Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 कुरिन्थियों 10:1 1 कुरिन्थियों 10:2 1 कुरिन्थियों 10:3 1 कुरिन्थियों 10:4 1 कुरिन्थियों 10:5 1 कुरिन्थियों 10:6 1 कुरिन्थियों 10:7 1 कुरिन्थियों 10:8 1 कुरिन्थियों 10:9 1 कुरिन्थियों 10:10 1 कुरिन्थियों 10:11 1 कुरिन्थियों 10:12 1 कुरिन्थियों 10:13 1 कुरिन्थियों 10:14 1 कुरिन्थियों 10:15 1 कुरिन्थियों 10:16 1 कुरिन्थियों 10:17 1 कुरिन्थियों 10:18 1 कुरिन्थियों 10:19 1 कुरिन्थियों 10:20 1 कुरिन्थियों 10:21 1 कुरिन्थियों 10:22 1 कुरिन्थियों 10:23 1 कुरिन्थियों 10:24 1 कुरिन्थियों 10:25 1 कुरिन्थियों 10:26 1 कुरिन्थियों 10:27 1 कुरिन्थियों 10:28 1 कुरिन्थियों 10:29 1 कुरिन्थियों 10:30 1 कुरिन्थियों 10:31 1 कुरिन्थियों 10:32 1 कुरिन्थियों 10:33



1 कुरिन्थियों 10:8 पर विवेचनात्मक दृष्टि
यह पद ऐसी चेतावनी को उजागर करता है जो इस समय के ईसाइयों के लिए भी प्रासंगिक है: प्रभु का चरितार्थ बनाम अशुद्ध आचरण में फँसना। पुराने testaments के उदाहरणों से संकेत मिलते हैं कि भ्रष्टाचार और अनियमितता शरीर और आत्मा दोनों को नुकसान पहुँचाते हैं। इसVerse के पीछे का संदेश यह है कि ईसाई जीवन में साधारण आकर्षणों के पीछे नहीं चलना चाहिए, बल्कि परमेश्वर की स्पष्ट इच्छा के अनुसार चलना चाहिए।
पूर्व प्रसंग और मूल संदेश
पद 8 का संदर्भ बरीया (कुषाल) कहानी से जुड़ा है जहां कुछ लोग गिन की गलती में व्यभिचार में लिप्त हुए और परिणामस्वरूप बहुत बड़ी संख्या में मरे। इस घटना से प्रेरित Paul यह बताने की कोशिश करता है कि परमेश्वर के लोग सांसारिक आकर्षणों के कारण नहीं, बल्कि प्रभु यीशु के केंद्रीय आशीर्वाद के अनुसार जीवन बिताएं। व्यभिचार केवल एक नैतिक बाधा नहीं है, बल्कि सामुदायिक जीवन के संतुलन को भी बिगाड़ सकता है, जिससे व्यक्तियों के बीच विश्वास-tested और डरावनी परिस्थितियाँ बन सकती हैं।
मुख्य संदेश
थीम्स और बाइबलिक सहारा
इस अध्याय में तीन प्रमुख धागे निकलते हैं: पाप से बचाव के लिए जागरूकता, पवित्रता की मांग, और विश्वास-जीवन के सामुदायिक गठन। पुराने नियम के अनुसार भी पवित्रता की मांग बार-बार उठती है; नए नियम में यह मांग यीशु-जीवन के पालन और पवित्र आत्मा के प्रभाव से समर्थित है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संवेदी संबंध)
1) गिनती 25:1-9: यह वही घटना है जो पवित्रशास्त्र में व्यभिचार के परिणामों को स्पष्ट करती है। संक्षेप टिप्पणी: दण्ड और विवेक का संयुक्त उदाहरण कि परमेश्वर पवित्रता को कितनी गंभीरता से लेते हैं।
2) याकूब 4:8-9: आत्म-नियमन और पवित्रता के लिए आध्यात्मिक दूर rivulet का चित्रण देता है—कायम रहने के लिए आत्मा-आत्मा संपर्क चाहिए।
3) यूहना 14:15: प्रेम से आदेशों की आचरण के अनुरूप चलना; एक जीवन जो प्रेम से संचालित हो वह पवित्रता के मार्ग पर स्थिर रहता है।
एंथोलॉजी से बनती एक संयुक्त समझ
Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों से समझ बनती है कि पवित्रता एक सतत संघर्ष है, जहां दृढ़ निर्णय, समुदाय की जिम्मेदारी और परमेश्वर की कृपा—इन तीनों के संतुलन की आवश्यकता है। छोटी-सी चूक भी बड़े नुकसान ला सकती है; इसलिए हर कदम पर आत्म-नियंत्रण और प्रेरणा का स्रोत परमेश्वर का प्रेम है। (ใNote: नीचे उद्धरण सीमित रूप में उद्धृत हैं और पूर्ण पाठ नहीं।)
उद्धरण (संक्षेप):
वर्तमान दिन के लिए एक संकीर्ण devotional विचार
पृथक-विषय नहीं, बल्कि हर दिन की καθηनी है कि हम अपने दृष्टिकोण को पवित्र, प्रमाणिक और प्रेम-प्रधान रखें। जो चुना गया, उसकी गवाही समुदाय में प्रकट हो और दूसरों के लिए एक प्रेरणा बने। अगर कभी आकर्षण क्लेश दे, तो परमेश्वर की सहायता और पवित्र आत्मा की कृपा पर टिके रहें।