Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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इफिसियों 4:7 का संकथन और संदर्भ
यège पंक्ति मसीह के शरीर चर्च के भीतर हर एक सदस्य को दिए गए दान के विविधता और विविध परिमाण पर केंद्रित है। प्रभु यीशु मसीह ने हर अनुयायी को दया-पूर्ण अनुग्रह के अनुसार अंश दिया है ताकि विश्वसनीय भूमिका निभाई जा सके। इस पाठ को पवित्रशास्त्र के पूरे प्रेरित-समूह की एकता के संदर्भ में पढ़ना महत्वपूर्ण है: एकता के भीतर विविधता, एक दूसरे की सहायता और सेवकई कार्यों की विविधता दिखती है।
मुख्य विचार
इस पद में कहा गया है कि हरेक विश्वासी को मसीह की ओर से एक-एक अलग-परिमाण दान मिला है; यह दान अनुग्रह के अंतर्गत है, जिसका उद्देश्य चर्च की खिदमत और परस्पर उन्नति है। परमेश्वर ने यह दान किसी एक व्यक्ति की विशेष योग्यता के कारण नहीं, बल्कि मसीह के परिमाण के अनुसार दिया है ताकि कुल समिति पूरे शरीर के निर्माण में समर्थ हो सके।
तीन प्रमुख थीम
दो-तीन प्रमुख संदर्भ और उनका अर्थ
Cross-reference 1: रोम 12:3-8—हर सदस्य को अन्य अंगों के साथ व्यवस्था में रखने के लिए दान का वितरण और अंगों की विविधता का महत्व।
Cross-reference 2: 1 कुरिन्थ 12:4-11—आध्यात्मिक वरदानों की विविधता और उनका एक दिलचस्प एकजुट उपयोग।
Cross-reference 3: Ef 1:11-12—यही दान कर्त्तव्य और योजना के अनुसार देता है ताकि हमें परमेश्वर के उद्देश्य के साथ बांधा जा सके।
व्यावहारिक चिंतन
आधार यह है कि हर विश्वासी अपने दान को चर्च के समृद्धि के लिए स्वीकार करे, न कि खुद के गौरव के लिए। यदि आप अपने दान को जानना चाहते हैं, तो अपने समुदाय में अन्य सदस्यों के साथ सहयोग करें, मार्गदर्शन मांगें, और देखें कि कौन-सा क्षेत्र आपके दान से अधिक उन्नति पाता है—यथा शिक्षण, सेवा, प्रेरणा, या साहचर्य।
संक्षिप्त निष्कर्ष
इफिसियों 4:7 बताता है कि परमेश्वर ने मसीह के दान के अनुसार हर एक सदस्य को एक अंश दिया है, ताकि चर्च एक साथ बढ़े, एकता में रहे और परमेश्वर की महिमा के लिए खड़ा हो सके। यह दायित्व केवल व्यक्तिगत लाभ नहीं, बल्कि ekatā-उन्नति और समुदाय की सेवा का है।
संदेश-संदर्भ: मत्ती हेनरी, ऐल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायमैन टिप्पणियों से समर्थ बिंदु—हर एक व्यक्ति के दान का उद्देश्य चर्च की एकता और सेवा है; दान की विविधता चर्च की गहराई को दर्शाती है। (उद्धरण स्पष्ट उद्धरण के रूप में मिलते हैं, परन्तु पूर्ण टेक्स्ट यहाँ संक्षेपित रखा गया है।)