाहिए कि भोजन-व्यवहार में भी देह के लिए ज़रूरी आवश्यकताओं के स्रोत परमेश्वर ही हैं; इसलिए हम हर उपलब्ध पदार्थ को ईश्वर की देन मानकर आभार व्यक्त करें।
साहित्यिक संदर्भ के संदर्भ में
यह वचन भजन-24:1 से प्रेरित प्रतीत होता है—«पृथ्वी और उसकी भरपूरी प्रभु की है»—जो सृष्टि-स्वामित्व की सार्वभौमिक घोषणा है। प्रेरित पॉल के वाक्यों में इस सिद्धान्त को नए उत्तरदायित्वों के साथ जोड़ा गया है: किसी भी वस्तु या पदार्थ के साथ भगवान के अधिकार को भुलना हमारे प्रभुत्व-आडम्बर को ठेस पहुँचाता है; इसलिए सत्ता-समझ अपने आपको परमेश्वर की देह-सम्पदा के रूप में देखती है।
आध्यात्मिक महत्त्व
1 कुरिन्थियों 10:26 बताता है कि हर वस्तु, जो पृथ्वी पर मौजूद है, ईश्वर की है—यह हमें संतुलन सिखाती है: न तो ऋण-चुकौती की चिंता में हताश हों, न ही खाने-पीने के मामलों में अति-स्वार्थ-लिप्सा रखें। संतोष, आभार और सत्य-स्वीकार हमारे व्यवहार का मार्ग गढ़ते हैं। यह पाद हमारे समुदाय को उदारता, आत्म-नियंत्रण और विनम्रता की ओर निर्देशित करता है, ताकि क्रय-विक्रय और भोजन-खर्च में भी परमेश्वर की इच्छा सर्वोपरि मानी जाए।
अन्य ग्रंथों से संबंध
विवेचनात्मक प्रश्न
संक्षेप निष्कर्ष
यह वचन हमें याद दिलाता है कि पृथ्वी-भर की समस्त चीज़ें परमेश्वर की नियति और अधिकार के अधीन हैं। भोजन और दैनिक पदार्थों के बारे में हमारा आचार-व्यवहार इसी मौलिक विश्वास पर टिकना चाहिए: प्रभु की बनावट और उसकी देन के रूप में हम उन्हें स्वीकार कर, आभार और नम्रता के साथ जीवन बिताएं।
पूर्व-मत विचार (पूर्ववर्तियों के संकेत)
संदर्भ-चिन्ह: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के भिन्न-भिन्न टिप्पणियाँ नीचे से मिलकर एक संयुक्त व्याख्या बनाती हैं—पर यहाँ प्रेरक तथ्य यह है कि सारी पृथ्वी परमेश्वर की है, इसलिए हमारा व्यवहार भी उसी आधार पर निर्णायक होना चाहिए।
अनिर्वचनीय उद्धरण चेतावनी
यह पाठ एकत्रित टिप्पणी में संसाधित व्याख्या के आधार पर है; यदि किसी पाठक ने Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke की स्पष्ट उद्धरण-रेखा बताई हो, तो उसे उद्धरण की प्रकृति-संरचना के अनुसार ही प्रस्तुत किया गया है।