Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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कथित अर्थ — इफिसियों 4:29 का तात्पर्य
यही शास्त्र बोलता है: किसी भी गंदी बात को मुँह से न निकलने दें, बल्कि आवश्यक और उपयुक्त बात निकले जो उन्नति के लिये हो; ताकि सुनने वालों पर अनुग्रह हो।
संदर्भीय पृष्ठभूमि
यह पाठ पौलुस के राष्ट्रीय-समन्वय के बजाय ईसाई समुदाय के भीतर व्यवहारिक जीवन पर केंद्रित है। पूरी पंक्ति ईश्वर के आत्मा-परक धारणाओं और मसीही सद्भाव के क्रम में है: प्रेम, सद्भाव और दूसरों के लिये लाभकारी वाणी। इस पद के पीछे कार्य-विधि है कि शब्द साधु, सचेत और प्रोत्साहक हों, कुष्ठ और उकसाने वाले शब्दों से बचें।
व्याख्यात्मक अवलोकन
थीमेटिक अवलोकन
संक्षिप्त क्रॉस-रेफरेंसेस और उनका संक्षेपात्मक संबंध
- याकूब 3:10-12 दर्शाता है कि वाणी का संतुलन भीतर की स्थिति का परिणाम है; यह बताता है कि करुणा और वाणी एक साथ कैसे चलनी चाहिए।
- कुलुस्सियों 4:6 बताता है कि हमारे बोलने का ढंग नम्रता, आर्थिक और प्रेम-युक्त हो ताकि शब्द निष्कलंक होकर सुनाई दें।
- मरकुस 7:20-23 यह दर्शाता है कि दिल से निकलने वाला शब्द ही एक वास्तविक आचरण बनता है; बाहर का शब्द लोग कैसे देखते हैं, इसका संकेत देता है।
हिंदी कथन-नोट्स (परिच्छेद–संरचना के भीतर সরল-उद्धरण)
हिंदी अनुवाद में “कोई गंदी बात तुम्हारे मुँह से न निकले” का आशय है कि शब्दों पर नियंत्रण रखना ताकि वे संहारक न हों, बल्कि आवश्यक होने पर भीतरी जीवन को प्रकट करें।
यह वाक्य हमारे दैनिक वार्तालाप के लिए मार्गदर्शन है कि कैसे हम कठिन परिस्थितियों में भी विनम्रता, नम्रता और प्रेम से बात करें।
व्यावहारिक takeaway
मुख्य स्रोत और उद्धरण-धारा
इस विचारधारा के परिप्रेक्ष्य में प्रकाशित सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणीकारों के संकेत—मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के उद्धरण आवश्यक होने पर संक्षेप में संदर्भित किये जाते हैं; इनकी पूर्ण पंक्तियाँ यहाँ संक्षेपित हैं और यदि सीधे उद्धरण हैं, तो उन्हें संकेतित किया गया है:
मूल पाठ के अनुसार: “कोई गंदी बात तुम्हारे मुँह से न निकले…” यह वाक्यांश स्पष्ट करता है कि शब्दों पर नियंत्रण रखना कितना आवश्यक है, ताकि वे सुननेवालों पर अनुग्रह डालें।
नोट: नीचे उल्लेखित पूर्व-आलेखों के संक्षिप्त विचार देंखे, जहां आवश्यक हो, 2-3 पंक्तियों में.
हेनरी/बार्न्स/क्लार्क की मौलिक टिप्पणियाँ सामान्य रूप से इस भाव को पुष्ट करती हैं कि वाणी का दायरा और लक्ष्य लोगों के कल्याण के लिये हो, न कि अपने ego के लिये।